Gairsain Assembly Session: उत्तराखंड के चमोली जिले के गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को सियासी तनाव देखने को मिला। सिमली बैंड और जंगलचट्टी में पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। कांग्रेस और उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के कार्यकर्ताओं को विधानसभा की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और आगे बढ़ने लगे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा समेत कई नेता बैरिकेड पर चढ़ गए। गोदियाल ने कहा कि वे विधानसभा जाकर रहेंगे। जंगलचट्टी में UKD और दूसरे संगठनों के प्रदर्शन के कारण करीब दो किलोमीटर लंबा जाम लग गया। प्रदर्शन के दौरान गोदियाल सड़क पर लेट गए, जबकि करण माहरा भी उनके साथ मौजूद रहे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा, “जब-जब धामी डरता है, पुलिस को आगे करता है।”
गोदियाल ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं और आम लोगों को रोका जा रहा है। उनके मुताबिक, हजारों लोग सड़कों पर फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनके और करण माहरा के साथ करीब एक हजार लोग हैं। गोदियाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को संरक्षण दे रही है और अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP को बचाने का काम कर रही है। बैरिकेडिंग पर रोके जाने के बाद गणेश गोदियाल और करण माहरा जंगल के रास्ते दिवालीखाल की ओर निकल पड़े। दोनों नेताओं ने पहाड़ी रास्ते से आगे बढ़ने का प्रयास किया। विधानसभा की सीढ़ियों पर भी कांग्रेस विधायकों ने विरोध दर्ज कराया। उनकी प्रमुख मांगों में विधानसभा सत्र की कम अवधि और अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP को बचाने के आरोपों को लेकर जवाबदेही शामिल रही। सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 1,500 पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। भारी सुरक्षा इंतजामों के बावजूद विधानसभा की ओर जाने वाले मार्गों पर प्रदर्शन और जाम की स्थिति बनी रही।
वंदे मातरम् से शुरू हुआ सत्र, खंडूड़ी और हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि
भराड़ीसैंण स्थित उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को सत्र की शुरुआत वंदे मातरम् के साथ हुई। सदन में पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि दी गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खंडूड़ी के योगदान को याद किया। सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने उनके राजनीतिक जीवन, प्रशासनिक कार्यशैली, ईमानदारी और उत्तराखंड के विकास में उनके योगदान का उल्लेख किया। भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कहा कि खंडूड़ी के साथ उनका लंबा राजनीतिक संबंध रहा। उन्होंने बताया कि पहली बार उन्होंने खंडूड़ी को देहरादून में अटल बिहारी वाजपेयी की सभा की अध्यक्षता करते देखा था। बाद में जब खंडूड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बने, तो चमोली को उनका चुनाव संयोजक बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य था कि लगातार तीन चुनावों में उन्होंने खंडूड़ी के चुनाव संयोजक के रूप में काम किया। खटीमा विधायक भुवन कापड़ी ने खंडूड़ी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने सरकारी नौकरियों में इंटरव्यू खत्म कर भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाया था। इससे प्रदेश के युवाओं का भरोसा बढ़ा। कापड़ी ने कहा कि खंडूड़ी के कार्यकाल को ईमानदारी और सुशासन के लिए याद किया जाता है। उन्होंने सड़क एवं परिवहन मंत्री रहते हुए स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के तहत सड़क विकास और पहाड़ी क्षेत्रों में पुलों के निर्माण में उनके योगदान का भी उल्लेख किया। कापड़ी ने कहा कि युवाओं के हित में लिए गए ऐसे फैसलों को आगे बढ़ाना सरकार की जिम्मेदारी है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने खंडूड़ी के जीवन को राष्ट्रसेवा, अनुशासन, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सेना से मिला अनुशासन खंडूड़ी ने सार्वजनिक जीवन में भी अपनाया। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और सरकारी भर्तियों को निष्पक्ष बनाने पर जोर दिया। रेखा आर्य के मुताबिक, खंडूड़ी का मानना था कि सरकारी नौकरी सिफारिश से नहीं, बल्कि योग्यता और निष्पक्ष प्रक्रिया के आधार पर मिलनी चाहिए। विधायक राम सिंह कैड़ा ने कहा कि केंद्रीय मंत्री रहते हुए खंडूड़ी ने कुमाऊं से देहरादून के बीच नदियों पर कई पुल बनवाए, जिससे लोगों को आवागमन में राहत मिली। उन्होंने भीमताल-हल्द्वानी और हल्द्वानी-नैनीताल सड़क के चौड़ीकरण सहित क्षेत्र की कई समस्याओं के समाधान में खंडूड़ी के कार्यकाल का उल्लेख किया। कैड़ा ने कहा कि अपने प्रशासनिक अनुभव, दूरदर्शिता और कार्यकुशलता से उन्होंने उत्तराखंड के विकास में योगदान दिया। विधायक अरविंद पांडे ने खंडूड़ी की समय की पाबंदी का एक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि 2007 में बाजपुर में एक कार्यक्रम के दौरान खंडूड़ी तय समय पर पहुंच गए थे, लेकिन जनता के नहीं आने के बावजूद वे वहीं बैठे रहे। पांडे ने कहा कि खंडूड़ी ने उन्हें तराई से गन कल्चर खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। उनके अनुसार, खंडूड़ी ने पुलिसिया कार्रवाई के बजाय युवाओं को रोजगार देकर बंदूकों की संस्कृति खत्म करने पर जोर दिया। अरविंद पांडे ने खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि भी दी।
लक्सर के विधायक शहजाद ने खंडूड़ी को ईमानदारी, नियम-कानून और समय की पाबंदी के लिए याद किया। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी फाइलों का वजन नहीं, बल्कि नियम देखते थे। पात्रता पूरी होने पर वे किसी के साथ भेदभाव नहीं करते थे। शहजाद ने कहा कि खंडूड़ी ने अपने कार्यकाल में पहाड़ से मैदान तक सभी को समान नजर से देखा। उन्होंने हरिद्वार क्षेत्र में पुलों के निर्माण और सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए उनके योगदान का भी उल्लेख किया। शहजाद के मुताबिक, खंडूड़ी मुलाकात का समय तय करते थे और उसका पूरी तरह पालन करते थे। भाजपा नेता मदन कौशिक ने भी सदन में पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि देते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने खंडूड़ी को याद करते हुए कहा कि विपक्ष में रहते हुए भी उनसे कभी परायेपन का एहसास नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रहते हुए खंडूड़ी ने उनकी विधानसभा के 16 ग्राम प्रधानों को अन्याय से बचाया था। प्रीतम सिंह के मुताबिक, खंडूड़ी ने आश्वासन दिया था कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा और उन्होंने सभी 16 प्रधानों को दंडित होने से बचाया।
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी खंडूड़ी की समय की पाबंदी और सुशासन को याद किया। उन्होंने कहा कि भारी बारिश में भी खंडूड़ी तय समय पर सभाओं में पहुंचते थे और देर से आने वालों को समय का महत्व समझाते थे। पहाड़ों में सड़कों को जीवनरेखा मानने के कारण उन्हें ‘रोड मैन’ कहा जाता था। महाराज ने कहा कि खंडूड़ी ने लोकायुक्त बिल, सिटिजन चार्टर और ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ जैसे फैसलों के जरिए प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन पर जोर दिया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे उत्तराखंड की पहचान थे। उनके व्यक्तित्व और कार्यों ने उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश में अपनी छाप छोड़ी। आर्य ने कहा कि खंडूड़ी का राजनीतिक जीवन पांच दशकों से अधिक का रहा। उन्होंने सिविल इंजीनियर, सैन्य अधिकारी और प्रबंधन सलाहकार के रूप में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। यशपाल आर्य के मुताबिक, 1991 में राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने के बाद खंडूड़ी लगातार पांच बार गढ़वाल से लोकसभा सदस्य चुने गए और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। आर्य ने कहा कि खंडूड़ी ने गढ़वाल ही नहीं, पूरे उत्तराखंड की आवाज संसद में मजबूती से उठाई और प्रदेश के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
अनुपूरक बजट की मांगें पेश करेंगे मुख्यमंत्री
विधानसभा सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी वित्तीय वर्ष 2026-27 की अनुपूरक अनुदान मांगें पेश करेंगे। सत्र की शुरुआत के साथ ही सदन के भीतर श्रद्धांजलि और वित्तीय कार्यवाही का कार्यक्रम है, जबकि विधानसभा परिसर के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। कांग्रेस विधायक सत्र की कम अवधि पर सवाल उठा रहे हैं। इसके साथ ही अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित VIP को बचाने के आरोपों को लेकर भी विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामलों में आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। ये आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं। विधानसभा की कार्यवाही और बाहर जारी प्रदर्शन के बीच सरकार के सामने सत्र की कार्यवाही सुचारु रखने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। करीब 1,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती के बावजूद सिमली बैंड और जंगलचट्टी में प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान झड़प हुई और जाम लगा। वहीं, सदन में पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी और पूर्व मंत्री हीरा सिंह बिष्ट को श्रद्धांजलि देकर नेताओं ने उनके योगदान को याद किया।
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