Engineer Becomes sadhu Gangotri: आज के समय में अच्छी डिग्री हासिल करने के बाद हर युवा की यही चाहत होती है कि उसे किसी मल्टीनेशनल कंपनी या प्रतिष्ठित संस्थान में बड़ा पद मिले, मोटी सैलरी हो और जिंदगी आराम से गुजरे। इस मुकाम को हासिल करने के लिए लोग दिन-रात एक कर देते हैं।
लेकिन, जरा सोचिए कि अगर कोई शख्स इन तमाम भौतिक सुख-सुविधाओं, भारी-भरकम पैकेज और शानदार भविष्य को लात मारकर एक दिन सब कुछ छोड़ दे और पहाड़ों की गोद में जा बैठे, तो आप क्या कहेंगे? सुनने में यह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसा लग सकता है, लेकिन यह सच है और इन दिनों गंगोत्री की पहाड़ियों से सामने आई एक कहानी सोशल मीडिया पर हर किसी को झकझोर रही है।
बीटेक, एमटेक और फिर BARC जैसी प्रतिष्ठित ट्रेनिंग
वायरल वीडियो में नजर आने वाले इस संन्यासी का अतीत किसी भी युवा के लिए सपनों जैसा था। उन्होंने साल 2002 में कंप्यूटर इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थानों में शुमार भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC), मुंबई से छह महीने की कठिन ट्रेनिंग पूरी की।
इस सफर के बाद उनके सामने करियर की असीम संभावनाएं थीं। देश-विदेश की बड़ी कंपनियां उनके स्वागत के लिए तैयार थीं, और एक शानदार व आरामदायक जिंदगी उनके कदमों में थी। लेकिन उन्होंने इस लीक पर चलने से इंकार कर दिया। उन्होंने धीरे-धीरे सांसारिक प्रलोभनों से खुद को काटना शुरू किया और एक दिन हमेशा के लिए संन्यास का मार्ग चुन लिया।
जब पूर्व बॉस ने फोन कर पूछा- “क्या तुम पागल हो गए हो?”
जब उनके इस फैसले की भनक उनके पुराने संस्थान से जुड़े एक सीनियर या बॉस को लगी, तो उनका हैरान होना लाजिमी था। जब बॉस ने संपर्क किया और उन्हें गंगोत्री की पहाड़ियों में साधुओं के बीच सादा जीवन जीते पाया, तो उनका पहला रिएक्शन यही था— “क्या तुम पागल हो गए हो?”
एक ऐसा व्यक्ति जिसने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में उच्च शिखर छूए हों, उसका अचानक सब कुछ त्यागकर पहाड़ों में कुटिया बसा लेना किसी के भी गले आसानी से नहीं उतरता। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर जब से यह वीडियो सामने आया है, लोग उनके पुराने कॉर्पोरेट करियर और मौजूदा फकीराना अंदाज के बीच के फर्क पर लंबी चर्चा कर रहे हैं। कई यूज़र्स उनके इस साहसिक और विरक्त जीवन की सराहना भी कर रहे हैं।
“जिंदगी सिर्फ दौड़-भाग और पैसों का नाम नहीं है”
वीडियो में जब उनसे पूछा गया कि आखिर उन्होंने इतना शानदार करियर बीच में ही क्यों छोड़ दिया, तो उनका जवाब बेहद दार्शनिक और दिल को छू लेने वाला था। भौतिकता की अंधी दौड़ पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग बस बड़ी पोस्ट, सैलरी और बैंक बैलेंस के पीछे भाग रहे हैं। इस आपाधापी में वे यह भूल जाते हैं कि जीवन सिर्फ उपलब्धियां बटोरने का जरिया नहीं है।
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उन्होंने बेहद सहजता से समझाया, “जन्म और मृत्यु तो पहले से तय हैं। इन दोनों के बीच का जो बेहद संक्षिप्त वक्त हमें मिलता है, वही हमारी असली जिंदगी है। इसलिए इस कीमती समय को पहचानना और इसका सही इस्तेमाल करना सबसे ज्यादा जरूरी है।” उनकी यह बात आज के तनावपूर्ण दौर में जी रहे युवाओं को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर देती है। हर व्यक्ति का जीवन जीने का नजरिया अलग होता है—किसी के लिए भौतिक सफलता ही सब कुछ है, तो किसी को इस एकांत और अध्यात्म में परम शांति मिल रही है।

