Bhiwani News: भिवानी के दिनोद आश्रम में उमड़ी भारी संगत, हुज़ूर कंवर महाराज ने बताया कैसे मिलेगी मन को शांति
कंवर साहेब का बड़ा उपदेश: भक्ति कम हो तो चलेगा, लेकिन जीवन में कभी अपनी संगति मत बिगड़ने देना
Bhiwani News: भिवानी के प्रसिद्ध दिनोद आश्रम में रविवार को आध्यात्मिक चेतना का अनूठा नजारा देखने को मिला, जहां देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए हुज़ूर कंवर महाराज ने मानव जीवन के कल्याण का मार्ग दिखाया।
महाराज ने अपने प्रवचनों में साफ किया कि भागदौड़ और मानसिक तनाव से भरी इस जिंदगी में अगर सब्र, संतोष और विवेक जागृत करना है, तो सत्संग की शरण में आना ही होगा। उन्होंने कहा कि अरबों-खरबों जीवों में से विरले ही ऐसे भाग्यशाली होते हैं, जिन्हें परमात्मा के दर पर हाजिरी लगाने का सौभाग्य मिलता है। इसलिए मनुष्य को जीवन का हर एक पल प्रभु सुमिरन में लगाना चाहिए।
भक्ति कम हो पर संगति न बिगड़े; गृहस्थ में रहकर उपरामता पाना ही सच्ची साधना
सत्संग के दौरान कंवर साहेब ने एक बेहद व्यावहारिक बात कही कि यदि किसी कारणवश आपकी भक्ति थोड़ी कम भी हो जाए, तो घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन अपनी संगति को कभी गंदा मत होने दीजिए। अच्छी संगति ही वह ताकत है जो इंसान को परमात्मा के मार्ग पर डिगने नहीं देती।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभु को पाने के लिए गृहस्थ जीवन और परिवार छोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है। सच्ची साधना यह है कि संसार में रहते हुए अपने सभी पारिवारिक और सामाजिक कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी से निभाया जाए और भीतर से ईश्वर के प्रति उपरामता (वैराग्य) का भाव रखा जाए।
दूसरों का बुरा करने वाले सांप से भी ज्यादा खतरनाक; सिकंदर-रावण के उदाहरण से चेताया
हुज़ूर महाराज ने समाज में फैल रही ईर्ष्या, निंदा और चुगली की आदतों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने संगत को सचेत करते हुए कहा कि दूसरों के खिलाफ साजिश रचने और घात लगाने वाला व्यक्ति सांप से भी ज्यादा खतरनाक होता है। इंसान को दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए, जैसा वह खुद के लिए पसंद करता है।
लोगों की संग्रह करने की अंधी दौड़ पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा, “हम दूसरों को उपदेश देने के लिए रावण और सिकंदर का उदाहरण तो देते हैं कि वे खाली हाथ गए, लेकिन खुद दिन-रात नाजायज धन बटोरने में लगे रहते हैं।” उन्होंने परधन और परस्त्री पर बुरी नजर न रखने की सख्त हिदायत दी।
बच्चों को दें उत्तम संस्कार, बुजुर्गों की सेवा को बनाएं जीवन का अनिवार्य नियम
सत्संग के समापन पर हुज़ूर कंवर महाराज ने पंडाल में मौजूद सभी श्रद्धालुओं को जीवन में नेकी के रास्ते पर चलने का संकल्प दिलाया। उन्होंने आह्वान किया कि किसी भी जीव को अपने वचनों या कर्मों से कष्ट न पहुंचाएं और जितना संभव हो, जरूरतमंदों की मदद करें।
महाराज ने विशेष रूप से जोर देकर कहा कि अपने बच्चों को केवल किताबी ज्ञान न दें, बल्कि उन्हें उत्तम संस्कार और नैतिक शिक्षा भी दें। इसके साथ ही, घर के बुजुर्गों और माता-पिता की सेवा को अपने जीवन का सबसे पहला और अनिवार्य कर्तव्य समझें, क्योंकि यही सेवा भाव मनुष्य को परमात्मा के सबसे करीब ले जाता है।
