Sensex Today: दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट के माहौल के बीच भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला जारी है। शुक्रवार, 6 नवंबर को सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा यानी करीब 0.90% चढ़कर 80,000 के पार पहुंच गया। करीब 8 महीने बाद सेंसेक्स इस स्तर पर लौटा है। वहीं, निफ्टी में भी 150 अंक या 0.60% की तेजी दर्ज की गई और यह 24,700 के स्तर पर पहुंच गया। भारतीय बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब दक्षिण कोरिया और जापान के शेयर बाजारों में करीब 6% तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके उलट विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी, IT सेक्टर के शेयरों में उछाल और कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने भारतीय बाजार को मजबूती दी है।
भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला 28 अक्टूबर से जारी है। 28 अक्टूबर से 6 नवंबर के बीच सेंसेक्स 73,246 के स्तर से बढ़कर 80,000 के पार पहुंच गया। इस दौरान सेंसेक्स में 8% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है। इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को भी बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली थी। सेंसेक्स 2,009 अंक उछलकर 79,310 पर बंद हुआ था। यह इस साल की दूसरी सबसे बड़ी एकदिनी बढ़त रही। इससे पहले 8 अप्रैल को सेंसेक्स में 2,946 अंकों की तेजी दर्ज की गई थी। लगातार सात कारोबारी सत्रों से जारी तेजी ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। खास बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव के बावजूद भारतीय बाजार में खरीदारी बनी हुई है।
भारतीय शेयर बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी मानी जा रही है। पिछले सात दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में 32,210 करोड़ रुपये का निवेश किया है। लगातार हो रही इस खरीदारी से बाजार को मजबूत समर्थन मिला है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी का असर खासतौर पर बड़े शेयरों में दिखाई दे रहा है। IT, बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर की बड़ी कंपनियों में निवेश बढ़ने से सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर जाने में मदद मिली है। दुनियाभर के बाजारों में बिकवाली के बावजूद भारत में विदेशी निवेशकों का पैसा आना घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
रिलायंस, इंफोसिस और TCS के अच्छे नतीजों से बढ़ा भरोसा
बाजार में तेजी की दूसरी बड़ी वजह कंपनियों के सितंबर तिमाही के मजबूत नतीजे हैं। रिलायंस, इंफोसिस और TCS जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी ने बाजार का माहौल बेहतर किया है। सेंसेक्स में शामिल 30 बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त का सीधा असर इंडेक्स पर पड़ता है। गुरुवार को इनमें से ज्यादातर कंपनियों के शेयरों में उछाल दर्ज किया गया था। IT सेक्टर में खरीदारी और कंपनियों के बेहतर वित्तीय प्रदर्शन ने निवेशकों को बाजार में पैसा लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके अलावा मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कम कीमतों को भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
LTCG टैक्स में बदलाव की उम्मीद से विदेशी निवेशकों का नजरिया बदला
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे, कच्चे तेल की कम कीमतें और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में बदलाव की संभावना ने बाजार का माहौल बेहतर किया है। उनका मानना है कि इन वजहों से विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार को लेकर नजरिया बदला है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भी विदेशी निवेशकों की वापसी को बाजार में तेजी की अहम वजह माना है। LTCG टैक्स में संभावित कटौती या बदलाव की उम्मीद से निवेशकों में सकारात्मक माहौल बना है। हालांकि, टैक्स में बदलाव अभी केवल उम्मीद है, इसे किसी घोषित सरकारी फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
डॉ. वीके विजयकुमार के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की शुरुआती खरीदारी से बड़े शेयरों में तेजी आई है। उनका मानना है कि बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गज शेयरों में आगे भी रिकवरी देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि लार्जकैप शेयरों में अभी और शॉर्ट कवरिंग बाकी है। ऐसे में बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों की अगुवाई में बड़े शेयरों में आगे भी तेजी आ सकती है। हालांकि, उन्होंने निवेशकों को संभावित मुनाफावसूली को लेकर आगाह भी किया है। बाजार के ऊंचे स्तरों पर पहुंचने के बाद घरेलू निवेशक मुनाफा कमाने के लिए शेयर बेच सकते हैं। इससे बाजार में ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बन सकता है। इसलिए लगातार तेजी के बावजूद निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम को ध्यान में रखकर फैसले लेने की जरूरत है।
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