Narnaul News: नारनौल के कड़िया वाले बालाजी धाम में गुरु पूर्णिमा की धूम, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और समय
गुरु ही जीवन को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं
Narnaul News: “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पांय…” कबीरदास जी का यह अमर दोहा सनातन संस्कृति में गुरु की महत्ता को बखूबी बयां करता है। इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, आस्था और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। इस शुभ अवसर पर नारनौल स्थित प्रसिद्ध कड़िया वाले बालाजी धाम में भी भव्य धार्मिक अनुष्ठान, विशेष पूजा-अर्चना और गुरु वंदन के कार्यक्रमों की तैयारियां जोरों पर हैं।
कड़िया वाले बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य नरेंद्र शर्मा ने कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि धाम परिसर में गुरु पूजा का विशेष मुहूर्त सुबह 10:15 बजे से शुरू होकर दोपहर 1:15 बजे तक रहेगा। उन्होंने बताया कि जिन शिष्यों ने गुरु दीक्षा (नाम) ली है अथवा जो नए शिष्य गुरु शरण में आना चाहते हैं, वे तय समय पर मंदिर प्रांगण में पहुंचकर गुरु वंदन का पुण्य लाभ उठा सकते हैं।
“निज स्वभाव में जियो, सुखमय बीतेगा जीवन”
गुरु की महिमा पर प्रकाश डालते हुए आचार्य नरेंद्र शर्मा ने कहा कि गुरु का मूल संदेश यही है कि मनुष्य को न तो किसी के अभाव में जीना चाहिए, न किसी के प्रभाव में और न ही किसी के अनुचित दबाव में। इंसान को हमेशा अपने निज यानी प्रामाणिक स्वभाव में जीना चाहिए, तभी जीवन में सच्चा सुख और शांति संभव है। उन्होंने कहा कि गुरु ही वह प्रकाश पुंज हैं जो शिष्य को अज्ञानता के घोर अंधकार से निकालकर ज्ञान और विवेक के आलोक की ओर ले जाते हैं।
महर्षि वेदव्यास की जयंती और देवगुरु की पूजा का विशेष महत्व
आचार्य जी ने बताया कि आषाढ़ मास की पूर्णिमा को महर्षि वेदव्यास जी की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्हें संपूर्ण जगत का प्रथम गुरु माना गया है। उन्होंने वेदों का वर्गीकरण करने के साथ ही महाभारत और पुराणों जैसे महान ग्रंथों की रचना कर मानव सभ्यता को ज्ञान का अनुपम खजाना सौंपा।
धार्मिक मान्यताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस दिन देवगुरु बृहस्पति की उपासना करने से ज्ञान, बुद्धि, यश और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। जिनकी कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर स्थिति में हो, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी है। इस दिन पीले वस्त्र पहनना, पीली वस्तुओं (जैसे चने की दाल, हल्दी, बेसन) का दान करना और “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जप करना जीवन की तमाम अड़चनों को दूर कर सफलता के नए द्वार खोलता है। कड़िया वाले बालाजी धाम में गुरु पूर्णिमा पर दूर-दराज से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
यह भी पढ़ें– पैरा शॉटपुट में शर्मिला धनखड़ का स्वर्णिम थ्रो, भारत को दिलाया दूसरा गोल्ड मेडल
