Kurukshetra Congress Protest: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। मतदाता सूची में गड़बड़ियों और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कुरुक्षेत्र में जोरदार प्रदर्शन किया। अपने विरोध को दर्ज कराने के लिए कार्यकर्ताओं ने हाथों पर काली पट्टियां बांध रखी थीं। अग्रवाल धर्मशाला से शुरू हुआ यह रोष मार्च रेलवे रोड से गुजरते हुए गांधी पार्क पहुंचा, जहां कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला दहन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
दिग्गजों की मौजूदगी, सांसद दीपेंद्र हुड्डा को दिल्ली लौटना पड़ा
इस विरोध प्रदर्शन में हरियाणा कांग्रेस के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए। इनमें पिहोवा से विधायक मनदीप चट्ठा, शाहाबाद से विधायक रामकरण काला, रोहतक से विधायक भारत भूषण बत्रा और कांग्रेस जिलाध्यक्ष मेवा सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे। हालांकि, इस कार्यक्रम में सांसद दीपेंद्र हुड्डा को भी पहुंचना था, लेकिन पार्टी हाईकामान से अचानक बुलावा आने के बाद उन्हें बीच से ही दिल्ली के लिए रवाना होना पड़ा। इसके बावजूद स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
‘चुनाव आयोग ने किया है अपराध, CEC पर दर्ज हो मुकदमा’— मनदीप चट्ठा
प्रदर्शन के दौरान पिहोवा विधायक मनदीप चट्ठा ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वोटर लिस्ट में जानबूझकर अड़चनें पैदा की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सीधे तौर पर चुनाव आयोग द्वारा किया गया गंभीर अपराध है। कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट मांग है कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को तुरंत बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की जाए।
भारत भूषण बत्रा बोले— ‘मोदी-शाह के इशारे पर हो रही लोकतंत्र की हत्या’
मीडिया से मुखातिब होते हुए रोहतक के विधायक भारत भूषण बत्रा ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली का पर्दाफाश कर दिया है। बत्रा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर देश के लोकतंत्र और आम जनता के अधिकारों के खिलाफ फैसले लिए जा रहे हैं। इसी नाइंसाफी के विरोध में कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक कड़ा संघर्ष कर रही है।
‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए बनाया गया कानून’
विधायक बीबी बत्रा ने चुनाव आयोग के गठन का जिक्र करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा था कि चयन समिति में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और नेता प्रतिपक्ष के साथ चीफ जस्टिस भी शामिल होने चाहिए। लेकिन उस फैसले को निष्प्रभावी करने के लिए सरकार ने नया कानून पास कर दिया। उन्होंने कहा कि देश के संविधान के मुताबिक केवल राष्ट्रपति को कानूनी कार्रवाई से छूट प्राप्त है, प्रधानमंत्री समेत कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, लेकिन भाजपा सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त को बचाने का प्रयास कर रही है।
‘पिता का वोट नहीं, तो बेटे का अधिकार कैसे छीना जा सकता है?’
मतदाता सूची से नाम काटे जाने के विवाद पर सवाल उठाते हुए बत्रा ने कहा कि यदि किसी के माता-पिता का वोट नहीं है, तो क्या उसके अपने वोट का संवैधानिक अधिकार भी खत्म हो जाएगा? वोट देना हर नागरिक का मौलिक और व्यक्तिगत अधिकार है जिसे डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान के जरिए देशवासियों को दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले पूरा आयोग नहीं होते, बल्कि पूरी संस्था उनकी मालिक है। ऐसे में चुनाव आयोग को सत्ता के पक्ष में काम करने के बजाय संविधान की रक्षा करनी चाहिए।
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