Karnal Dengue News Update: करनाल जिले में गुलाबी ठंड की दस्तक के साथ ही डेंगू का डंक अब ज्यादा जहरीला होने लगा है। बीते करीब दो हफ्तों के भीतर डेंगू के मरीजों की संख्या में अचानक उछाल आया है, जिससे स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ गई है। जिले में अब डेंगू के पुष्ट मामलों का आंकड़ा बढ़कर 46 पर पहुंच गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 6 अक्टूबर तक जिले में केवल 34 मरीज दर्ज थे, लेकिन इसके बाद के महज 13 दिनों में 12 नए मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने से हड़कंप मच गया है।
संक्रमण की यह रफ्तार केवल अस्पतालों के वार्डों तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर से लेकर देहात तक के घरों में डेंगू पैदा करने वाले एडीज मच्छरों का ब्रीडिंग ग्राउंड तैयार हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की घर-घर जांच अभियानों के दौरान अब तक 7,261 घरों में डेंगू का खतरनाक लार्वा मिल चुका है। चिंताजनक बात यह है कि बीते दो हफ्तों में ही 971 नए घरों में पानी के बर्तनों, कूलरों और टंकियों के भीतर लार्वा पनपता पाया गया है।
11 हजार से ज्यादा सैंपलों की हो चुकी है जांच
डेंगू के बढ़ते प्रसार को भांपते हुए स्वास्थ्य विभाग ने रैंडम सैंपलिंग और डोर-टू-डोर स्क्रीनिंग का दायरा बढ़ा दिया है। विभाग की ओर से अब तक कुल 11,663 संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेकर लैब में जांच कराए जा चुके हैं। वेक्टर जनित रोग नियंत्रण (NVBDCP) की टीमें लगातार बस्तियों और संवेदनशील इलाकों में जाकर गंदे व जमा पानी का सर्वे कर रही हैं। संदिग्ध लक्षण दिखने वाले हर मरीज पर डॉक्टरों की टीम करीबी नजर बनाए हुए है।
जमीन से महज डेढ़ फीट की ऊंचाई पर हमला करता है एडीज
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, डेंगू फैलाने वाला एडीज एजिप्टी मच्छर बेहद चालाक और अलग स्वभाव का होता है। यह मच्छर मुख्य रूप से सुबह तड़के या फिर ढलती शाम के वक्त ही शिकार बनाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जमीन से केवल एक या डेढ़ फीट की ऊंचाई तक ही उड़ सकता है और इंसान के पैरों व निचले हिस्से पर ही हमला करता है। मच्छर के काटने के 3 से 4 दिन बाद तेज ठंड के साथ बुखार, जोड़ों और आंखों के पीछे दर्द, उल्टी-दस्त तथा त्वचा पर लाल चकत्ते (रैशेज) जैसे लक्षण उभरने लगते हैं।
खुद दवा लेने से बचें, तुरंत कराएं जांच
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनु शर्मा ने बताया कि करनाल के शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में स्वास्थ्य विभाग की विशेष टीमें फॉगिंग और स्प्रे कार्य में जुटी हैं। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह का तेज बुखार होने पर मेडिकल स्टोर से अपने स्तर पर दवाइयां खरीदकर खाने की भूल बिल्कुल न करें। यदि घर में किसी को लक्षण महसूस हों तो तुरंत नजदीकी नागरिक अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जाकर अधिकृत जांच करवाएं। कूलरों, गमलों और छतों पर रखे बर्तनों का पानी हर हफ्ते बदलना ही इससे बचाव का सबसे कारगर तरीका है।

