Jhota Murder Case: पंजाब के मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर जांच एजेंसियों की कार्रवाई लगातार जारी है। हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार की तोड़ी गई दुकान का मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। सीबीआई और मानसा पुलिस के अधिकारी जेसीबी मशीन लेकर मौके पर पहुंचे और अपनी मौजूदगी में मलबा हटवाया। इस बीच मानसा पुलिस ने मेडिकल स्टोर को गिराने के मामले में 1000 से 1200 अज्ञात युवकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई 14 अक्टूबर को हुई तोड़फोड़ और आगजनी से जुड़ी है। पुलिस अब इस घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए सीसीटीवी फुटेज और उपलब्ध वीडियो की जांच कर रही है। दूसरी ओर, झोटा हत्याकांड को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने सरकार को अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूछा है कि यदि आरोपी के मकान गिराए गए हैं तो उनकी जानकारी और इस कार्रवाई के लिए अपनाई गई कानूनी प्रक्रिया का विवरण भी पेश किया जाए।
हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर तक मांगा कार्रवाई का ब्योरा
मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका (सुओ मोटो PIL) और लाभ सिंह की ओर से दाखिल संबंधित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद इससे जुड़ी कई गतिविधियों और घटनाओं की खबरें अखबारों में भी प्रकाशित हुई थीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बलतेज सिंह सिद्धू ने अधिवक्ता हिम्मत सिंह सिद्धू, मन्नत खुराना और अर्जुन सिंह के साथ पक्ष रखा। अदालत ने पंजाब सरकार से मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी।
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर 2026 को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय वह मेडिकल स्टोर संचालक अश्विनी कुमार से कथित तौर पर प्रतिबंधित नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर सवाल कर रहे थे। इस दौरान गोलीबारी में चार अन्य लोग भी घायल हुए थे। हत्या के अगले दिन यानी 14 अक्टूबर को घटना से नाराज लोगों की भीड़ ने अश्विनी कुमार के मेडिकल स्टोर में तोड़फोड़ की और उसे गिराने के बाद आग लगा दी। इसी दौरान प्रशासन ने अश्विनी के मकान के अगले हिस्से को भी गिराया था। दुकान गिराने की कार्रवाई के दौरान प्रशासन की जेसीबी के बाद भीड़ भी इसमें शामिल हो गई थी। इसी दिन मानसा सिटी-2 थाने में हत्या का मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने अश्विनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। बाद में उसकी पत्नी नीलम रानी, विपिन गर्ग और लाडी को भी मामले में आरोपी बनाया गया।
20 अक्टूबर को CBI जांच का फैसला, अमित शाह ने परिवार से की मुलाकात
20 अक्टूबर को पंजाब सरकार ने झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया। इसी दिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने झोटा के परिवार से मुलाकात की थी। इसके अगले दिन 21 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे सीबीआई की टीम मानसा पहुंची। टीम ने स्थानीय पुलिस से केस की फाइलें और संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए। डीआईजी स्तर के अधिकारी की अगुवाई में जांच शुरू की गई। सीबीआई के साथ चंडीगढ़ की केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) की टीम ने भी घटनास्थल और तोड़े गए मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया। टीम ने दुकान के बाहर और आसपास से फोरेंसिक सैंपल जुटाए। झोटा को गोली लगने के बाद जिस जूते की दुकान पर पहुंचने की बात सामने आई थी, वहां भी जांच की गई। आसपास के दुकानदारों से पूछताछ की गई और दुकान से डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) कब्जे में लेने की जानकारी सामने आई।
22 अक्टूबर को सीबीआई ने चंडीगढ़ में नई एफआईआर दर्ज कर जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली। इस एफआईआर में हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट की धाराएं शामिल की गईं। 22 और 23 अक्टूबर को सीबीआई ने झोटा के पिता भीम सिंह, पत्नी मनप्रीत कौर और मां अमरजीत कौर के बयान दर्ज किए। इसके अलावा अश्विनी कुमार और उसके रिश्तेदार विपिन के घरों की जांच की गई तथा पड़ोसियों से भी पूछताछ हुई। 24 और 25 अक्टूबर को जांच एजेंसी ने नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के एंगल से मानसा के दूसरे मेडिकल स्टोरों की पड़ताल की। इस दौरान तीन मेडिकल स्टोरों का निरीक्षण किया गया।
1000 से 1200 अज्ञात युवकों पर केस, CCTV से पहचान की कोशिश
मेडिकल स्टोर गिराने के मामले में 1000 से 1200 अज्ञात युवकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इतने लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने का अर्थ उनकी गिरफ्तारी नहीं है। पुलिस ने फिलहाल अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया है। अब सीसीटीवी फुटेज, वीडियो और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तोड़फोड़ और आगजनी में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। झोटा हत्याकांड के बाद मानसा में विरोध प्रदर्शन और तनाव की स्थिति भी बनी रही। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों को लेकर अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। दलजीत सिंह की मौत से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं के बाद लक्खा सिधाना समेत कई एक्टिविस्टों और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस टीमों पर हमला करने के आरोप में अलग से केस दर्ज किए गए और गिरफ्तारियां भी हुईं। फिलहाल झोटा की हत्या और मेडिकल स्टोर से जुड़े मामले की जांच सीबीआई कर रही है। वहीं, दुकान गिराने और आगजनी की घटना में शामिल लोगों की पहचान को लेकर पुलिस की कार्रवाई जारी है। हाईकोर्ट में पंजाब सरकार की स्टेटस रिपोर्ट और 15 दिसंबर को होने वाली सुनवाई भी इस मामले में अहम रहेगी।


