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Fatehabad Doctor Misbehaviour : डॉक्टर की 'गंदी भाषा' के खिलाफ 10 महिलाओं ने खोला मोर्चा, सीएमओ ऑफिस में जमकर हुई बहस

AAmandeep Singh
डॉक्टर की 'गंदी भाषा' के खिलाफ 10 महिलाओं ने खोला मोर्चा, सीएमओ ऑफिस में जमकर हुई बहस
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फतेहाबाद। फतेहाबाद का सरकारी स्वास्थ्य महकमा इन दिनों अपने ही एक अधिकारी की हरकतों की वजह से सुर्खियों में है। शहर के पॉलीक्लिनिक में कार्यरत करीब एक दर्जन महिला कर्मचारियों ने अतिरिक्त एसएमओ (ASMO) के खिलाफ प्रताड़ना और अभद्र व्यवहार का मोर्चा खोल दिया है। मामला तब और गरमा गया जब महिला स्टाफ ने न केवल मीडिया के सामने अपनी व्यथा सुनाई, बल्कि कार्यकारी सीएमओ डॉक्टर बुधराम के कार्यालय में आरोपी डॉक्टर को जमकर खरी-खोटी भी सुनाई। लिखित शिकायत के जरिए महिलाओं ने साफ कर दिया है कि वे अब इस तरह के व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगी।

“मिस और मिसेज का फेर”: रजिस्टर देखते ही शुरू हुई डॉक्टर की ‘फिलासफी’

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पीड़ित महिला कर्मचारियों ने बताया कि वे साल 2013 से विभाग में अपनी सेवाएं दे रही हैं, लेकिन ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं आई। आरोप है कि 1 मई को कार्यभार संभालने वाले नए डॉक्टर ने 11 मई को पूरे स्टाफ की एक बैठक बुलाई। बैठक के दौरान हाजिरी रजिस्टर चेक करते समय डॉक्टर ने महिलाओं के नाम के आगे ‘मिस’ (Miss) शब्द लिखे होने पर आपत्ति जताई। डॉक्टर ने कथित तौर पर सवाल किया कि “क्या आप सभी कुंवारी हैं?” जब महिलाओं ने बताया कि वे शादीशुदा हैं, तो डॉक्टर ने दलील दी कि नाम के आगे ‘मिसेज’ (Mrs) लगा होना चाहिए ताकि पता चले कि कौन विवाहित है और कौन नहीं।

‘फ्रेंडली माहौल’ की आड़ में अशोभनीय व्यवहार का आरोप

शिकायतकर्ता महिलाओं का दावा है कि डॉक्टर ने स्टाफ को हिदायत दी कि वे कार्यालय में “फ्रेंडली माहौल” बनाकर रखें और यहाँ होने वाली बातों को घर तक न ले जाएं। आरोप है कि इसके बाद एक महिला कर्मचारी की सीट पर बैठकर डॉक्टर ने ओपीडी स्लिप हाथ में लेते हुए कुछ ऐसी बातें कीं, जो बेहद अशोभनीय और अपमानजनक थीं। महिलाओं ने इसे सीधे तौर पर मानसिक प्रताड़ना करार दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि डॉक्टर की भाषा और व्यवहार पेशेवर मर्यादाओं के बिल्कुल विपरीत था।

बचाव में डॉक्टर की सफाई और विभाग का कड़ा रुख

इस पूरे विवाद पर आरोपी डॉक्टर नरेंद्र का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को ‘गलतफहमी’ करार दिया है। डॉक्टर ने कहा, “अगर मेरी किसी बात से स्टाफ को ठेस पहुंची है या उन्हें कुछ गलत महसूस हुआ है, तो मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।” हालांकि, महिला स्टाफ इस माफी से संतुष्ट नहीं है और सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़ी है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के सीएमओ (CMO) डॉक्टर बुधराम ने त्वरित कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि आरोपी डॉक्टर को फिलहाल डेपुटेशन पर भेजा जा रहा है ताकि जांच के दौरान कार्यालय का माहौल खराब न हो। पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि क्या ‘फ्रेंडली माहौल’ के नाम पर महिला कर्मचारियों की निजता और सम्मान से खिलवाड़ करने की इजाजत दी जा सकती है?

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