Shambhu Border: शंभू बॉर्डर पर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने की किसानों से बातचीत, रिहा होंगे गुरनाम चढ़ूनी, शिवराज चौहान से होगी वार्ता
शंभू बॉर्डर पर कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा की किसानों से बातचीत
Shambhu Border: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड डील) को लेकर पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर उपजा तनाव अब बातचीत के रास्ते सुलझता नजर आ रहा है। किसानों के ‘दिल्ली कूच’ और किसान घाट पर प्रदर्शन के ऐलान के बीच हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा खुद शंभू बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने सीमा पर डटे किसान नेताओं के साथ बैठक की और उनकी दो सबसे प्रमुख मांगों को तुरंत स्वीकार कर लिया।
बैठक के बाद किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा सरकार ने उनकी दोनों बड़ी मांगें मान ली हैं। पहली मांग के तहत किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी समेत गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए सभी किसान कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाएगा। दूसरी मांग पर सहमति जताते हुए कृषि मंत्री ने आश्वस्त किया है कि किसानों की सीधी बातचीत केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से कराई जाएगी। पंधेर ने कहा कि अब किसान संगठन अपने साथियों की रिहाई और आगे की रणनीति पर चर्चा कर अगला कदम तय करेंगे।
NH-44 पर कड़ी सुरक्षा और बैरिकेडिंग, दिल्ली कूच पर अड़े थे किसान
इससे पहले, किसानों के दिल्ली कूच की चेतावनी को देखते हुए हरियाणा-पंजाब सीमा स्थित अंबाला के शंभू टोल प्लाजा को सुरक्षा बलों ने पूरी तरह से सील कर दिया था। राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर वाहनों की आवाजाही को रोककर बहुस्तरीय (मल्टी-लेयर) बैरिकेडिंग की गई थी, जिससे जीटी रोड पर भारी ट्रैफिक डायवर्जन करना पड़ा। मौके पर हरियाणा पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी नफरी तैनात थी ताकि प्रदर्शनकारी आगे न बढ़ सकें।
पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया था कि किसी भी संगठन को कानून-व्यवस्था हाथ में लेने या जबरन दिल्ली की तरफ बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों का स्पष्ट रुख था कि यदि बैरिकेड्स तोड़े गए तो सख्त कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, कृषि मंत्री के मौके पर पहुंचकर बातचीत की पहल करने से सीमा पर बना सैन्य जैसा तनाव फिलहाल कम होता दिख रहा है।
क्यों भड़के हैं किसान? जानें ट्रेड डील पर आशंकाएं
गौरतलब है कि किसान संगठन भारत और अमेरिका के बीच होने वाले प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इस ट्रेड डील में कृषि, डेयरी और पोल्ट्री (मुर्गी पालन) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को भी शामिल किया जा रहा है।
किसान नेताओं को आशंका है कि अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों पर आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) कम होने से भारतीय बाजारों में सस्ते विदेशी उत्पाद आ जाएंगे। इससे देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा और घरेलू डेयरी उद्योग पूरी तरह तबाह हो जाएगा। इसी डर के कारण किसान संगठन केंद्र सरकार से इस व्यापार समझौते को तुरंत रद्द करने की मांग कर रहे हैं।
