Haryana AQI Today: सर्दी की आहट के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में हवा का मिजाज बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। प्रदूषण के लगातार गहराते संकट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 6 नवंबर से ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। (Haryana Pollution News Today) इसके तहत निर्माण गतिविधियों से लेकर वाहनों की आवाजाही तक पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। यह सख्ती दिल्ली के अलावा हरियाणा के फरीदाबाद, गुरुग्राम और सोनीपत सहित पूरे एनसीआर बेल्ट में प्रभावी रहेगी।
बल्लभगढ़ में 397 पहुंचा AQI, इन शहरों की स्थिति चिंताजनक
प्रदूषण के आंकड़े प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहे हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा 6 नवंबर की शाम 4 बजे जारी रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के 9 प्रमुख शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 300 के पार ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। बल्लभगढ़ 397 AQI के साथ राज्य में सबसे जहरीली हवा वाला शहर रहा, जबकि गुरुग्राम (368) दूसरे और भिवानी (353) तीसरे स्थान पर रहा।
निर्माण कार्य ठप, BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल गाड़ियों पर शिकंजा
GRAP-3 लागू होते ही पूरे एनसीआर में खुदाई, तोड़फोड़, ड्रिलिंग, ईंट-चिनाई और खुले में निर्माण सामग्री की लोडिंग-अनलोडिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। स्टोन क्रशर और खनन गतिविधियां पूरी तरह बंद रहेंगी, हालांकि रेलवे, मेट्रो, अस्पताल और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक परियोजनाओं को शर्तों के साथ अनुमति दी गई है।
सड़कों पर उड़ती धूल और धुएं को काबू में करने के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल मानक की चार पहिया गाड़ियों की एंट्री व संचालन पर रोक लगा दी गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पलवल और पानीपत में यह वाहन प्रतिबंध लागू नहीं है।
5वीं तक ऑनलाइन क्लास और WFH का विकल्प (Gurugram Air Quality Index)
बढ़ते प्रदूषण से बच्चों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में 5वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए हाइब्रिड (ऑनलाइन/ऑफलाइन) मोड का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, सरकारी और निजी दफ्तरों को 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम करने और बाकी स्टाफ को ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) की व्यवस्था देने की सलाह जारी की गई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की सुस्त रफ्तार, गिरता तापमान, औद्योगिक उत्सर्जन और पराली का धुआं मिलकर स्थिति को और अधिक विकराल बना रहे हैं। डॉक्टरों ने बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को सुबह-शाम आउटडोर गतिविधियों से बचने और मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी है।
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