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Janmashtami Puja Samagri: जन्माष्टमी पर न छूटे कोई सामान, यहां देखें कान्हा के श्रृंगार और पंचामृत अभिषेक की संपूर्ण सामग्री

AAmandeep Singh
Janmashtami Puja Samagri: जन्माष्टमी पर न छूटे कोई सामान, यहां देखें कान्हा के श्रृंगार और पंचामृत अभिषेक की संपूर्ण सामग्री

जन्माष्टमी पर न छूटे कोई सामान, यहां देखें कान्हा के श्रृंगार और पंचामृत अभिषेक की संपूर्ण सामग्री

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Janmashtami Puja Samagri: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व नजदीक आते ही घरों और मंदिरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व शुक्रवार, 4 सितंबर को मनाया जाएगा। जन्माष्टमी की मुख्य पूजा मध्यरात्रि को ठीक 12 बजे होती है, जब बाल गोपाल का प्राकट्य कराया जाता है।

अक्सर देखा जाता है कि मध्यरात्रि की पूजा के समय जल्दबाजी में रोली, तुलसी दल या पंचामृत के लिए शहद जैसी कोई न कोई जरूरी चीज छूट जाती है। इस हड़बड़ी से बचने के लिए पूजा की संपूर्ण सामग्री सूची एक से दो दिन पहले ही तैयार कर लेना बुद्धिमानी मानी जाती है।

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जन्माष्टमी पूजा सामग्री की संपूर्ण तालिका

पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक वस्तुओं को अलग-अलग थालियों में सजाकर रख लें। इससे मध्यरात्रि में जन्मोत्सव के दौरान पूजा सुचारू रूप से संपन्न होगी।

लड्डू गोपाल के पंचामृत अभिषेक का विधान

जन्माष्टमी की निशीथ काल पूजा में कान्हा को पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके लिए एक बड़े पात्र में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर पंचामृत तैयार करें।

ध्यान रहे कि यदि आपके पास पीतल, अष्टधातु या तांबे के लड्डू गोपाल हैं, तभी विधिवत पंचामृत स्नान कराएं। मिट्टी, लकड़ी या रंगीन प्रतिमाओं पर सीधे तरल पदार्थ न डालें; उन्हें गीले मुलायम कपड़े से पोंछकर प्रतीकात्मक जल अर्पण करें। पंचामृत स्नान के बाद शुद्ध गंगाजल से स्नान कराकर प्रतिमा को साफ और मुलायम सूती वस्त्र से हल्के हाथों से पोंछें।

कान्हा का मनभावन श्रृंगार और झूला

अभिषेक के पश्चात बाल गोपाल को सुंदर वस्त्र पहनाए जाते हैं। कान्हा के श्रृंगार में पीली, लाल या हरी रेशमी पोशाक के साथ सिर पर मुकुट, उस पर खोसा गया मोरपंख, हाथ में नन्हीं बांसुरी और गले में माला अर्पित की जाती है। इसके बाद उन्हें फूलों और रोशनियों से सजे छोटे से पालने (झूले) में बैठाया जाता है।

माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी का महाभोग

भगवान श्रीकृष्ण को माखन और मिश्री अति प्रिय हैं। इसलिए जन्माष्टमी के भोग में माखन-मिश्री का होना अनिवार्य है। इसके अलावा व्रत के फलाहार के रूप में भुने धनिये की पंजीरी, मखाने की खीर, पंचमेवा और मौसम के फल अर्पित किए जाते हैं।

विशेष नियम: भगवान को लगाए जाने वाले हर भोग में तुलसी का पत्ता (तुलसी दल) रखना न भूलें। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बिना तुलसी दल के कान्हा भोग स्वीकार नहीं करते।

साधनों की कमी हो तो भाव से करें पूजन

शास्त्रों में विधान है कि यदि किसी कारणवश पूरी सामग्री जुटाना संभव न हो, तो भी परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ईश्वर भाव के भूखे होते हैं। केवल एक स्वच्छ चौकी, श्रीकृष्ण की तस्वीर, एक घी का दीपक, थोड़ा सा जल, रोली-अक्षत, तुलसी पत्ता और माखन-मिश्री या किसी एक फल के भोग से भी पूरी निष्ठा के साथ जन्माष्टमी का पूजन संपन्न किया जा सकता है।

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