Sonipat Wrestler Kajal Dhochak: विश्व पटल पर भारत और हरियाणा की कुश्ती का लोहा मनवाने वाली सोनीपत की बेटी काजल ढोचक का अपने गृह जिले में पहुंचने पर जोरदार अभिनंदन किया गया। विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में ऐतिहासिक सिल्वर मेडल जीतकर लौटीं काजल का ग्रामीणों और खेल प्रेमियों ने ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और फूल-मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया। एक साधारण टैक्सी चालक की बेटी काजल ने महिला कुश्ती के हेवीवेट वर्ग में पदक जीतकर इतिहास रच दिया है—वह इस वर्ग में विश्व चैंपियनशिप का मेडल अपने नाम करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी हैं।
चाचा ने खुद की पहलवानी छोड़ भतीजी के सपने को बनाया अपना लक्ष्य
अपनी इस अभूतपूर्व और ऐतिहासिक कामयाबी का श्रेय काजल ने अपने परिवार के अटूट समर्थन और विशेष रूप से अपने चाचा कृष्ण पहलवान के त्याग को दिया है। काजल ने बताया कि उनके चाचा भी एक मंजे हुए पहलवान थे, लेकिन भतीजी के भीतर कुश्ती के प्रति जबरदस्त लगन देखकर उन्होंने अपनी पहलवानी को विराम दे दिया। इसके बाद चाचा ने काजल की ट्रेनिंग, डाइट और तैयारियों को ही अपने जीवन का इकलौता मकसद बना लिया। चाचा की इसी निस्वार्थ मेहनत और लगन का नतीजा आज पूरे देश के सामने है।
अब ओलंपिक पोडियम पर तिरंगा फहराने की तैयारी
स्वागत समारोह के दौरान गदगद नजर आ रहे चाचा कृष्ण पहलवान ने कहा कि बेटी की दिन-रात की कड़ी मेहनत ने सोनीपत ही नहीं, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने बताया कि विश्व चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने का पड़ाव पार हो चुका है और अब काजल का एकमात्र ध्येय आने वाले ओलंपिक खेलों के पोडियम पर भारत का राष्ट्रध्वज फहराना है। काजल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से सोनीपत और आसपास के अखाड़ों में प्रैक्टिस कर रहे युवा पहलवानों में भी नए जोश का संचार हुआ है।
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