Gen Z Dating Culture: दौर बदल चुका है और इस बदलाव की सबसे आगे की कतार में खड़ी है ‘जेन जी’ (Gen Z) यानी आज की युवा पीढ़ी। सोशल मीडिया की इस दुनिया में प्यार, रोमांस और रिश्तों के तौर-तरीके पूरी तरह पलट चुके हैं। आज हालात यह हैं कि किसी को पसंद करने से लेकर उससे रिश्ता जोड़ने तक का सफर डेटिंग ऐप्स, इंस्टाग्राम रील्स और दोस्तों के बीच होने वाली गपशप तक सिमटकर रह गया है। कोई ‘टॉकिंग स्टेज’ में अटका है, तो कोई बिना किसी पक्के वादे के ‘सिचुएशनशिप’ का हिस्सा बना हुआ है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आज के युवाओं को असल जिंदगी में डेट करने से ज्यादा उसके बारे में बातें करना और मीम्स शेयर करना ज्यादा भा रहा है?
‘टॉकिंग स्टेज’ से आगे क्यों नहीं बढ़ पा रहा Gen Z?
अगर आप इंस्टाग्राम या टिकटॉक पर नजर डालें, तो डेटिंग अब एक खुली किताब बन चुकी है। ‘ग्रीन फ्लैग’, ‘रेड फ्लैग’, ‘घोस्टिंग’ और ‘बेंचिंग’ जैसे भारी-भरकम शब्द अब युवाओं की रोजमर्रा की बोलचाल का हिस्सा बन चुके हैं। किसी से मिलने से पहले ही उसके बर्ताव का ‘एनालिसिस’ किया जाता है। दोस्तों के साथ बैठकर चैट के स्क्रीनशॉट शेयर करना और घंटों चर्चा करना आम बात है।
लेकिन इस सबके बीच एक बड़ा पेंच भी है। बातचीत भले ही मीलों लंबी हो जाए, लेकिन जब बात खुलकर अपने दिल की बात सामने वाले के सामने रखने की आती है, तो कदम पीछे खींच जाते हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) की एक स्टडी के मुताबिक, 18 से 25 साल के उम्र के कई डेटिंग ऐप यूजर्स अपनी भावनाएं जताने में डरते हैं। उन्हें सबसे बड़ा डर इस बात का सताता है कि कहीं सामने वाला उनका मजाक न उड़ा दे या उन्हें रिजेक्ट न कर दिया जाए। यही वजह है कि कई रिश्ते कभी ‘टॉकिंग स्टेज’ से बाहर ही नहीं निकल पाते।
हर रिश्ते को एक ‘नाम’ देने की जिद
आज की पीढ़ी की एक और खूबी यह है कि वे हर परिस्थिति को एक परिभाषा देना चाहते हैं। अगर कोई अचानक बात करना बंद कर दे, तो उसे सीधे ‘घोस्टिंग’ करार दे दिया जाता है। अगर कोई बिना कमिटमेंट के साथ है, तो वह ‘सिचुएशनशिप’ बन जाता है। इन शब्दों से युवाओं को अपने अनुभवों को समझने में आसानी तो होती है, लेकिन कई बार वे रिश्तों की सहजता को खो बैठते हैं। प्यार को महसूस करने के बजाय उस पर हद से ज्यादा दिमागी कसरत होने लगती है। इतना ही नहीं, जेम्स मैडिसन यूनिवर्सिटी की हालिया रिपोर्ट बताती है कि युवा अपनी लव लाइफ की उलझनों को सुलझाने के लिए अब दोस्तों के साथ-साथ टिकटॉक और चैटजीपीटी जैसे प्लेटफॉर्म्स से सलाह ले रहे हैं।
क्या प्यार से भाग रही है नई पीढ़ी?
भले ही ऊपर से यह सब थोड़ा उलझा हुआ या सतही लगे, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि Gen Z प्यार के अहसास से दूर भाग रहा है। डेटिंग ऐप ‘हिंज’ के एक बड़े सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। सर्वे में शामिल 84 फीसदी जेन जी डेटर्स ने माना कि वे अपने रिश्तों में बेहद गंभीर और गहरे इमोशनल कनेक्शन की तलाश में हैं।
यानि बात साफ है; युवा प्यार के खिलाफ नहीं हैं, बस वे पहले के मुकाबले बहुत ज्यादा सतर्क और संभलकर चल रहे हैं। सोशल मीडिया और चैटिंग उन्हें अपने डर को बयां करने का एक सेफ जरिया देती है। लेकिन रिश्तों की असलियत स्क्रीन पर चलने वाली चैट्स या ट्रेंड्स से नहीं, बल्कि दो इंसानों के बीच की आमने-सामने की समझ और कोशिश से ही तय होती है।


