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Haryana Crop Insurance: खरीफ फसलों के बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई, जानिए किस फसल पर मिलेगी कितनी राशि

Haryana Crop Insurance: खरीफ फसलों के बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई, जानिए किस फसल पर मिलेगी कितनी राशि

खरीफ फसलों के बीमा की अंतिम तिथि 31 जुलाई, जानिए किस फसल पर मिलेगी कितनी राशि

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AAmandeep Singh

Haryana Crop Insurance: हरियाणा के अन्नदाताओं को प्राकृतिक आपदाओं के प्रकोप से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को खरीफ-2026 से रबी-2026-27 तक की अवधि के लिए नए और बेहद किसान-हितैषी प्रावधानों के साथ लागू कर दिया है। इस बार योजना में ऐसे बदलाव किए गए हैं जो सीधा किसानों की जेब को सुरक्षा प्रदान करेंगे।

सबसे राहत की बात यह है कि अगर फसल की कटाई के बाद उसे खेत में सुखाने या सुखाने के लिए रखा गया है और उस दौरान चक्रवाती बारिश, बेमौसम बरसात या ओलावृष्टि से नुकसान होता है, तो 14 दिनों तक उस पर भी बीमा दावा मिलेगा।

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बीमा क्लेम में देरी पर कंपनियों को ठोकना पड़ेगा 12% ब्याज

अक्सर देखा जाता है कि फसल के नुकसान के बाद किसान बीमा क्लेम के लिए कंपनियों के चक्कर काटते रहते हैं। इस मनमानी पर रोक लगाने के लिए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नए नियमों के अनुसार, यदि बीमा कंपनियां निर्धारित समयावधि के भीतर किसानों के क्लेम का निपटान नहीं करती हैं, तो उन्हें किसानों को 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से हर्जाना देना होगा।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत खरीफ में धान, बाजरा, मक्का, कपास और मूंग को शामिल किया गया है, जबकि रबी में गेहूं, सरसों, चना, जौ और सूरजमुखी इसके दायरे में आएंगे। खरीफ फसलों के रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 31 जुलाई रखी गई है।

प्रीमियम का मामूली हिस्सा देंगे किसान, 72 घंटे में देनी होगी नुकसान की रिपोर्ट

यह योजना ऋणी और गैर-ऋणी दोनों ही तरह के किसानों के लिए पूरी तरह से वैकल्पिक रखी गई है। प्रीमियम दरों को बेहद वाजिब रखा गया है—किसानों को खरीफ फसलों के लिए मात्र 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और कमर्शियल फसल यानी कपास के लिए 5 प्रतिशत प्रीमियम ही चुकाना होगा।

बाकी बचा हुआ भारी-भरकम प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बराबर बांटेंगी। हालांकि, किसी भी प्राकृतिक आपदा या स्थानीय जलभराव से नुकसान होने की स्थिति में किसानों को 72 घंटे के भीतर ‘क्रॉप लॉस ऐप’, हेल्पलाइन नंबर 14447 या कृषि रक्षक पोर्टल पर सूचना देना अनिवार्य होगा।

फसलवार बीमा राशि तय, तकनीक से होगा उपज का सटीक आकलन

सरकार ने प्रति हेक्टेयर बीमित राशि भी स्पष्ट कर दी है। धान के लिए 1.11 लाख रुपये, कपास के लिए 1.14 लाख रुपये, गेहूं के लिए 84,386 रुपये और सरसों के लिए 56,639 रुपये प्रति हेक्टेयर की बीमा राशि तय की गई है।

इसके अलावा, पारदर्शी तरीके से फसल नुकसान के आकलन के लिए इस बार सैटेलाइट और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (हरसेक) को तकनीकी भागीदार बनाया गया है, जो गेहूं और धान की पैदावार का सटीक डेटा जुटाएगा,

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