July 5, 2026

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, वेतन आयोग ने 31 जुलाई तक बढ़ाई यह डेडलाइन

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8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर, वेतन आयोग ने 31 जुलाई तक बढ़ाई यह डेडलाइन

भुवनेश्वर और कोलकाता में बैठकों का दौर शुरू, 8वें वेतन आयोग ने कसी कमर

8th Pay Commission: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस वक्त 8वें वेतन आयोग की हर हलचल पर टिकी हैं। भले ही अगले महंगाई भत्ते (DA) का गणित अभी 7वें वेतन आयोग के फॉर्मूले से ही तय होना है, लेकिन नए वेतन आयोग की तैयारियों ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है।

इसी कड़ी में आयोग की तरफ से तीन बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जो आने वाले दिनों में कर्मचारियों के वेतनमान और पेंशन की रूपरेखा तय करेंगी। आयोग ने सबसे बड़ा राहत भरा फैसला केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों को देते हुए आंकड़े जुटाने की समय-सीमा को आगे बढ़ा दिया है।

आधिकारिक तौर पर जारी आदेश के मुताबिक, अब विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारी 31 जुलाई तक डेटा कलेक्शन पोर्टल पर कर्मचारियों से जुड़ी जरूरी जानकारियां ऑनलाइन अपलोड कर सकेंगे।

दरअसल, कई मंत्रालयों और राज्य प्रशासनों ने हाथ खड़े करते हुए कहा था कि तय वक्त के भीतर सारा डेटा जुटा पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। प्रशासनिक दिक्कतों और विभागों की इसी गुहार को देखते हुए आयोग ने यह अतिरिक्त समय देने का फैसला किया, ताकि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छूटने न पाए।

भुवनेश्वर और कोलकाता में सजेगी चौपाल, कर्मचारी संगठनों से सीधे बात करेगा आयोग

आंकड़े जुटाने की इस कसरत के समानांतर, 8वां केंद्रीय वेतन आयोग अब जमीन पर उतरकर सीधे हितधारकों से संवाद करने जा रहा है। इसी सिलसिले में आयोग अपनी अगली क्षेत्रीय और यूनियन परामर्श बैठकें आयोजित करने जा रहा है।

शेड्यूल के मुताबिक, 6 और 7 जुलाई को भुवनेश्वर में जबकि 9 और 10 जुलाई को कोलकाता में इन बैठकों का आयोजन होगा। इन बैठकों का सीधा मकसद केंद्र सरकार के कर्मचारियों, रिटायर्ड पेंशनभोगियों और विभिन्न कर्मचारी यूनियनों के नुमाइंदों को एक मंच पर लाना है, ताकि वेतन, पेंशन और सर्विस रूल्स में सुधार को लेकर उनके सुझावों को सीधे दर्ज किया जा सके।

आयोग ने उन तमाम संगठनों, संस्थानों और रजिस्टर्ड यूनियनों को खुला न्योता दिया है जो अपनी बात रखना चाहते हैं। इसके लिए बकायदा ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने की व्यवस्था की गई है। इस पूरी कवायद के पीछे सोच यह है कि बंद कमरों में नीतियां बनाने के बजाय उन लोगों की जमीनी दिक्कतों और उम्मीदों को समझा जाए, जिन पर इन सिफारिशों का सीधा असर पड़ना है।

फिटमेंट फैक्टर को लेकर रस्साकशी तेज, 3.83 गुना तक बढ़ाने की उठ रही मांग

इस पूरे घटनाक्रम के बीच जो सबसे संवेदनशील और पेचीदा मुद्दा बना हुआ है, वह है फिटमेंट फैक्टर। यही वह पैमाना है जिससे यह तय होता है कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में कितना उछाल आएगा।

फिलहाल कर्मचारी संगठनों और यूनियनों की तरफ से दबाव बनाने का दौर जारी है और अलग-अलग मंचों से फिटमेंट फैक्टर को लेकर बड़ी मांगें सामने आ रही हैं। इस समय न्यूनतम 1.82 गुना से लेकर अधिकतम 3.83 गुना तक फिटमेंट फैक्टर रखने की पैरवी की जा रही है।

अगर इतिहास पर नजर डालें, तो छठे वेतन आयोग में यह फिटमेंट फैक्टर 1.86 था, जिसे सातवें वेतन आयोग में बढ़ाकर 2.57 तय किया गया था। कर्मचारी यूनियनों का तर्क है कि महंगाई और जीवन स्तर के खर्चों को देखते हुए इस बार इसमें बड़ा इजाफा होना चाहिए।

हालांकि, आयोग ने अभी तक इस मोर्चे पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। साफ है कि भुवनेश्वर और कोलकाता की बैठकों में मिलने वाले फीडबैक और वित्तीय गणित को तौलने के बाद ही आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार के सामने पेश करेगा।

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