Narnaul: प्रसिद्ध आर्य समाज विद्वान प्राचार्य मदन गोपाल ने कहा कि मृत्यु के पश्चात समाज में व्यक्ति के उन गुणों को याद किया जाता है, जो उसने नीजि हित की अपेक्षा दूसरों के लिए किये हों। डॉ यादव ने शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ समाज सेवा और महर्षि दयानंद की विचारधारा को आगे बढ़ाने में महत्ती भूमिका निभाई, इसीलिए उनको आदर और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। वे शुक्रवार को विश्व प्रसिद्ध जीव वैज्ञानिक डा. जे.एस. यादव की पुण्य तिथि के अवसर पर उनके पैतृक गांव नीरपुर में आयोजित हवन एवं श्रद्धांजलि समारोह में लोगों को सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जीव विज्ञान के क्षेत्र में डॉ जेएस यादव के अनूठे शोध कार्यों व सैंकड़ों शोध-पत्रों को जहां अंतरराष्ट्रीय फलक पर सम्मान प्राप्त है, वहीं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके योगदान को आज भी पर्यावरण से जुड़े अनेक संगठन आगे बढ़ा रहे है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की विज्ञान संकाय के अलावा विभिन्न प्रकल्पों में उनके योगदान को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। पर्यावरण पर केंद्रित उनके संपादन में प्रकाशित होने वाली विश्वविद्यालय की शोध पत्रिका जीवंती के दुर्लभ अंकों को आज भी शोध के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों तथा अन्य क्षेत्रों में उनके हजारों में में अनुयायी आज भी उनके आदर्शों को धरातल पर उतार रहे हैं।
पूर्व सेशन जज राकेश यादव ने कहा कि डा. यादव ने अपने जीवन में शिक्षा प्राप्ति के बाद कुरूक्षेत्र को अपनी कर्मस्थली बनाया। उनके जीवन के प्रत्येक पृष्ठ से कुछ ना कुछ सीखने को मिलता है। डॉ यादव ने सामाजिक एकता को कायम रखते हुए कुरुक्षेत्र में योगेश्वर श्रीकृष्ण भवन का निर्माण करवाकर जातीय बंधनों पर कुठाराघात किया। उन्होंने कुरुक्षेत्र में 1857 ई. के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के महानायक राव तुलाराम की प्रतिमा स्थापित कर एक ऐतिहासिक कार्य किया। जजपा जिलाध्यक्ष राजकुमार खातौद ने कहा कि आज युवा वर्ग एवं सभी समाजसेवियों को डा. यादव का अपना प्रेरणा-स्त्रोत मानते हुए उनकी विचारधारा को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
राव ओमप्रकाश इंजीनियर ने कहा कि स्व. डा. जेएस यादव ने जीवन भर शिक्षा का प्रचार और प्रसार किया तथा बच्चों के साथ युवाओं का भी मार्गदर्शन किया। नीरपुर जैसे छोटे से गांव से निकलकर विश्व भर में विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले डा. जेएस यादव के जीवन से बच्चों को प्रेरणा लेनी चाहिए। इस अवसर पर प्रवीण राव एडवोकेट ने कहा कि डा.यादव ने विज्ञान और शिक्षा के अलावा समाजसेवा के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान कायम की। डा.यादव कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में पढऩे वाले दक्षिणी हरियाणा के सभी विद्यार्थियों के सरंक्षक थे। उनके आवास से लेकर फीस व खाने तक की समस्याओं का वो हमेशा ध्यान रखते थे और उनका समाधान करते थे। हवन के पश्चात डॉ जेएस यादव की स्मृति में उनके परिजनों द्वारा गांव के खेल स्टेडियम में एक विश्राम स्थल का भी लोकार्पण किया गया।
इस अवसर पर मेजर जनरल अरविंद यादव, डा. अतुल यादव, असीम राव, श्रीमती कमला देवी, साहित्यकार रघुविन्दर यादव, प्रवक्ता योगेश यादव, डॉ पवन यादव, कप्तान हरिसिंह, सुबेदार दयानंद, करतार मास्टर, गुलशन यादव, अनिल प्रधान, लालचंद यादव, राव समुंदर सिंह, अभय सिंह बौहरा, विष्णु सरपंच, विकास बडकोदा, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ राजवती, दलीप सिंह चेयरमैन, रामकुआर, कप्तान बीरेंद्र सिंह, अशोक आर्किटेक्ट , पार्षद प्रतिनिधि सुमेर कांडा, महेंद्र सिंह, सज्जन पहलवान, बलराज कांवी, अनिल यादव, अनुज यादव आदि भी उपस्थित थे।
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