July 30, 2026

PU Jyoti Death: पंजाब यूनिवर्सिटी में करंट से महेंद्रगढ़ की पीएचडी छात्रा की मौत, ककराला गांव में छाया मातम

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PU Jyoti Death: पंजाब यूनिवर्सिटी में करंट से महेंद्रगढ़ की पीएचडी छात्रा की मौत, ककराला गांव में छाया मातम

पंजाब यूनिवर्सिटी में करंट से महेंद्रगढ़ की पीएचडी छात्रा की मौत, ककराला गांव में छाया मातम

PU Jyoti Death: महेंद्रगढ़ जिले के गांव ककराला की माटी में पली-बढ़ी 28 वर्षीय शोध छात्रा ज्योति का वैज्ञानिक बनने का सपना पंजाब यूनिवर्सिटी (PU), चंडीगढ़ के हॉस्टल परिसर में हमेशा-हमेशा के लिए दफन हो गया। यूनिवर्सिटी कैंपस में फैले करंट की चपेट में आने से ज्योति की दर्दनाक मौत हो गई। जैसे ही यह खबर ककराला पहुंची, न सिर्फ ज्योति का घर बल्कि पूरा इलाका शोक के गहरे समंदर में डूब गया। जिस बेटी को प्रोफेसर और वैज्ञानिक के रूप में देखने की हसरत परिजन सालों से संजोए हुए थे, बुधवार सुबह उसी बेटी की अर्थी को कंधा देना पड़ा।

ज्योति का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव ककराला में सुबह करीब दस बजे गमगीन माहौल में किया गया। इस दौरान पीयू प्रशासन की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष भी साफ देखने को मिला।

बस चालक पिता का खून-पसीना और बेटी का अटूट संघर्ष

ज्योति के पिता रविंद्र कुमार खेती-बाड़ी के साथ-साथ परिवार का पेट पालने के लिए एक निजी स्कूल में बस चलाने का काम करते हैं। घर के हालात बहुत मजबूत नहीं थे, लेकिन रविंद्र ने अपनी आर्थिक तंगी को कभी बेटी के सपनों के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने दिन-रात मेहनत करके ज्योति को पढ़ाया। ज्योति भी पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी थी और अपने लक्ष्य को लेकर बेहद गंभीर रहती थी।

एसडी स्कूल ककराला से 12वीं करने के बाद उसने एमडीयू रोहतक से बीएससी और फिर हिसार से एमएससी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उसका चयन पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में पीएचडी के लिए हुआ, जहां वह बायोटेक्नोलॉजी विभाग में रिसर्च कर रही थी।

पेड़-पौधों से था गहरा लगाव, दो महीने पहले ही आई थी घर

परिजनों ने भारी मन से बताया कि ज्योति को साइंस और खासकर पेड़-पौधों पर प्रयोग करने का बेहद शौक था। जब भी वह गांव आती, तो अपना ज्यादातर वक्त किताबों और नए रिसर्च प्रोजेक्ट्स में ही बिताती थी। दो महीने पहले जब वह आखिरी बार घर आई थी, तब भी उसके सिर पर शोध पूरा करने और करियर में आगे बढ़ने की धुन सवार थी।

परिजनों ने बताया कि ज्योति की पढ़ाई लगभग पूरी हो चुकी थी, इसलिए वे अब उसके लिए कोई अच्छा रिश्ता देखकर शादी की तैयारियों में भी जुटे हुए थे। लेकिन किसे पता था कि किस्मत को कुछ और ही मंजूर है।

टूट गए पिता के अरमान, गांव में पसरा सन्नाटा

अपनी होनहार बेटी के पार्थिव शरीर को देखकर पिता रविंद्र पूरी तरह टूट चुके हैं। जिस बेटी की सफलता के किस्से वे अपने साथियों को सुनाया करते थे, उसकी अचानक हुई इस तरह मौत ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है। गांव ककराला के लोगों का कहना है कि एक बस चालक पिता ने अपनी खून-पसीने की कमाई से बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाया था। पीयू प्रशासन की एक छोटी सी लापरवाही ने न केवल एक हंसता-खेलता परिवार तबाह कर दिया, बल्कि देश ने एक उभरती हुई होनहार वैज्ञानिक को भी खो दिया।

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