Narnaul News: नारनौल ग्रीवांस बैठक में हंगामा, मंत्री विपुल गोयल के लेट आने पर भड़के बीजेपी नेता गोविंद भारद्वाज, किया वॉकआउट
1 घंटे इंतजार के बाद भड़के बीजेपी नेता, बोले- "समय की पाबंदी मंत्रियों के लिए भी जरूरी"
Narnaul News: हरियाणा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर अधिकारियों की अनदेखी से पनप रही कार्यकर्ताओं की प्रताड़ना का दर्द अब सार्वजनिक मंचों पर छलकने लगा है। सोमवार को नारनौल के स्थानीय सभागार में आयोजित जिला स्तरीय जन परिवेदना (ग्रीवांस) समिति की बैठक में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।
हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष और प्रदेश सुशासन समिति के अध्यक्ष गोविंद भारद्वाज ने अपनी ही सरकार के मंत्री के समय पर न पहुंचने पर गहरा रोष जताया और बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकल गए।
एक घंटे तक इंतजार, फिर चढ़ा पारा
सोमवार को नारनौल में स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल की अध्यक्षता में ग्रीवांस कमेटी की बैठक तय थी। प्रशासन की ओर से जारी शेड्यूल पहले शाम 4 बजे का था, जिसे एक दिन पहले बदलकर दोपहर 3 बजे कर दिया गया। जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और समिति के गैर-सरकारी सदस्य समय से पहले सभागार में पहुंच गए थे।
दोपहर करीब 2:45 बजे पहुंचे गोविंद भारद्वाज जब 3:30 बजे तक मंत्री का इंतजार करते रहे, तो उनका धैर्य जवाब दे गया। सूत्रों के मुताबिक, मंत्री रास्ते में एक निजी कार्यक्रम और जलपान में व्यस्त थे, जिसकी जानकारी मिलते ही भारद्वाज बिफर पड़े और विरोध दर्ज कराते हुए बैठक छोड़कर चले गए।
“नियम और अनुशासन सब पर समान रूप से लागू हों”
बैठक के बहिष्कार के बाद पत्रकारों से बातचीत में गोविंद भारद्वाज का दर्द खुलकर बाहर आया। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा— “जब कोई अधिकारी या कर्मचारी किसी मंत्री की समीक्षा बैठक में 10 मिनट की देरी से पहुंचता है, तो उसके खिलाफ निलंबन (सस्पेंशन) जैसी कड़ी कार्रवाई कर दी जाती है। लेकिन जब मंत्री खुद घंटों देरी से आते हैं, तो उनके खिलाफ जवाबदेही कौन तय करेगा?”
भारद्वाज ने हाल ही में घटी उस घटना की ओर इशारा किया जब स्वास्थ्य मंत्री आरती राव की बैठक में जिला पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) प्रमोद कुमार के महज 10 मिनट लेट होने पर उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया गया था।
उन्होंने सवाल उठाया कि समय का सम्मान केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए ही क्यों अनिवार्य होना चाहिए? जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों को भी अनुशासन का पालन करना होगा।
कार्यकर्ता और जनता परेशान
बीजेपी नेता ने साफ शब्दों में कहा कि मंत्रियों के इस तरह लेट-लतीफी वाले रवैये से न केवल प्रशासनिक मशीनरी का समय बर्बाद होता है, बल्कि दूर-दराज से अपनी समस्याएं लेकर आए आम नागरिकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को भी भारी मानसिक और शारीरिक कष्ट सहना पड़ता है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि व्यवस्था में समानता लाते हुए मंत्रियों की भी जवाबदेही तय की जाए।
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