Garbdo Mela Kurukshetra: रहमदीन, बराड़ा। हरियाणा की पावन धरा पर लोक संस्कृति और धार्मिक आस्था का संगम एक बार फिर परवान चढ़ने जा रहा है। कुरुक्षेत्र जिले के तंदवाल-हरयोली गाँव की सीमा पर मारकंडा नदी के आंचल में स्थित प्रसिद्ध महर्षि मार्कण्डेय मंदिर उदासीन आश्रम (बड़ा अखाड़ा) की ओर से इस वर्ष शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर दो दिवसीय पारंपरिक ‘गरबड़ों का मेला’ आयोजित किया जा रहा है। आगामी 26 और 27 अक्टूबर 2026 को लगने वाले इस ऐतिहासिक मेले को लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों और पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं में अभी से जबर्दस्त उत्साह का माहौल है।
मारकंडा नदी के जल में मीठे चावल अर्पित करने की है गहरी मान्यता
इस मेले की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता यहाँ की पुरानी धार्मिक परंपराएँ हैं। मेले में दूर-दराज से पहुँचने वाले श्रद्धालु मारकंडा नदी के पवित्र जल में मीठे चावलों का प्रसाद चढ़ाकर माथा टेकते हैं और अपनी मन्नतें मांगते हैं। लोक मान्यता है कि नदी के पानी में मीठे चावल प्रवाहित करने से महर्षि मार्कण्डेय ऋषि प्रसन्न होते हैं। कई श्रद्धालु चावल के अलावा मीठी खीलों का प्रसाद भी नदी में अर्पित करते हैं। नदी तट पर शीश नवाकर श्रद्धालु सीधे महर्षि मार्कण्डेय मंदिर के भीतर प्रवेश करते हैं, जहाँ वे आश्रम के संस्थापक स्वामी अमर दास उदासीन और महंत मुनि जीवी दास उदासीन की समाधि पर जाकर नमन करते हैं। मेले के दौरान स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाली संगत के सहयोग से जगह-जगह भव्य भंडारों का आयोजन भी किया जाता है।
कुश्ती के दांव-पेच और लोकसंगीत से सजेगी रातें
मेले के आयोजकों ने इस बार आने वाले दर्शकों के मनोरंजन और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। आश्रम के महंत ज्ञान मुनि उदासीन ने जानकारी दी कि मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ हरियाणवी संस्कृति, पारंपरिक खेलों और लोककला का बेहतरीन मेल देखने को मिलेगा। मेले के दोनों दिन दोपहर बाद ठीक चार बजे से शाम छह बजे तक रोमांचक कुश्ती दंगल का आयोजन किया जाएगा, जिसमें दूर-दराज से आए नामी पहलवान अड़े-अखाड़े में अपने दमखम और शारीरिक दांव-पेच का जौहर दिखाएंगे।
इसके अलावा, रात्रिकालीन कार्यक्रमों में रात नौ बजे से दो बजे तक पारंपरिक हरियाणवी सांग का भव्य मंचन होगा। लोक कला और ग्रामीण जीवनशैली से सराबोर ये सांग प्रस्तुतियाँ हरियाणा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर देंगी। आयोजकों का मुख्य उद्देश्य आधुनिकता की दौड़ में अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराओं को सहेजना और ग्रामीण अंचल में आपसी भाईचारे के ताने-बाने को और मजबूत करना है।
मेले में सजेगी घरेलू सामान और खिलौनों की दुकानें
शरद पूर्णिमा के इस पारंपरिक आयोजन को लेकर प्रशासनिक और प्रबंधकीय स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं। मेले के प्रांगण में बच्चों के लिए खेल-खिलौने, महिलाओं के लिए श्रृंगार व साज-सज्जा का सामान, घरेलू जरूरत की वस्तुएं और पारंपरिक ‘गरबड़ों’ व मिट्टी के सुंदर बर्तनों की दुकानें सजने लगी हैं। मेले की रौनक को देखने के लिए हरियाणा के अलावा पंजाब और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुँचते हैं।
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