रियलिटी शो ‘बिग बॉस 19’ की चर्चित फाइनलिस्ट फरहाना भट्ट एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह कोई विवाद नहीं बल्कि उनका सेवा भाव है। हाल ही में ईरान के नेता अली खामनेई की मौत पर संवेदना व्यक्त करने के बाद फरहाना को इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रिया और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था। अपनी छवि को पहुंचे नुकसान के बीच अभिनेत्री ने होली के पावन अवसर पर चकाचौंध से दूर एक ओल्ड एज होम (एल्डर केयर सेंटर) में समय बिताने का फैसला किया। उन्होंने वहां न केवल बुजुर्गों के साथ गुलाल उड़ाया, बल्कि उनके अकेलेपन को बांटकर खुशियां भी साझा कीं।
ट्रोलिंग के बाद बदली जनता की राय
बीते कुछ दिनों से फरहाना भट्ट अपने राजनीतिक बयानों के चलते निशाने पर थीं, जिससे उनकी फैन फॉलोइंग पर भी असर पड़ा था। हालांकि, एक होली इवेंट से सीधे बुजुर्गों के बीच पहुंचकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कलाकार हैं। इंस्टाग्राम पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए फरहाना ने लिखा कि उन्होंने अपनी होली सबसे खूबसूरत लोगों के साथ बिताने का फैसला किया। अभिनेत्री के मुताबिक, बुजुर्गों के चेहरे पर आई मुस्कान ही उनका असली त्योहार है और इस अनुभव को किसी फिल्टर की जरूरत नहीं है।
धार्मिक सद्भाव और प्रोफेशनल लाइफ
फरहाना भट्ट ने हमेशा खुद को एक उदारवादी कलाकार के रूप में पेश किया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि वह मुस्लिम हैं, लेकिन उनका विश्वास सभी धर्मों की परंपराओं और त्योहारों में बराबर है। पेशेवर मोर्चे पर बात करें तो फरहाना को आखिरी बार संगीतकार अमाल मलिक के चर्चित गाने ‘यहीं गुजार दूं’ में देखा गया था। इससे पहले वह ‘लैला मजनू’ और ‘सिंघम 3’ जैसी बड़ी फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवा चुकी हैं। उनके इस बदले हुए अंदाज ने अब उनके आलोचकों का मुंह भी बंद कर दिया है।

