July 23, 2026

Red Light Workplace: ट्रैफिक सिग्नल पर बाइक पर बैठे-बैठे खोल लिया लैपटॉप, वायरल वीडियो ने उठाये वर्क कल्चर पर सवाल

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Red Light Workplace: ट्रैफिक सिग्नल पर बाइक पर बैठे-बैठे खोल लिया लैपटॉप, वायरल वीडियो ने उठाये वर्क कल्चर पर सवाल

कॉर्पोरेट प्रेशर का खौफनाक चेहरा! बाइक पर पीछे बैठकर लैपटॉप चलाता दिखा शख्स

Red Light Workplace: आमतौर पर ट्रैफिक सिग्नल पर लाल बत्ती होते ही लोग गाड़ियों के इंजन बंद करते हैं, मोबाइल में झांकते हैं या फिर आराम से बत्ती हरी होने का इंतज़ार करते हैं। लेकिन इंटरनेट पर इन दिनों वायरल हो रहे एक वीडियो ने लोगों को हैरत में डाल दिया है। वायरल क्लिप में देखा जा सकता है कि कैसे एक कर्मचारी ने ट्रैफिक जाम के उन चंद मिनटों को भी खाली नहीं जाने दिया और बाइक की पिछली सीट पर बैठे-बैठे ही अपना लैपटॉप खोलकर काम निपटाने लगा।

सड़क पर गाड़ियों के शोर और धुएं के बीच लैपटॉप पर उंगलियां चलाते इस शख्स की तस्वीर ने आज के कॉरपोरेट वर्क कल्चर और दफ्तरी दबाव की एक स्याह हकीकत को फिर से उजागर कर दिया है।

चलती बाइक, खुला लैपटॉप और स्क्रीन पर टिकी नज़रें

वायरल वीडियो में साफ दिखता है कि गाड़ियां ट्रैफिक में धीमी रफ्तार से रेंग रही हैं। बाइक पर पीछे बैठा युवक शुरुआत में सामान्य दिखता है, लेकिन अगले ही पल वह अपनी पीठ पर टंगे बैग की ज़िप खोलता है, उसमें से लैपटॉप निकालता है और उसे अपनी गोद में रखकर पूरी तल्लीनता से काम में जुट जाता है।

हालांकि, स्क्रीन साफ न दिखने के कारण यह पता नहीं चल सका कि वह क्या कर रहा था— किसी क्लाइंट के ई-मेल का तुरंत जवाब दे रहा था, कोई प्रेजेंटेशन सुधार रहा था या फिर डेडलाइन की तलवार उस पर लटक रही थी। वजह जो भी हो, लेकिन इस दृश्य ने देखने वालों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

‘घर हो या सड़क, पीछा नहीं छोड़ता काम’— यूज़र्स ने जाहिर किया गुस्सा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर यह वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद यूज़र्स की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक बड़े वर्ग का कहना है कि कंपनियों द्वारा कर्मचारियों पर डाला जाने वाला मानसिक दबाव इस कदर बढ़ चुका है कि इंसान के पास सांस लेने तक की फुरसत नहीं बची है।

एक यूज़र ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “पहले दफ्तर का समय खत्म होते ही काम खत्म हो जाता था, लेकिन अब स्मार्टफोन और लैपटॉप ने इंसान को 24 घंटे का बंधुआ मज़दूर बना दिया है।” वहीं, कुछ अन्य यूज़र्स का यह भी मानना था कि हो सकता है युवक किसी अति-आवश्यक काम को रास्ते में ही खत्म कर लेना चाहता हो, ताकि घर पहुंचकर अपने परिवार के साथ सुकून के पल बिता सके।

बहरहाल, कारण चाहे मजबूरी हो या समय की बचत, लेकिन सड़क पर इस तरह काम करना न केवल सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक है, बल्कि यह इस बात का भी सबूत है कि हमारी पेशेवर जिंदगी अब हमारी निजी जिंदगी पर पूरी तरह हावी हो चुकी है।

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