Kurukshetra Temple Dome Collapse: कुरुक्षेत्र में 200 साल पुराने नागेश्वर महादेव मंदिर की 108 फुट ऊंची गुंबद गिरी, सेवादार की मौत Kurukshetra Temple Dome Collapse: कुरुक्षेत्र में 200 साल पुराने नागेश्वर महादेव मंदिर की 108 फुट ऊंची गुंबद गिरी, सेवादार की मौत

 Kurukshetra Temple Dome Collapse: बाबैन। कुरुक्षेत्र के बाबैन क्षेत्र से एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। इलाके के करोड़ों लोगों की आस्था के शीर्ष केंद्र, नागेश्वर महादेव मंदिर की गगनचुंबी गुंबद रविवार तड़के अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गई। लगभग 108 फुट ऊंचे इस विशालकाय ढांचे के गिरने से न केवल मंदिर का मुख्य हिस्सा मलबे के ढेर में तब्दील हो गया, बल्कि इसने पिछले पांच वर्षों से मंदिर की सेवा में जुटे एक निष्ठावान सेवादार की जान भी ले ली। इस हादसे के बाद पूरे कुरुक्षेत्र जिले और धार्मिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है।

चारपाई पर सोते-सोते काल के गाल में समाया सेवादार

प्रत्यक्षदर्शियों और मंदिर के पुजारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से साधु संत परंपरा से जुड़े सेवादार नटराजन गिरी रोज की तरह मंदिर की बाहरी दीवार के साथ सटी अपनी चारपाई पर सो रहे थे। सुबह करीब 4 बजे, जब आसमान में हल्की भोर फूट रही थी, तभी अचानक एक भयानक गड़गड़ाहट के साथ मंदिर की विशालकाय गुंबद नीचे आ गिरी।

धमाका इतना जबरदस्त था कि आसपास के घरों में सो रहे लोग भूकंप के डर से बाहर भाग खड़े हुए। मुख्य पुजारी और अन्य सेवादार जब दौड़कर मौके पर पहुंचे, तो वहां धूल का गुबार और मलबे का पहाड़ था, जिसके नीचे नटराजन गिरी दब चुके थे।

ग्रामीणों ने हाथों से हटाया मलबा, पर नहीं बची जान

चीख-पुकार सुनकर आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण लाठी-डंडे और फावड़े लेकर मंदिर की तरफ दौड़े। बिना किसी प्रशासनिक मदद का इंतजार किए, ग्रामीणों ने खुद ही मलबा हटाने का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कंक्रीट और भारी पत्थरों को हटाकर जब तक नटराजन गिरी को बाहर निकाला गया, तब तक उनके प्राण पखेरू उड़ चुके थे।

इस प्राचीन मंदिर में स्थापित शिवलिंग को ‘स्वयंभू’ (प्राकृतिक रूप से प्रकट) माना जाता है, जिसकी वजह से इसकी महत्ता उप-ज्योतिर्लिंग के रूप में है। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 20 साल पहले स्थानीय स्तर पर चंदा इकट्ठा कर मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार कराया गया था। बताया जा रहा है कि इतनी ऊंची गुंबद का पूरा ढांचा महज चार इंच मोटी दीवार के सहारे टिका हुआ था, जो समय के साथ कमजोर हो गई।

मलबे में दबे आराध्य, जांच में जुटी पुलिस

इस भयावह हादसे में मंदिर के गर्भगृह को सबसे ज्यादा चोट पहुंची है। गुंबद के ऊपरी हिस्से के लोहे और कंक्रीट के गर्डर सीधे गर्भगृह की छत को तोड़ते हुए अंदर जा गिरे, जिससे पवित्र शिवलिंग और सदियों पुरानी मूर्तियां मलबे के नीचे छिप गई हैं। अभी भी मंदिर के भीतर टनों मलबा जमा है, जिसे हटाने के लिए क्रेन बुलाई गई है।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस के साथ मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष प्रतिनिधि कैलाश सैनी भी तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों को ढांढस बंधाया और कहा कि सरकार इस प्राचीन धरोहर के पुनर्निर्माण और नुकसान के आकलन के लिए हर संभव कदम उठाएगी। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है।

By Jagmarg