Bhiwani Manisha Case: भिवानी की शिक्षिका मनीषा मौत मामला: एक साल बाद भी इंसाफ अधूरा, 14 अगस्त को कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट देगी CBI
भिवानी की शिक्षिका मनीषा मौत मामला: एक साल बाद भी इंसाफ अधूरा, 14 अगस्त को कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट देगी CBI
Bhiwani Manisha Case: भिवानी जिले के गांव ढाणी लक्ष्मण की रहने वाली शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले को लगभग एक पूरा साल बीतने को है, लेकिन पीड़ित परिवार और इलाके के लोगों की आंखें आज भी इंसाफ की आस में पथराई हुई हैं। 13 अगस्त को एक साल पूरा होने पर गांव में सर्वजातीय कमेटी और ग्रामीणों द्वारा मनीषा को श्रद्धांजलि देने के लिए एक सभा का आयोजन किया जा रहा है।
दूसरी ओर, इस पूरे मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) आगामी 14 अगस्त को संबंधित अदालत में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी से उम्मीद लगाए बैठे परिजनों के मन में अब जांच में हो रही देरी को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं और संशय पैदा होने लगे हैं।
सीबीआई टीम से मिले परिजन, 15-20 दिन का मांगा गया था वक्त
मनीषा के पिता संजय ने बताया कि भिवानी एसपी के मध्यस्थता करने पर हाल ही में पीड़ित परिवार और गांव के पांच प्रमुख लोगों की कमेटी ने चंडीगढ़ में सीबीआई की जांच टीम से मुलाकात की थी। करीब डेढ़ घंटे तक चली इस वार्तालाप में सीबीआई अधिकारियों ने बताया था कि केस से जुड़ी कुछ अहम मेडिकल रिपोर्ट अभी पेंडिंग हैं।
इसके अलावा, नर्सिंग कॉलेज के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर की फॉरेंसिक जांच भी चल रही है। जांच अधिकारियों ने परिजनों से 15 से 20 दिन का अतिरिक्त समय मांगते हुए आश्वासन दिया था कि 14 अगस्त को अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर स्थिति काफी हद तक स्पष्ट कर दी जाएगी।
“हर घर में बेटियां हैं, इंसाफ मिलना ही चाहिए” — संजय
बेटी को याद कर भावुक हुए पिता संजय ने कहा कि पूरे इलाके और प्रदेश के हर नागरिक की नजर इस केस पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा, “बेटियां हर किसी के घर में होती हैं, यह केवल हमारी बेटी का सवाल नहीं बल्कि समाज में बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा है। हर अभिभावक चाहता है कि इस केस का दूध का दूध और पानी का पानी हो और यदि इसमें कोई अपराधी शामिल है तो उसकी तुरंत गिरफ्तारी हो।”
संजय ने बताया कि 13 अगस्त को गांव में बेटी को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जिसका फैसला पूरे गांव और संघर्ष समिति ने मिलकर लिया है। हालांकि, उन्हें इस बात का मलाल है कि देश की सबसे बड़ी एजेंसी के पास मामला होने के बावजूद एक साल का वक्त बीतने को आया है और जांच अभी भी कागजों में उलझी है।
11 अगस्त को गायब हुई थी मनीषा, 13 को खेतों में मिली थी लाश
गौरतलब है कि पिछले साल 11 अगस्त को मनीषा अपने प्ले स्कूल में ड्यूटी पर गई थी। वहां से उसने परिजनों को बताया कि वह एक नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन के सिलसिले में जा रही है, लेकिन इसके बाद वह वापस घर नहीं लौटी। दो दिन बाद, 13 अगस्त को मनीषा का शव सिंघानी गांव के खेतों में संदिग्ध हालत में बरामद हुआ था।
परिजनों ने तुरंत हत्या की आशंका जताते हुए मामला दर्ज कराया था। हालांकि, 18 अगस्त को जब स्थानीय पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया, तो पूरे इलाके में जनसैलाब सड़कों पर उतर आया। बढ़ते जनआंदोलन को देखते हुए केंद्र सरकार और प्रशासन को झुकना पड़ा। मनीषा का तीसरी बार दिल्ली के एम्स (AIIMS) में पोस्टमार्टम कराया गया और 26 अगस्त 2025 को मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। सीबीआई टीम अब तक भिवानी और लोहारू क्षेत्र का चार बार दौरा कर चुकी है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष का इंतजार अब भी बरकरार है।
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