Karnal Farmer News: हरियाणा की मंडियों में इन दिनों धान खरीद का सीजन परवान पर है, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्थाएं और ऑनलाइन पोर्टल किसानों के लिए जी का जंजाल बन चुके हैं। ताजा मामला करनाल जिले की निसिंग मंडी का है, जहां कैथल से अपनी गाड़ियां भरकर आए किसानों का सब्र जवाब दे गया। जब घंटों इंतजार के बाद भी उनकी ट्रालियों के गेट पास नहीं काटे गए, तो किसानों ने मजबूरन करनाल-कैथल मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। सड़क के बीचों-बीच ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी होने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
चार दशक पुराना नाता, फिर भी धक्के खा रहे किसान
प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उनके गांव निसिंग मंडी के बिल्कुल नजदीक हैं और वे पिछले करीब 40 साल से इसी मंडी में अपना धान लाते रहे हैं। इस सीजन में भी वे पहले अपनी फसल बेचकर जा चुके हैं, लेकिन अचानक अब उनके सामने कागजी दीवार खड़ी कर दी गई है। किसानों का कहना है कि वे पेट पालने और परिवार चलाने के लिए ही मेहनत कर फसल उगाते हैं, लेकिन मंडी के चक्कर में उन्हें अन्नदाता होने का जैसे यह ‘दंड’ मिल रहा है।
गुस्साए किसानों ने सरकार के डिजिटल दावों और व्यवस्था पर करारा कटाक्ष करते हुए कहा, “आजकल तकनीक इतनी आगे बढ़ चुकी है कि खेत में थोड़ी सी पराली जलने पर सेटेलाइट से तुरंत अंतरिक्ष से तस्वीर खींचकर जुर्माना भेज दिया जाता है। लेकिन वही सेटेलाइट यह क्यों नहीं देख पा रहा कि खेत में धान की लहलहाती फसल पककर तैयार हुई है?” उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार एक तरफ देश में कहीं भी फसल बेचने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जब किसान दूसरे जिले की मंडी में पहुंचता है, तो उसे नियमों का हवाला देकर रोक दिया जाता है।
प्रशासन की अपनी दलील, मार्केट कमेटी बोली— आदेशों से बंधे हैं
किसानों के हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची। मार्केट कमेटी निसिंग के सचिव जसपाल मेहता ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रदर्शन कर रहे तमाम किसान मूल रूप से कैथल जिले के रहने वाले हैं और अपनी फसल बेचने यहां आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार और उच्च अधिकारियों की तरफ से स्पष्ट दिशा-निर्देशों का पत्र जारी हुआ है, जिसके तहत दूसरे जिले का धान संबंधित मंडियों में आने पर रोक है।
अधिकारियों का कहना है कि फर्जीवाड़े और बिचौलियों को रोकने के लिए यह सत्यापन जरूरी है, ताकि किसी बाहरी या गलत तरीके से लाई गई फसल की एंट्री न हो सके। हालांकि, किसानों के इस उग्र प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक स्तर पर बातचीत का दौर जारी है ताकि बीच का कोई रास्ता निकालकर जाम खुलवाया जा सके और किसानों की फसल का निपटारा हो सके।

