July 24, 2026

Student Protest at Jantar Mantar: हर पीढ़ी जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के प्रति समर्थन में उतरी

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Student Protest at Jantar Mantar: हर पीढ़ी जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के प्रति समर्थन में उतरी

जंतर मंतर पर विरोध-प्रदर्शन

Student Protest at Jantar Mantar: जंतर-मंतर पर प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जारी प्रदर्शन शुक्रवार को सातवें सप्ताह में प्रवेश कर गया। छात्रों से शुरू हुआ यह आंदोलन अब अप्रत्याशित रूप से वरिष्ठ नागरिकों का भी समर्थन हासिल कर रहा है जिनका कहना है कि वे इस आंदोलन में इसलिए शामिल हुए हैं क्योंकि यह मुद्दा देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। प्रदर्शन स्थल पर डेरा डाले सैकड़ों ‘जेन-जेड’ प्रदर्शनकारियों के बीच 50, 60 और यहां तक कि 70 वर्ष से अधिक आयु के लोग भी छात्रों के साथ बैठे, नारे लगाते, बैठकों में हिस्सा लेते और सरकारी परीक्षाओं में सुधार की मांग का समर्थन करते दिखाई दिए। उत्तर प्रदेश के रायबरेली से आए 64 वर्षीय किसान देवनाथ मौर्य ने बताया कि वह लगभग 30 लोगों के समूह के साथ करीब 12 घंटे की यात्रा कर राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे।

मौर्य ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, “हम यहां आज के लिए नहीं आए हैं; हम इस देश के भविष्य के लिए आए हैं। ये युवा बच्चे ही हमारा भविष्य हैं। जब मेरे पोते-पोतियां मुझसे पूछेंगे कि जब युवा शिक्षा में सुधार लाने की कोशिश कर रहे थे, तब मैं क्या कर रहा था, तो मैं उन्हें क्या मुंह दिखाऊंगा?” साठ वर्ष से अधिक आयु के राम अवतार ने कहा कि देशभर में छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं की खबरों ने उन्हें इस आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मैंने ज्यादा पढ़ाई-लिखाई नहीं की है, लेकिन मैं जानता हूं कि शिक्षा जिंदगी की सबसे जरूरी चीजों में से एक है, बल्कि शायद सबसे जरूरी चीज है। लगभग 20 छात्रों की मौत हो चुकी है; कल यह संख्या काफी बढ़ सकती है। इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?”

जंतर-मंतर पर यह प्रदर्शन जून की शुरुआत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) और कई छात्र संगठनों के बैनर तले शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी कथित ‘नीट-यूजी 2026’ प्रश्नपत्र लीक और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। साथ ही वे सरकारी परीक्षाओं के संचालन में व्यापक सुधार की भी मांग कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के 28 जून को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने और 20 जुलाई को पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प के बाद इस आंदोलन ने अधिक लोगों का ध्यान खींचा। मध्य प्रदेश से आए 58 वर्षीय ओम प्रसाद ने कहा कि यह आंदोलन उन्हें देश के कुछ बड़े जन आंदोलनों की याद दिलाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं 1990 में मंडल आयोग आंदोलन में शामिल हुआ था। 2011 में ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन के लिए दिल्ली आया था। यह आंदोलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है।’’ भारतीय किसान यूनियन (खोसा) से जुड़े कई किसान भी बड़ी संख्या में इस प्रदर्शन में शामिल हुए। युवा प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वरिष्ठ लोगों की भागीदारी ने इस आंदोलन को नया स्वरूप दिया है। इक्कीस वर्षीय हार्दिक 20 जुलाई से प्रदर्शन स्थल पर रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के समर्थन से छात्रों का मनोबल बढ़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘कल मैंने 60 और 70 वर्ष की उम्र की कई महिलाओं को एक साथ बैठकर प्रदर्शन में भाग लेते देखा। वह बेहद सुंदर दृश्य था। कोरोना महामारी के बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि समाज के हर वर्ग के लोग एक साझा मुद्दे पर एकजुट हुए हैं।’’ भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीआईआई) से स्नातक 28 वर्षीय मिलिंद छाबड़ा ने कहा कि दशकों के अंतर वाली दो पीढ़ियों का शिक्षा सुधार के मुद्दे पर एक साथ आना दिलचस्प है।

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