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शेयर बाजार में लगातार छठे दिन तेजी, सेंसेक्स 78,800 के पार, निफ्टी 24,400 के करीब

Share Market Today शेयर बाजार में लगातार छठे दिन तेजी, सेंसेक्स 78,800 के पार, निफ्टी 24,400 के करीब

भारतीय शेयर बाजार में उछाल

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VVinita Kohli

Share Market Today: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगने का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। गुरुवार, 5 नवंबर को कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1500 अंक चढ़कर 78,800 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी 400 अंकों से ज्यादा की बढ़त के साथ 24,400 के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। सुबह करीब 10:28 बजे सेंसेक्स 78,798.25 पर 1.94 प्रतिशत की बढ़त के साथ था, जबकि निफ्टी 50 में 1.78 प्रतिशत की तेजी के साथ यह 24,387.85 पर पहुंच गया था। बाजार में इस तेजी के पीछे केवल अमेरिकी चुनाव का नतीजा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, विदेशी निवेशकों की भारतीय शेयरों में वापसी, सितंबर तिमाही के बेहतर नतीजे और डॉलर में कमजोरी की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। बाजार में लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई।

अमेरिकी चुनाव में ट्रम्प की पार्टी की हार से बदले वैश्विक समीकरण

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिए आने वाले दो वर्षों में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। कांग्रेस के दोनों सदनों पर विपक्ष का नियंत्रण होने से उनकी नीतियों और फैसलों पर निगरानी तथा राजनीतिक विरोध बढ़ने की संभावना है। इस चुनावी नतीजे का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दिखाई दिया। निवेशकों को उम्मीद है कि कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति से ट्रम्प प्रशासन पर ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ सकता है। सैन्य अभियानों और उनसे जुड़े बजट को लेकर भी मुश्किलें बढ़ने की आशंका है। बाजार में इसे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं में राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत

शेयर बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का सस्ता होना भी है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 93.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड करीब 87-88 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में दोनों प्रमुख बेंचमार्क में तेज गिरावट दर्ज की गई थी। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें घटने से देश के आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है। इससे महंगाई, परिवहन लागत और पेट्रोलियम उत्पादों से जुड़ी कंपनियों के खर्च को राहत मिलने की उम्मीद रहती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में गिरावट को भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

सितंबर तिमाही के नतीजों ने भी बाजार की तेजी को सहारा दिया है। कई बड़ी कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन ने निवेशकों की उम्मीदों को मजबूत किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंफोसिस और टीसीएस जैसी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बेहतर नतीजों का सीधा असर बाजार की धारणा पर पड़ता है। जब कंपनियों की कमाई और कारोबार में मजबूती दिखाई देती है तो निवेशक उनके शेयरों में पैसा लगाने के लिए अधिक उत्साहित होते हैं। इससे सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों को ऊपर जाने में मदद मिलती है।

अमेरिकी डॉलर में कमजोरी की उम्मीद ने भी भारतीय बाजार के लिए माहौल बेहतर किया है। डॉलर कमजोर होने पर उभरते बाजारों में निवेश आकर्षक हो सकता है। ऐसे में विदेशी संस्थागत निवेशक भारत जैसे बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं। विदेशी निवेशकों की खरीदारी के आंकड़े भी बाजार में लौटते भरोसे की ओर इशारा कर रहे हैं। 30 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 20,834 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। अकेले 4 नवंबर को विदेशी निवेशकों ने करीब 7,284 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। लगातार खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली है।

शेयर बाजार में लगातार छठे दिन तेजी

भारतीय शेयर बाजार में 5 नवंबर को लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। 28 अक्टूबर से शुरू हुई इस तेजी ने बाजार को निचले स्तरों से काफी ऊपर पहुंचा दिया है। इस दौरान सेंसेक्स में करीब 8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और सूचकांक 79,000 के स्तर के करीब पहुंच गया। इससे पहले 15 अक्टूबर को सेंसेक्स में 1,533 अंकों की तेजी दर्ज की गई थी। वहीं, 8 अप्रैल को सेंसेक्स 2,946 अंक चढ़ा था, जो इस साल की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त रही। मौजूदा तेजी में वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम के साथ घरेलू कंपनियों के नतीजों और विदेशी निवेशकों की खरीदारी की भी अहम भूमिका रही है।

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