Yamunanagar News: (संजीव चौहान) शिक्षा और चुनाव सुधार के नाम पर सरकारी तंत्र किस तरह जमीनी कर्मचारियों पर बोझ डालता है, इसकी एक बानगी सोमवार को यमुनानगर में देखने को मिली। हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ (संबंधित सर्व कर्मचारी संघ) के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने जिला सचिवालय के गेट पर इकट्ठा होकर अपनी ही सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) कार्य में झोंके गए शिक्षकों का साफ कहना है कि उन्हें चुनाव संबंधी तकनीकी कामों के बहाने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है, जिससे उनका मूल काम यानी बच्चों को पढ़ाना पूरी तरह ठप हो गया है। प्रदर्शन के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला उपायुक्त (डीसी) से मुलाकात कर उन्हें अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
‘एक हाथ में चॉक, दूसरे में लैपटॉप’; अंतहीन तकनीकी कामों से शिक्षक बेहाल
अध्यापक संघ के जिला प्रधान संजय कम्बोज और जिला सचिव दिनेश तंवर ने इस प्रशासनिक रवैए पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के विशेष पुनरीक्षण अभियान को अमलीजामा पहनाने के लिए जिले के हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों की रात-दिन की ड्यूटी बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और सुपरवाइजर के तौर पर लगा दी गई है।
नेताओं ने कहा, “एक शिक्षक का काम स्कूल में पढ़ाना है, लेकिन इस समय उनसे घर-घर जाकर गणना प्रपत्र बांटने, उन्हें खुद भरने, रिकॉर्ड मेंटेन करने, वोटरों के हस्ताक्षर लेने और फिर उन भारी-भरकम दस्तावेजों को स्कैन कर ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने जैसे विशुद्ध क्लैरिकल और तकनीकी काम करवाए जा रहे हैं।”
‘सस्पेंशन’ का डर दिखाकर काम कराने की जिद; युवाओं को रोजगार देने की उठी मांग
यमुनानगर के शिक्षक नेताओं ने सबसे गंभीर आरोप अधिकारियों के तानाशाही पूर्ण रवैए पर लगाया। संघ का कहना है कि प्रपत्रों के वितरण और डेटा एंट्री की जमीनी हकीकत को समझे बिना, वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारी महज चार से पांच दिनों के भीतर पूरा टारगेट हासिल करने का फरमान सुना देते हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में अधिकांश मतदाता खुद फॉर्म भरने में सक्षम नहीं हैं, जिसके चलते पूरी जिम्मेदारी शिक्षक के कंधों पर आ जाती है।
अध्यापक संघ ने आरोप लगाया कि कई ब्लॉक में तो अधिकारियों ने हद पार करते हुए टारगेट पूरा न होने पर सीधे निलंबन (सस्पेंशन) और एफआईआर दर्ज कराने जैसी ओछी चेतावनियां देना शुरू कर दिया है, जिससे कर्मचारी भारी मानसिक तनाव में हैं। इस गतिरोध को दूर करने के लिए संघ ने उपायुक्त के सामने एक व्यावहारिक प्रस्ताव रखा है।
उन्होंने मांग की है कि इस एसआईआर कार्य की समय-सीमा को तुरंत बढ़ाया जाए और इस तकनीकी काम के लिए आईटी-प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं को मानदेय पर नियुक्त किया जाए। इससे न केवल पढ़े-लिखे युवाओं को कुछ समय का रोजगार मिलेगा, बल्कि स्कूलों में पढ़ाई का माहौल भी खराब नहीं होगा।

