Bhiwani News: प्रकृति की मार और प्रशासनिक लापरवाही ने एक बार फिर हरियाणा के अन्नदाता को सड़क पर लाने के हालात पैदा कर दिए हैं। भिवानी जिले के गांव बीरन में निगाना फीडर अचानक टूटने से किसानों की महीनों की कड़ी मेहनत कुछ ही घंटों में पानी में बह गई। फीडर से छूटे पानी ने खेतों में ऐसा तांडव मचाया कि करीब 150 किल्ले (एकड़) धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई। अब हालात यह हैं कि किसानों को अपनी आंखों के सामने अपनी सालभर की पूंजी और रोजी-रोटी को बर्बाद होते देखना पड़ रहा है।
खेतों में बना तालाब का नजारा, कटाई के बाद डूबी फसल
गांव के खेतों इस वक्त किसी विशाल झील या तालाब जैसा डरावना मंजर दिखाई दे रहा है। स्थिति यह है कि जो बासमती और धान की फसल पककर कटाई के तैयार खड़ी थी, वह पानी के तेज बहाव में जमीन पर बिछ चुकी है। वहीं, जिन किसानों ने फसल की कटाई कर ली थी और उनकी उपज खेत में पड़ी थी, वह भी पानी के बीच डूबकर सड़ने की कगार पर पहुंच गई है।
अपनी फसल को बचाने के लिए किसान दिन-रात एक कर रहे हैं, मजदूरों को लगाकर पानी के बीच से धान निकालने की कोशिश जारी है, लेकिन पानी का स्तर इतना ज्यादा है कि सारी कोशिशें नाकाफी साबित हो रही हैं।
रबी सीजन की बिजाई पर भी मंडराया बड़ा संकट
इस आपदा ने केवल धान की फसल को ही लील नहीं किया, बल्कि किसानों के भविष्य के चक्र को भी पूरी तरह उलझा दिया है। खेतों में पानी के भारी जमाव के कारण जमीन लंबे समय तक दलदली और गीली रहेगी। ऐसे में समय पर आगामी रबी सीजन (गेहूं और अन्य फसलें) की बिजाई होना असंभव नजर आ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक खेतों से पानी नहीं निकलेगा, तब तक जुताई का काम शुरू नहीं हो सकता। समय पर बिजाई न होने से अगले सीजन की पैदावार पर भी सीधा असर पड़ेगा, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
सरपंच प्रतिनिधि की दो-टूक- “आखिर इस बर्बादी का जिम्मेदार कौन?”
घटना से गुस्साए ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। गांव के सरपंच प्रतिनिधि जोगेंद्र फौगाट ने दो-टूक शब्दों में सरकार और सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, “निगाना फीडर टूटने से बीरन गांव के किसानों की जो तबाही हुई है, उसका आखिरकार जिम्मेदार कौन है? हमारी 150 से ज्यादा किल्ले धान की फसल पूरी तरह डूब चुकी है।”
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तुरंत प्रभाव से फीडर के पानी को बंद कर खेतों से पानी की निकासी नहीं की गई और खराब हुई फसल की विशेष गिरदावरी करवाकर मुआवजा नहीं दिया गया, तो मजबूरन किसानों को बड़ा आंदोलन छेड़ना पड़ेगा।
किसानों की प्रशासनिक अधिकारियों से त्वरित गुहार
बीरन गांव के प्रभावित किसानों ने मांग उठाई है कि अधिकारी कागजी कार्रवाई से बाहर निकलकर तुरंत मौके पर आएं और युद्धस्तर पर पानी निकासी के प्रबंध करें। किसानों का यह भी कहना है कि वे पहले से ही कर्ज और लागत के बोझ तले दबे हुए हैं, ऐसे में यह आपदा उनके लिए वज्रपात साबित हुई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर संकट पर कितनी जल्दी सुध लेता है और अन्नदाताओं को क्या राहत मिलती है।
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