Nangal Chaudhary : धोखेरा में बिना अनुमति अवैध खनन शुरू होने से ग्रामीणों में भारी रोष, एसडीएम और डीसी को भेजी गई शिकायत
पहाड़ पर खनन की गतिविधियां शुरू होने पर पंचायत करते ग्रामीण।
Nangal Chaudhary :(विजय यादव) दोखेरा में बिना विभागीय अनुमति खनन गतिविधियां शुरू हो गई। जिससे चिंतत ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों को अवगत करवा दिया, बावजूद स्थिति यथावत बनी हुई है। आक्रोशित ग्रामीणों ने सुबह पंचायत का आयोजन करके एसडीएम और जिला उपायुक्त को शिकायत भेजी है।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों पर मिलीभगति होने तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप लगाए हैं।
हनुमान नंबरदार, लालचंद, प्रकाश, पप्पू कुमार, रामसिंह, सुनिल कुमार, शीशराम, जयराम ने बताया कि पहाड़ की तलहटी पर बसे गांव में पेयजल संकट बना हुआ है। समाधान के लिए जिला प्रशासन से पहाड़ के नीचे बांध निर्माण करने की गुहार लगाई थी, ताकि बारिश का पानी स्टॉक होने से भूजल रिचार्ज हो सके।
लेकिन ग्रामीणों की आवश्यक मांग बीते कई सालों से रद्दी टोकरी में पड़ी हुई है। इसी दौरान पहाड़ पर खनन माफिया सक्रिय हो गया। 5-7 ससाल पहले एक माईंस कंपनी ने प्रशासनिक मिलीभगति करके कई साल तक अवैध कारोबार किया है।
पंचायत के लगभग चार एकड़ रकबे पर सैकड़ों फिट गहराई तक पत्थर निकाल लिया गया। जिससे प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत करवाकर माईंस होल्डर के खिलाफ कार्रवाई तथा पंचायत के नुकसान की भरपाई कराने की मांग की गई थी।
सालभर संघर्ष के उपरांत अवैध खनन को बंद कराने में सफलता मिली थी। लेकिन अब बीते 20-25 दिनों से दुबारा खनन माफिया पहाड़ की तलहटी पर संसाधनों के साथ पहुंच गए। उन्होंने जमीन से पत्थर निकालने के लिए मिट्टी का उठान आरंभ कर दिया। खनन में रुकावट बनने वाले छोटे पौधों को धड़ल्ले से नष्ट कर दिया।
जिसकी सूचना पर ग्रामीणों ने माईंस संचालक से संपर्क किया तथा उसे अवैध कारोबार को तत्काल प्रभाव से बंद करने को कहा। लेकिन उन्होंने ग्रामीणों को चुप कराते हुए पुलिस कार्रवाई का अल्टीमेटम दिया है। जिससे आक्रोशित ग्रामीणों ने सुबह मुनादी करवाई तथा पंचायत आयोजित की। खनन के दुष्परिणामों पर विचार-विमर्श करके जिला उपायुक्त को शिकायत भेजी गई है।
जानलेवा हादसे और गंभीर बीमारियों का बढ़ा खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ पर खनन होने से भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ेगी और पत्थर गिरने अथवा मशीनों से दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है। वहीं ड्रिलिंग, खुदाई और वाहनों से उड़ने वाली धूल आसपास के आबादी क्षेत्र तक पहुंचेगी। लगातार धूल के संपर्क में रहने से आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी तथा सांस संबंधी समस्याएं बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।
ब्लास्टिंग की अनुमति नहीं मिली, खनन करने की अनुमति नहीं
खनन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि माईंस को प्रदुषण कंट्रोल बोर्ड व अन्य विभागों से एनओसी मिल गई। लेकिन अभी तक ब्लास्टिंग की एनओसी पेंडिंग है जिसके बिना पहाड़ पर खनन नहीं हो सकता। उन्होंने बताया कि प्राप्त एनओसी पर संचालक मशीनरी व अन्य संसाधनों का प्रबंध कर सकता है।
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