Jind News: 73 की उम्र में दादा बने वकील तो पोते ने पहले प्रयास में नीट में किया जिला टॉप, जींद के इस परिवार की अनोखी कहानी
सिंधवी खेड़ा के दादा-पोते ने रचा इतिहास, 73 साल में एलएलबी पास तो पोते ने पाई नीट में AIR-363
Jind News: हरियाणा के जींद जिले का सिंधवी खेड़ा गांव इन दिनों मिसाल बना हुआ है। वजह है एक ही परिवार की दो पीढ़ियों का वो जज्बा, जिसने न सिर्फ गांव बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित कर दिया है।
परिवार के बुजुर्ग यानी 73 वर्षीय धर्मपाल कटारिया ने इस उम्र में कानून (एलएलबी) की डिग्री 82 प्रतिशत अंकों के साथ हासिल कर यह संदेश दिया है कि सीखने की कोई उम्र सीमा नहीं होती। हरियाणा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश सचिव रह चुके धर्मपाल के इस जुनून ने उनके अपने घर के बच्चों को भी आगे बढ़ने की नई राह दिखाई।
इसी जुनून का असर रहा कि उनके पोते उदय भानु प्रताप ने देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली नीट-यूजी 2026 परीक्षा में पहली ही कोशिश में ऑल इंडिया 363वीं रैंक झटककर जींद जिले में पहला स्थान हासिल कर लिया। जब यह खबर गांव पहुंची, तो परिजनों और ग्रामीणों में जश्न का माहौल बन गया।
10वीं-12वीं में भी अव्वल, जेईई मेन पास करने के बाद चुना मेडिकल
उदय भानु की यह सफलता अचानक नहीं आई है, बल्कि उनकी नींव शुरू से ही मजबूत रही है। उनके पिता रविंद्र कटारिया बताते हैं कि उदय बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं। उन्होंने इंडस पब्लिक स्कूल से 10वीं में 98 प्रतिशत और 12वीं में 95 प्रतिशत अंक हासिल किए थे।
हैरानी की बात यह है कि उदय ने जेईई मेन में भी 99.2 पर्सेंटाइल हासिल किए थे, लेकिन उनका ध्यान भटका नहीं। डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय होने के कारण उन्होंने पूरा फोकस नीट पर रखा और पहली ही बार में बाजी मार ली।
“न्यूरोसर्जन बनकर गरीबों का इलाज करना ही असली लक्ष्य”
अपनी सफलता का श्रेय गुरुओं, माता-पिता, बड़े भाई और दादा को देते हुए उदय भानु ने बताया कि जब वे नौवीं कक्षा में थे, तब उनके बड़े भाई सूरज प्रताप सिंह (जो फिलहाल पीजीआईएमएस रोहतक से एमबीबीएस कर रहे हैं) को जरूरतमंदों की मदद करते देखा था।
वहीं से उनके मन में मेडिकल में जाने का बीज अंकुरित हुआ। उदय का कहना है कि नीट तो महज पहली सीढ़ी है, उनका असली सपना एक कुशल न्यूरोसर्जन बनकर उन गरीब और लाचार मरीजों का इलाज करना है जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
घर में ही रहा पढ़ाई का माहौल, मां लेक्चरर तो दादी सेवानिवृत्त शिक्षिका
उदय की सफलता के पीछे उनके पारिवारिक माहौल का भी बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता रविंद्र कटारिया बिजनेसमैन हैं, तो माता अनीता रानी भंभेवा के सरकारी स्कूल में लेक्चरर हैं। वहीं उनकी दादी सुशीला देवी खुद रिटायर्ड टीचर रही हैं।
शिक्षा और सेवा भाव से भरे इस माहौल ने उदय और उनके भाई को शुरू से ही अनुशासन और लगन का पाठ पढ़ाया। आज जब एक तरफ दादा की कानून की डिग्री और दूसरी तरफ पोते की नीट में शानदार सफलता की चर्चा हो रही है, तो सिंधवी खेड़ा की यह दादा-पोते की जोड़ी पूरे इलाके के लिए एक मिसाल बन चुकी है।
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