July 21, 2026

Parliament March: संसद मार्च से पहले जंतर-मंतर पर जुटे हजारों प्रदर्शनकारी, अनुमति नहीं मिलने से दिल्ली में बढ़ी सुरक्षा

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Parliament March: संसद मार्च से पहले जंतर-मंतर पर जुटे हजारों प्रदर्शनकारी, अनुमति नहीं मिलने से दिल्ली में बढ़ी सुरक्षा

प्रदर्शनकारी संसद मार्च की तैयारी में जुटे

Parliament March: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शन का केंद्र बन गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हजारों प्रदर्शनकारी संसद मार्च की तैयारी में जुटे हैं। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस मार्च की अनुमति नहीं दी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर पर मौजूद हैं और आंदोलन जारी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के लिए सरकार के सामने तीन शर्तें रखी हैं। उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन का उद्देश्य पूरा नहीं माना जाएगा।

जंतर-मंतर पर जुटी बड़ी भीड़, सुरक्षा व्यवस्था हुई और सख्त

संसद मार्च की घोषणा के बाद सोमवार सुबह से ही जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। दिल्ली पुलिस ने इलाके में कई स्तरों की बैरिकेडिंग की है ताकि प्रदर्शनकारी संसद की ओर आगे न बढ़ सकें। मौके पर बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवान और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। सुबह कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने स्थिति को जल्द नियंत्रित कर लिया और बाद में प्रदर्शन स्थल पर हालात सामान्य बने रहे।

अभिजीत दिपके बोले- आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमारी ओर से कोई भी गलत काम नहीं करेगा। संसद मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा। हमारी जिम्मेदारी है कि इस आंदोलन को किसी भी तरह बदनाम न होने दिया जाए। हम पिछले एक महीने से शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे हैं और आगे भी यही तरीका रहेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन के लिए अपना स्वास्थ्य दांव पर लगाया है और सभी प्रदर्शनकारियों को संयम बनाए रखना चाहिए।

सोनम वांगचुक ने रखीं तीन अहम शर्तें

23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक ने सरकार के सामने तीन स्पष्ट शर्तें रखी हैं। पहली शर्त के तहत उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक जैसे मुद्दों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। दूसरी शर्त में उन्होंने मांग की कि CJP के प्रतिनिधिमंडल को संसद जाने की अनुमति दी जाए और सांसद इस मुद्दे को संसद के भीतर उठाने का भरोसा दें। तीसरी शर्त के अनुसार यदि स्वास्थ्य कारणों से प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात संभव नहीं हो, तो सांसद सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर उन्हें यही आश्वासन दें कि उनकी मांगों को संसद में उठाया जाएगा।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार की ओर से बातचीत शुरू करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रशासन के अधिकारी बातचीत के लिए पहुंचे थे और संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई अंतिम या स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। उनके मुताबिक अब आगे की पहल सरकार को करनी है।

बैरिकेडिंग के कारण संसद मार्च में देरी

CJP ने संसद मार्च सुबह शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन जंतर-मंतर के आसपास की गई भारी बैरिकेडिंग के कारण प्रदर्शनकारी आगे नहीं बढ़ सके। दिल्ली पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

दिल्ली के कई मेट्रो स्टेशन अस्थायी रूप से बंद

संसद मार्च को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा कारणों से कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों का संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित किया है। जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेवा भवन मेट्रो स्टेशन सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बंद किए गए हैं। इससे रोजाना इन मार्गों का उपयोग करने वाले हजारों यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़े।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि संसद मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई और न ही प्रशासन की ओर से इसकी अनुमति दी गई है। पुलिस के अनुसार सार्वजनिक स्थान पर रैली, जुलूस या मार्च निकालने के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होती है ताकि सुरक्षा, ट्रैफिक और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। इसी कारण आवश्यक सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।

बिना अनुमति संसद मार्च निकालने के नियम क्या कहते हैं

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। हालांकि यह अधिकार पूर्ण नहीं है और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन कुछ शर्तें लागू कर सकता है। किसी भी सार्वजनिक रैली, जुलूस या संसद मार्च के लिए प्रशासन से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होता है। यदि अनुमति नहीं मिलती और इसके बावजूद मार्च निकालने का प्रयास किया जाता है, तो पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप कर सकती है।

किन कानूनी धाराओं के तहत हो सकती है कार्रवाई

यदि बिना अनुमति प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इनमें धारा 223 के तहत सरकारी आदेश की अवहेलना, धारा 189 के तहत अवैध जमावड़ा, धारा 190 के तहत समूह की सामूहिक जिम्मेदारी, धारा 191 के तहत हिंसा की स्थिति में दंगा और धारा 221 के तहत सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा डालने से जुड़े प्रावधान लागू हो सकते हैं। यदि प्रदर्शन के दौरान सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो Public Property Damage Prevention (PDPP) Act के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा

संसद मार्ग और लुटियंस दिल्ली के आसपास सुरक्षा बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की आवाजाही पर पड़ सकता है। कई मार्गों पर ट्रैफिक धीमा रहने और डायवर्जन लागू होने की संभावना है। मेट्रो स्टेशनों के अस्थायी बंद होने से कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और अन्य यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में लोगों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक और मेट्रो से जुड़े आधिकारिक अपडेट देखना चाहिए।

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