July 29, 2026

Sawan Somwar Vrat: सावन में रुद्राभिषेक और व्रत का महत्व, जानिए नाग पंचमी व प्रदोष व्रत की धार्मिक मान्यताएं

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Sawan Somwar Vrat: सावन में रुद्राभिषेक और व्रत का महत्व, जानिए नाग पंचमी व प्रदोष व्रत की धार्मिक मान्यताएं

10 अगस्त को सोम प्रदोष और 11 को सावन शिवरात्रि!

Sawan Somwar Vrat: सनातन परंपरा में सावन (श्रावण) का महीना देवों के देव महादेव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। पूरे माह श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत न केवल मन को संयमित और अनुशासित करता है, बल्कि व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल का भी संचार करता है। यही कारण है कि अनेक श्रद्धालु इसी पावन माह से अपने प्रसिद्ध ’16 सोमवार व्रत’ का संकल्प भी शुरू करते हैं।

प्रदोष व्रत और सावन शिवरात्रि का विशेष संयोग

इस वर्ष सावन के दौरान दो अत्यंत शुभ प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। पहला ‘सोम प्रदोष व्रत’ 10 अगस्त को रखा जाएगा, जबकि दूसरा ‘भौम प्रदोष व्रत’ 25 अगस्त को पड़ेगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, दान-पुण्य और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से असाध्य कष्टों और कर्म दोषों से मुक्ति मिलती है।

इसके ठीक अगले दिन, यानी 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि का महान पर्व मनाया जाएगा। यह वही पावन तिथि है जब देशभर से कांवड़ यात्रा पूरी कर लौटने वाले श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस रात्रि में ध्यान, शिव वंदन और रुद्राभिषेक करने से साधक को विशेष आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

सुहागिनों के लिए मंगला गौरी व्रत और नाग पंचमी

सावन माह के प्रत्येक मंगलवार को माता पार्वती को समर्पित ‘मंगला गौरी व्रत’ रखने का विधान है। इस वर्ष अगस्त महीने में मंगला गौरी व्रत की तिथियां इस प्रकार हैं:

पहला मंगला गौरी व्रत: 4 अगस्त

दूसरा मंगला गौरी व्रत: 11 अगस्त

तीसरा मंगला गौरी व्रत: 18 अगस्त

चौथा मंगला गौरी व्रत: 25 अगस्त

यह व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य, वैवाहिक जीवन में मधुरता और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है। इसके अलावा, 17 अगस्त को नाग पंचमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। भगवान शिव के आभूषण माने जाने वाले नाग देवता की इस दिन पूजा करने से भय, शारीरिक व्याधियों और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इसे कालसर्प या पितृ दोष की शांति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण दिन माना गया है।

स्वास्थ्य सलाह व ध्यान देने योग्य बात:

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार सावन के इन सभी व्रतों का पालन पूरे संयम और नियम के साथ करना चाहिए। हालांकि, श्रद्धालु व्रत रखने से पूर्व अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति का अवश्य ध्यान रखें और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सीय सलाह जरूर लें।

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