Breaking News
Kalesar Tree Cutting Controversy: कलेसर में 50 साल पुराने आम के 5 फलदार पेड़ काटने पर बवाल, खेत मालिक ने सरपंच प्रतिनिधि पर लगाया आरोप, जांच में जुटी पुलिसपंजाब में नशा तस्करी पर कार्रवाई; तरनतारन से 4 किलो 29 ग्राम हेरोइन बरामद, दो युवक गिरफ्तारKarnal Gambling Raid: करनाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, हांसी रोड पर चल रही थी सट्टा खाईवाली, 1.17 लाख कैश के साथ दबोचा आरोपीधामी सरकार के विरासत अभियान में 4,943 मामलों का समाधान, शेष प्रकरणों पर नजरYamunanagar Road Accident: यमुनानगर के ऊंचा चंदना रोड पर खौफनाक हादसा, बाइक ने मारी थी टक्कर, इलाज के दौरान बुजुर्ग की गई जानKalesar Tree Cutting Controversy: कलेसर में 50 साल पुराने आम के 5 फलदार पेड़ काटने पर बवाल, खेत मालिक ने सरपंच प्रतिनिधि पर लगाया आरोप, जांच में जुटी पुलिसपंजाब में नशा तस्करी पर कार्रवाई; तरनतारन से 4 किलो 29 ग्राम हेरोइन बरामद, दो युवक गिरफ्तारKarnal Gambling Raid: करनाल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, हांसी रोड पर चल रही थी सट्टा खाईवाली, 1.17 लाख कैश के साथ दबोचा आरोपीधामी सरकार के विरासत अभियान में 4,943 मामलों का समाधान, शेष प्रकरणों पर नजरYamunanagar Road Accident: यमुनानगर के ऊंचा चंदना रोड पर खौफनाक हादसा, बाइक ने मारी थी टक्कर, इलाज के दौरान बुजुर्ग की गई जान

Gen Z Relationship issues: 7 साल, 3 डेटिंग ऐप्स और लगातार रिजेक्शन! 26 साल के युवा का छलका दर्द, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Gen Z Relationship issues: 7 साल, 3 डेटिंग ऐप्स और लगातार रिजेक्शन! 26 साल के युवा का छलका दर्द, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

Gen Z Relationship issues

AI Quick Summary

Want to save time? Let our AI read the article and give you 3 quick bullet points.

Listen to this article
AUDIO VERSION
AAmandeep Singh

Gen Z Relationship issues: स्वाइप राइट, मैच, कुछ देर तक हल्की-फुल्की बातचीत और फिर अचानक दूसरी तरफ से सन्नाटा… जिसे आज की भाषा में ‘घोस्टिंग’ कहा जाता है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के इस दौर में किसी से मिलना जितना आसान दिखता है, एक सच्चा रिश्ता बनाना उतना ही पेचीदा साबित हो रहा है। हाल ही में सोशल प्लेटफॉर्म रेडिट पर 26 साल के एक जेन जी युवा ने अपनी पर्सनल लाइफ का कड़वा सच बयां किया है। उसकी इस आपबीती ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या आज के युवाओं के लिए रिश्ते और भावनाएं वाकई इतनी सतही हो चुकी हैं?

करियर से लेकर फिटनेस तक सब सही, फिर भी क्यों मिल रहा रिजेक्शन?

विज्ञापन

रेडिट यूजर ने बताया कि वह जल्द ही अपनी कॉलेज डिग्री पूरी करने वाला है और पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए उसने अच्छी सैलरी वाली जॉब भी की है। खुद को ग्रूम रखने के लिए वह हफ्ते में दो बार जिम जाता है, अपनी फिटनेस और पहनावे का पूरा ध्यान रखता है। उसने बताया कि करीब 14 साल की उम्र से ही वह लड़कियों को पसंद करता आया है। वह पहले दोस्ती करता है और फिर डेट के लिए पूछता है, लेकिन ज्यादातर मौकों पर उसे सिर्फ इनकार ही सुनने को मिला।

युवक का कहना है कि उसने बार, क्लब और कॉलेज कैंपस में भी लड़कियों से बातचीत शुरू करने की कोशिश की, लेकिन इन तमाम कोशिशों के बाद उसे सिर्फ एक डेट मिली। वह मुलाकात भी आगे नहीं बढ़ सकी और सामने से जवाब मिला—”आप अच्छे इंसान हैं, लेकिन आप मेरी पसंद के टाइप नहीं हैं।”

5 से 7 साल, 3 बड़े ऐप्स और सिर्फ 25-30 मैच

डिजिटल दुनिया का रुख करते हुए इस युवा ने पिछले 5-7 सालों में टिंडर, हिंज और बम्बल जैसे लगभग हर बड़े डेटिंग ऐप को आजमाया। अपनी प्रोफाइल तस्वीरों से लेकर बायो तक में सुधार किया, लेकिन नतीजा हैरान करने वाला रहा। इतने सालों में उसे महज 25 से 30 मैच ही मिले। इनमें से भी मुश्किल से 8-10 लड़कियों ने ठीक से बात की, जबकि बाकी ने शुरुआत में ही इग्नोर कर दिया।

एक डेट का खराब अनुभव साझा करते हुए उसने बताया कि एक बार एक लड़की उसके साथ रेस्टोरेंट गई, महंगा खाना ऑर्डर किया, सारा बिल उससे भरवाया और बचा हुआ खाना पैक कराकर चलती बनी। हद तो तब हो गई जब उसने जाते-जाते उसे गलत फोन नंबर दे दिया।

“लोग वही घिसी-पिटी सलाह देते हैं, जिन्हें मैं सालों से अपना रहा हूं”

युवक का सबसे बड़ा दर्द यह है कि जब भी वह किसी से इस बारे में सलाह मांगता है, तो उसे वही पुरानी बातें सुनने को मिलती हैं—”अपनी फिटनेस पर ध्यान दो”, “साफ-सुथरे रहो”, “दूसरों की बात ध्यान से सुनो” या “अच्छे कपड़े पहनो”। उसका कहना है कि वह यह सब पहले से ही ईमानदारी से कर रहा है, लेकिन फिर भी नतीजा शून्य ही रहता है। उसे समझ नहीं आ रहा कि आखिर उससे गलती कहां हो रही है।

ऑप्शन्स की भरमार या ‘चॉइस पैरालिसिस’?

इस पोस्ट पर इंटरनेट यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी तेजी से सामने आईं। एक यूजर ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए लिखा कि डेटिंग ऐप्स के इस माहौल ने उन्हें किसी भी प्रोपेगैंडा से ज्यादा निराश किया है और अब लगता है कि उम्मीद ही खत्म हो चुकी है।

वहीं, दूसरे यूजर ने इसके पीछे का मनोवैज्ञानिक कारण समझाते हुए लिखा कि ऐसा नहीं है कि लड़कियां रिश्तों में दिलचस्पी नहीं रखतीं। डेटिंग ऐप्स ने महिलाओं के सामने ‘अनगिनत विकल्पों’ का एक ऐसा भ्रम खड़ा कर दिया है, जहां हर समय एक बेहतर ऑप्शन मौजूद होने का अहसास होता है। जब सैकड़ों लोग एक साथ किसी से बात करने की कोशिश करते हैं, तो सामने वाला घबरा जाता है और फैसला नहीं ले पाता। इसे ही आज का युवा ‘चॉइस पैरालिसिस’ कह रहा है।

ख़बर पसंद आई? शेयर करें
विज्ञापन

ट्रेंडिंग की और ख़बरें

ताज़ा ख़बरें सीधे अपने ईमेल पर

जगमार्ग न्यूज़ की बड़ी ख़बरें रोज़ अपने इनबॉक्स में पाएं। मुफ़्त, कभी भी अनसब्सक्राइब करें।