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Hydrogen Train India: पीएम मोदी दे सकते हैं देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की सौगात, तैयारियां तेज

Hydrogen Train India: पीएम मोदी दे सकते हैं देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की सौगात, तैयारियां तेज

देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल अंतिम चरण में, 12 दिनों में मिलेगी खुशखबरी

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AAmandeep Singh

Hydrogen Train India: भारतीय रेल के इतिहास में एक बड़ा तकनीकी और पर्यावरण अनुकूल बदलाव बेहद करीब आ गया है। देश की पहली अत्याधुनिक और पूरी तरह प्रदूषण मुक्त हाइड्रोजन ट्रेन को पटरियों पर उतारने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। सब कुछ ठीक रहा तो अगले दो हफ्तों के भीतर इस ट्रेन के सभी तकनीकी परीक्षण पूरे कर लिए जाएंगे।

रेलवे इस प्रोजेक्ट को लेकर किस कदर गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को दिल्ली मंडल के डीआरएम (DRM) पुष्पेश त्रिपाठी खुद आला अधिकारियों की टीम के साथ विशेष ट्रेन से जींद जंक्शन पहुंचे और तैयारियों का ऑन-द-स्पॉट जायजा लिया।

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डीआरएम और उनकी टीम ने जींद स्टेशन परिसर के साथ-साथ इस प्रोजेक्ट के सबसे अहम हिस्से यानी वहां बने विशेष हाइड्रोजन प्लांट का भी बारीकी से मुआयना किया।

इसके अलावा अधिकारियों ने स्टेडियम के पास बने हेलीपैड का भी निरीक्षण किया, जिसे भविष्य के बड़े आयोजनों के मद्देनजर तैयार रखा जा रहा है। डीआरएम ने मौके पर मौजूद इंजीनियरों और स्थानीय अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि ट्रेन के कमर्शियल रन से पहले ग्राउंड लेवल पर कोई भी कसर बाकी न रहे।

120 की रफ्तार का टेस्ट पास, रूट सेफ्टी पर रेलवे का पूरा फोकस

इस ग्रीन ट्रेन के रूट और इसकी क्षमताओं को लेकर रेलवे ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं। डीआरएम पुष्पेश त्रिपाठी के मुताबिक, हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल काफी एडवांस स्टेज में प्रवेश कर चुका है।

सोनीपत से जींद के बीच के रेलखंड पर इस ट्रेन को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाकर इसका स्पीड ट्रायल सफलतापूर्वक किया जा चुका है। सिर्फ यही रूट नहीं, बल्कि रेलवे बैकअप प्लान और भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए दिल्ली-सोनीपत और जींद-दिल्ली रेलमार्गों की ट्रैकों की सेहत भी लगातार जांच रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर इस रूट पर भी ट्रेन का संचालन सुचारू रूप से किया जा सके।

तकनीकी विंग के अधिकारियों की मानें तो अगले 10 से 12 दिनों के भीतर फाइनल ट्रायल रन की प्रक्रिया को समेट लिया जाएगा। इसके तुरंत बाद टेस्ट से जुड़े सभी अहम आंकड़े और सेफ्टी रिपोर्ट रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) को सौंप दी जाएगी। आरडीएसओ की टीम इन आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद जैसे ही अपनी अंतिम मंजूरी देगी, वैसे ही इस ट्रेन के नियमित और व्यावसायिक संचालन का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

कार्बन उत्सर्जन से मिलेगी मुक्ति, पीएमओ की मंजूरी का इंतजार

चूंकि यह भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन है और सीधे तौर पर देश के ‘नेट जीरो कार्बन’ मिशन से जुड़ी है, इसलिए इसके उद्घाटन को भव्य बनाने की तैयारी है। रेलवे के गलियारों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, इस ऐतिहासिक ट्रेन की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों कराई जा सकती है। हालांकि, विभागीय स्तर पर अभी किसी तारीख या वीवीआईपी मूवमेंट को लेकर आधिकारिक मुहर लगना बाकी है।

पारंपरिक डीजल इंजनों की जगह इस तकनीक के आने से न सिर्फ करोड़ों रुपये के ईंधन की बचत होगी, बल्कि रेलवे के कार्बन फुटप्रिंट में भी भारी कमी आएगी। धुएं और शोर से मुक्त यह ट्रेन कुरुक्षेत्र, जींद और आसपास के जिलों के आम यात्रियों के लिए सफर का एक बिल्कुल नया और विश्वस्तरीय अनुभव लेकर आ रही है, जो भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगा जहां रेल परिवहन के लिए सबसे सुरक्षित और स्वच्छ ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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