September 23, 2026

Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में 41वें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 उन्मुखीकरण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

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Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में 41वें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 उन्मुखीकरण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय में 41वें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 उन्मुखीकरण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

Mahendragarh : हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय (हकेवि), महेंद्रगढ़ में मंगलवार को 41वें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 उन्मुखीकरण एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (यूजीसी-एमएमटीटीसी) द्वारा पीसीईटी के पिंपरी चिंचवड़ विश्वविद्यालय, पुणे के शैक्षणिक सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से प्रारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र में देशभर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से शिक्षकगण एवं शिक्षाविद् उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

 

 

इस अवसर पर हकेवि के कुलपति प्रो. टंकेशवर कुमार ने अपने संदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की परिवर्तनकारी दृष्टि पर प्रकाश डाला। उन्होंने समग्र, बहुविषयक एवं मूल्यपरक शिक्षा के साथ नवाचार, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षण तथा अनुसंधान के महत्व को रेखांकित किया।

 

 

 

उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभाएं और विद्यार्थियों को 21वीं सदी की उभरती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में योगदान दें। कुलपति ने हकेवि के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र द्वारा शिक्षकों के अकादमिक एवं व्यावसायिक विकास के लिए आयोजित किए जा रहे ऐसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की सराहना की।

 

 

 

पिंपरी चिंचवड़ विश्वविद्यालय (पीसीयू), पुणे के कुलपति डॉ. संतोष एस. सोनावणे ने अपने संदेश में विद्यार्थियों को सीखने की प्रक्रिया के केंद्र में रखते हुए परिणाम-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर सहयोग, क्षमता निर्माण तथा श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया।

 

 

 

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की विविधता एवं ’’समावेशी शिक्षा’’ को सदैव केंद्र में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन के लिए हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं हकेवि के यूजीसी-एमएमटीटीसी को बधाई दी तथा सभी प्रतिभागियों को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

 

 

उन्होंने आशा व्यक्त की कि आठ दिवसीय यह कार्यक्रम नए विचारों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ एक प्रगतिशील, समावेशी, नवाचारी एवं वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक उच्च शिक्षा व्यवस्था के निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को और सुदृढ़ करेगा।

 

 

कार्यक्रम की शुरुआत हकेवि के यूजीसी-एमएमटीटीसी के निदेशक एवं शिक्षक शिक्षा विभाग के अध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने विशिष्ट अतिथियों, विषय विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की संरचना, उद्देश्यों एवं कार्यक्रम-सारणी की जानकारी दी।

 

 

 

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को चरणबद्ध एवं प्रभावी तरीके से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पाठ्यचर्या सुधार, क्रेडिट व्यवस्था, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन, बहुविषयक शिक्षा तथा समावेशी शैक्षिक प्रक्रियाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

 

 

कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में पीसीईटी के पिंपरी चिंचवड़ विश्वविद्यालय, पुणे की निदेशक, आईक्यूएसी, प्रो. अनंता गीतै उप्पल ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर अपने विचार रखे।

 

 

उन्होंने नीति एवं उसके व्यावहारिक क्रियान्वयन के बीच की दूरी को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें ज्ञान सृजनकर्ता, संस्थान निर्माता एवं राष्ट्र निर्माता के रूप में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

 

 

उन्होंने प्रतिभागियों को केवल नोट्स एवं प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तक सीमित न रहने की सलाह देते हुए पाठ्यचर्या, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन, अनुसंधान, प्रौद्योगिकी अथवा विद्यार्थी समावेशन जैसे क्षेत्रों में कम से कम एक सार्थक बदलाव को अपने संस्थान में लागू करने के लिए प्रेरित किया।

 

 

 

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की सफलता केवल उसकी शब्दावली को अपनाने में नहीं, बल्कि शैक्षणिक प्रक्रियाओं एवं विद्यार्थियों के सीखने के अनुभवों में वास्तविक और सार्थक बदलाव लाने में निहित है।

 

 

 

उद्घाटन सत्र के अंत में सांख्यिकी विभाग के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. जोगिंदर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में प्रो. तनु गुप्ता, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. अभिजीत बानुबाकोडे एवं देश के 06 राज्यों के 16 विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं संस्थानों से कुल 110 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है।

 

 

 

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