Pakistan Gurudwara: पाकिस्तान में 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे पर चला बुलडोजर, सिख संगठनों ने पीएम मोदी से की यह बड़ी मांग
पाकिस्तान में 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे पर चला बुलडोजर
Pakistan Gurudwara (अभिषेक पूर्णिमा) सरहद पार पाकिस्तान से आई एक बेहद विचलित करने वाली खबर ने दुनिया भर में बसे सिख समुदाय को गहरे रोष और पीड़ा से भर दिया है। मामला पाकिस्तान के फारूकाबाद चुहरकाना इलाके का है, जहां 125 साल पुराने ऐतिहासिक ‘गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब’ के भवन को बुलडोजर चलाकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस अमानवीय और मजहबी उन्माद से प्रेरित घटना की गूंज अब हरियाणा के पिहोवा तक पहुंच गई है। हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के निदेशक सरदार हरपाल सिंह ने इस मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकार और उनकी आस्था के केंद्र बिल्कुल महफूज नहीं हैं।
गुरु नानक देव जी की स्मृतियों और सिंह सभा आंदोलन से जुड़ा है स्वर्णिम इतिहास
धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से इस गुरुद्वारे का महत्व बेहद खास है। सरदार हरपाल सिंह ने इसके इतिहास पर रोशनी डालते हुए बताया कि इस स्थान का सीधा संबंध सिख धर्म के संस्थापक और पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी से जुड़ा हुआ है। बाद में, साल 1901 में जब देश में ‘सिंह सभा आंदोलन’ चरम पर था, तब इस भव्य गुरुद्वारा साहिब के भवन का निर्माण कराया गया था। लाहौर से महज 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह पावन स्थल सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि दुनिया भर के सिखों की अटूट आस्था, विरासत और इतिहास का जीवंत गवाह है, जिसे पाकिस्तान के भू-माफिया और कट्टरपंथियों ने मिलकर निशाना बनाया है।
स्थानीय प्रशासन की मौन सहमति? अल्पसंख्यकों के दमन का खुला प्रयास
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरदार हरपाल सिंह ने पाकिस्तान की हुकूमत और वहां के स्थानीय प्रशासन को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इस ऐतिहासिक इमारत को जमींदोज किया जा रहा था, तब वहां का अमला मूकदर्शक बना रहा। पाकिस्तान में हिंदुओं और सिखों के धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों को योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक रूप से बहुसंख्यक आबादी वाले इस पड़ोसी मुल्क में सिखों की आवाज और उनके वजूद को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से राजनयिक हस्तक्षेप की गुहार
इस गंभीर संकट को देखते हुए भारत के सिख संगठनों ने नई दिल्ली का दरवाजा खटखटाया है। हरपाल सिंह और अन्य मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से पुरजोर वकालत की है कि वे इस संवेदनशील मामले में खुद आगे आएं। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि वैश्विक मंचों और राजनयिक चैनलों के माध्यम से पाकिस्तान सरकार पर इतना सख्त दबाव बनाया जाए कि न केवल इस घिनौने कृत्य के दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए, बल्कि खंडित किए गए गुरुद्वारा साहिब के भवन का सरकारी खर्च पर पूरी गरिमा के साथ पुनर्निर्माण कराया जाए।
‘नागरिकता संशोधन अधिनियम’ (CAA) की प्रासंगिकता फिर हुई सिद्ध
सरदार हरपाल सिंह ने इस घटनाक्रम को भारत सरकार द्वारा लागू किए गए नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) 2019 से जोड़ते हुए कहा कि आज की यह घटना साबित करती है कि यह कानून कितना दूरदर्शी था। उन्होंने कहा कि जब मोदी सरकार पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में मजहबी प्रताड़ना झेल रहे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों को भारत की नागरिकता देने का कानून लाई थी, तब कई ताकतों ने इसका विरोध किया था। लेकिन आज की यह बर्बर घटना साफ दिखाती है कि पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों का जीना किस कदर मुहाल हो चुका है और भारत ही उनके लिए एकमात्र सुरक्षित आसरा है।
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