Suicide Tree Othalanga: प्रकृति ने हमें बेशकीमती और खूबसूरत पेड़-पौधे दिए हैं, लेकिन हर हरीियाली के पीछे जीवन हो, यह जरूरी नहीं। दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के तटीय इलाकों में, विशेषकर केरल के बैकवाटर्स और नमकीन मिट्टी वाले क्षेत्रों में एक ऐसा पेड़ उगता है जो अपनी सुंदरता के आवरण में मौत का जहर छुपाए बैठा है। ओथालंगा (Othalanga) के नाम से जाने जाने वाले इस पेड़ की हरी-भरी पत्तियां और मोहक सफेद फूल किसी का भी ध्यान खींच सकते हैं, लेकिन इसकी सच्चाई बेहद खतरनाक है।
वानस्पतिक रूप से इसे (Cerbera Odollam Poison) कहा जाता है, जो एपोसिनेसी परिवार का सदस्य है। बाहर से यह बिल्कुल किसी आम के पेड़ जैसा नजर आता है और इसके फल भी ‘सी मैंगो’ (समुद्री आम) जैसे प्रतीत होते हैं। यही वजह है कि अनजान लोग अक्सर धोखे का शिकार हो जाते हैं।
दिल की धड़कनों को रोक देता है ‘सेरबेरिन’ जहर
इस पेड़ का असली खतरा इसके बीजों के भीतर छुपा है, जिसमें ‘सेरबेरिन’ (Cerberin Cardiac Glycoside) नामक एक अत्यंत शक्तिशाली विषैला यौगिक पाया जाता है। यह रासायनिक तत्व कार्डियक ग्लाइकोसाइड समूह से ताल्लुक रखता है।
शरीर के भीतर जाते ही यह जहर कोशिकाओं के स्तर पर सोडियम और पोटैशियम के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ देता है। इसका सीधा असर हमारे दिल की विद्युत प्रणालियों पर पड़ता है। दिल की धड़कनें अचानक पूरी तरह अनियमित हो जाती हैं और गंभीर मामलों में पीड़ित व्यक्ति को कुछ ही घंटों में कार्डियक अरेस्ट आ सकता है, जो जानलेवा साबित होता है।
मौत की असली वजह तलाशना क्यों है डॉक्टरों के लिए पहेली?
ओथालंगा (Sea Mango Fruit Danger) के जहर से होने वाली मौतों के मामलों में रहस्य की एक मोटी परत होती है। फोरेंसिक विशेषज्ञों के लिए यह पता लगाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है कि मौत प्राकृतिक है या इस पौधे के जहर से हुई है। इसके लक्षण कई अन्य गंभीर शारीरिक बीमारियों से मेल खाते हैं।
इसके अलावा, शरीर में सेरबेरिन की सटीक मौजूदगी का पता लगाने के लिए सामान्य रूप से किए जाने वाले ‘डिगॉक्सिन टेस्ट’ पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहा जा सकता। डिगॉक्सिन एक अलग किस्म का ग्लाइकोसाइड है, इसलिए ओथालंगा के जहर की पुष्टि के लिए विस्तृत टॉक्सिकोलॉजिकल जांच, मेडिकल हिस्ट्री और घटनास्थल के साक्ष्यों को जोड़कर देखना पड़ता है।
सावधानी ही बचाव: बच्चों को रखें दूर
प्रकृति की यह खौफनाक सच्चाई हमें यह सिखाती है कि हर सुंदर चीज सुरक्षित नहीं होती। केरल के तटीय इलाकों में घूमने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को हमेशा यह सलाह दी जाती है कि वे इस पेड़ के फलों और बीजों को न तो छूएं और न ही इनके करीब जाएं। खासकर छोटे बच्चों को ऐसे अनजान और जहरीले पौधों से बचाकर रखना बहुत जरूरी है। (Kerala Coastal Plants Poisonous) यदि कभी किसी व्यक्ति द्वारा गलती से इसका सेवन कर लिए जाने का संदेह हो, तो बिना एक पल गंवाए तुरंत अस्पताल दौड़ना चाहिए, क्योंकि समय पर मिला इलाज ही जिंदगी बचा सकता है।
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