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NEET UG Exam Change: अब पेन-पेपर से नहीं, कंप्यूटर पर होगी नीट परीक्षा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंजूरी

NEET UG Exam Change: अब पेन-पेपर से नहीं, कंप्यूटर पर होगी नीट परीक्षा, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंजूरी

मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी के स्वरूप में बदलाव की तैयारी शुरू

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AAmandeep Singh

NEET UG Exam Change: देश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का एकमात्र जरिया ‘नीट-यूजी’ अब अपने पुराने ढर्रे को छोड़कर पूरी तरह डिजिटल होने की राह पर है। प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवालों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक ऐसे फुल-प्रूफ सिस्टम पर काम कर रही है, जिसमें परिंदा भी पर न मार सके।

इसी रणनीति के तहत नीट-यूजी को पारंपरिक ऑफलाइन मोड से शिफ्ट करके कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) के ढांचे में ढालने की कवायद तेज हो गई है। चूंकि यह परीक्षा मूल रूप से स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी है, इसलिए एनटीए और शिक्षा मंत्रालय की लंबी मैराथन बैठकों के बाद आखिरकार स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस ऐतिहासिक बदलाव को अपनी प्रशासनिक मंजूरी दे दी है।

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विवादों के बाद शिक्षा मंत्री ने दिए थे संकेत, राधाकृष्णन कमेटी की मुहर

याद दिला दें कि पिछले दिनों जब नीट परीक्षा को लेकर देशव्यापी विवाद खड़ा हुआ था, तभी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कर दिया था कि परीक्षा की शुचिता से कोई समझौता नहीं होगा और इसके मूल स्वरूप में बड़े रिफॉर्म्स किए जाएंगे।

इसके बाद इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर सिफारिश की थी कि मानवीय दखल और पेपर लीक के खतरों को शून्य करने के लिए नीट को कंप्यूटर मोड पर ले जाना ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है।

24 लाख छात्रों का ऑनलाइन टेस्ट: एनटीए के सामने खड़ी है इन्फ्रास्ट्रक्चर की दीवार

कागज पर यह योजना जितनी मुकम्मल नजर आती है, धरातल पर इसे उतारना उतना ही चुनौतीपूर्ण है। हर साल करीब 22 से 24 लाख अभ्यर्थी इस परीक्षा में बैठते हैं। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के लिए एक साथ देश भर में कंप्यूटर सेंटर्स और सर्वर की व्यवस्था करना एनटीए के लिए एवरेस्ट चढ़ने जैसा होगा।

यही वजह है कि अंदरखाने अभी इस बात पर माथापच्ची चल रही है कि क्या परीक्षा को पहले की तरह एक ही दिन में समेटा जाए, या फिर इंजीनियरिंग की ‘जेईई मेन’ और ‘सीयूईटी’ की तर्ज पर इसे कई दिनों और अलग-अलग शिफ्टों में विभाजित कर दिया जाए। अगर परीक्षा कई शिफ्टों में होती है, तो नतीजों के लिए ‘नॉर्मलाइजेशन’ का पेचीदा फॉर्मूला अपनाना पड़ेगा, जो खुद में एक नया सिरदर्द साबित हो सकता है।

राज्यों और आम जनता से भी मांगी जाएगी राय

इस बड़े बदलाव को लागू करने से पहले सरकार फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि बाद में कोई कानूनी या सामाजिक अड़चन न आए। सूत्रों के मुताबिक, एनटीए जल्द ही शिक्षा और स्वास्थ्य मंत्रालयों के साथ मिलकर सभी राज्य सरकारों से इस मुद्दे पर व्यापक संवाद स्थापित करेगी।

इसके अलावा, दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों के छात्रों को कंप्यूटर फ्रेंडली बनाने और उनके सुझावों को समझने के लिए शिक्षाविदों और आम जनता से भी रायशुमारी की जाएगी, ताकि समय रहते छात्रों को इस नए पैटर्न के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा सके।

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