Hydrogen Train Reality Check: क्या सच में खराब हुई जींद की हाइड्रोजन ट्रेन? जानिए टोचन किए जाने का पूरा सच
खराबी के कारण नहीं, इस वजह से डीजल इंजन से खींचनी पड़ी थी हाइड्रोजन ट्रेन
Hydrogen Train Reality Check: जींद से शुरू हुई देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन को लेकर पिछले 24 घंटों से सोशल मीडिया पर दावों और प्रति-दावों का दौर चल रहा है। विपक्ष और कुछ सोशल मीडिया हैंडल द्वारा यह प्रचारित किया जा रहा था कि 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के ठीक अगले ही दिन यह आधुनिक ट्रेन तकनीकी खराबी के कारण ठप हो गई और इसे टोचन करके ले जाना पड़ा।
इन दावों की जमीनी हकीकत परखने के लिए जब ग्राउंड जीरो पर रियलिटी चेक किया गया, तो पूरी कहानी महज एक अफवाह साबित हुई। रेलवे के सीनियर लोको पायलट और अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ट्रेन के सभी सिस्टम पूरी तरह दुरुस्त हैं और यह अपने तय शेड्यूल पर पटरी पर दौड़ रही है।
लोको पायलट मेहर सिंह का बयान—’खराबी नहीं, रूटीन मेंटेनेंस के लिए शेड गई थी ट्रेन’
जींद मुख्यालय में तैनात सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट मेहर सिंह ने सीधे तौर पर इन अफवाहों को खारिज किया है। उन्होंने बताया कि 18 जुलाई को हाइड्रोजन ट्रेन को नियमित धुलाई और रूटीन चेकिंग के लिए रेलवे शेड में ले जाया गया था।
रेलवे की स्थापित कार्यप्रणाली के अनुसार, जब भी किसी रैक या आधुनिक ट्रेन को यार्ड या शेड के भीतर शिफ्ट किया जाता है, तो उसे डीजल शंटिंग इंजन की सहायता से ही खींचकर ले जाया जाता है। इसी प्रक्रिया की वीडियो और तस्वीरें खींचकर कुछ लोगों ने इसे तकनीकी खराबी का नाम दे दिया, जिसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। ट्रेन हर शुक्रवार को इसी तय प्रक्रिया के तहत मेंटेनेंस शेड में भेजी जाएगी ताकि रविवार को यात्रियों को कोई दिक्कत न हो।
RDSO की कसौटी पर खरी उतरी तकनीक, सुचारू रूप से जारी है सफर
रेलवे के अनुसंधान एवं मानक संगठन (RDSO) की देखरेख में इस ट्रेन के सभी तकनीकी मापदंडों की कड़े स्तर पर टेस्टिंग की गई है। पायलट मेहर सिंह के मुताबिक, 3200 किलोवाट के दो इंजनों से लैस यह ट्रेन वर्तमान में सभी पैरामीटर्स पर बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है।
यह महत्वाकांक्षी स्वदेशी प्रोजेक्ट पूरी तरह सुरक्षित है और जींद-गोहाना-सोनीपत रूट के यात्रियों को सुगम सफर का अनुभव करा रहा है। रेलवे ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी अपुष्ट राजनीतिक प्रोपेगैंडा का शिकार होने के बजाय केवल रेलवे के आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें।
हिसार के जिंदल प्लांट से तैयार विशेष प्रीमियम स्टील से बनी है यह ट्रेन
इस ऐतिहासिक स्वदेशी ट्रेन के निर्माण में हरियाणा की औद्योगिक हिस्सेदारी भी बेहद मजबूत रही है। ट्रेन को बनाने में इस्तेमाल हुए कुल स्टेनलेस स्टील का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड ने सप्लाई किया है।
कंपनी ने अपने हरियाणा स्थित हिसार और ओडिशा के जाजपुर प्लांट से विशेष तौर पर तैयार प्रीमियम ऑस्टेनिटिक स्टेनलेस स्टील रेलवे को उपलब्ध कराया था। इस स्टील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इस पर हवा, पानी, जंग या किसी रसायन का कोई असर नहीं होता। हल्का होने के कारण यह ट्रेन के कुल वजन को कम करता है जिससे ईंधन की भारी बचत होती है और इसे बार-बार पेंट या मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ती।
जींद से सोनीपत के बीच 12 स्टेशनों पर ठहराव, नोट कर लें नया टाइम टेबल
रेलवे मुख्यालय नई दिल्ली द्वारा जारी किए गए नियमित शेड्यूल के अनुसार, यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच कुल 89.1 किलोमीटर की दूरी तय कर रही है।
यह सेवा सप्ताह में छह दिन उपलब्ध रहेगी, जबकि हर शुक्रवार को इसका वीकऑफ (मेंटेनेंस डे) रहेगा। गाड़ी संख्या 74010 सुबह 07:40 बजे जींद से रवाना होकर सुबह 09:40 बजे सोनीपत पहुंचती है। वहीं, वापसी दिशा में गाड़ी संख्या 74009 सुबह 10:40 बजे सोनीपत से खुलकर दोपहर 12:40 बजे जींद वापस लौटती है। अपनी यात्रा के दौरान यह ट्रेन जींद सिटी, गोहाना और मोहाना समेत कुल 12 मध्यवर्ती स्टेशनों पर रुकते हुए सवारियों को सेवा दे रही है।
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