July 5, 2026

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में होमगार्ड की हत्या मामले में तीन को आजीवन कारावास

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Himachal News: हिमाचल प्रदेश में होमगार्ड की हत्या मामले में तीन को आजीवन कारावास

2016 का होमगार्ड की हत्या का मामला

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सत्र अदालत ने वर्ष 2016 में ड्यूटी के दौरान एक होमगार्ड जवान की हत्या के मामले में तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सत्र न्यायाधीश अबीरा बसु ने सरकाघाट निवासी संजय, मनीष कुमार और पंकज सोनी को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए प्रत्येक पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी निभाने से रोकने और उस पर हमला करने के मामलों में भी अलग-अलग कठोर कारावास की सजा सुनाई है। फैसले की प्रति शनिवार को उपलब्ध कराई गई।

सत्र न्यायाधीश अबीरा बसु ने तीनों दोषियों को एक लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के अपराध में तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और 30-30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा लोक सेवक पर हमला करने या बल प्रयोग करने के मामले में दो-दो वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने का भी आदेश दिया गया। अदालत ने सभी आरोपों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।

31 दिसंबर 2016 को गश्त के दौरान हुआ था हमला
अभियोजन के अनुसार, 31 दिसंबर 2016 की रात होमगार्ड जवान जोगिंदर सिंह और दिला राम सरकाघाट क्षेत्र में नियमित गश्त पर तैनात थे। ड्यूटी के दौरान उन्होंने एक मोटरसाइकिल को लहराते हुए यानी जिग-जैग तरीके से चलते देखा। संदेह होने पर दोनों जवानों ने मोटरसाइकिल को रुकने का संकेत दिया। इसी दौरान वहां दो अन्य मोटरसाइकिलें भी पहुंच गईं और आरोपियों ने दोनों होमगार्ड जवानों पर हमला कर दिया।

इलाज के दौरान होमगार्ड जवान की हुई थी मौत
हमले में होमगार्ड जवान जोगिंदर सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। दूसरे होमगार्ड जवान भी हमले में घायल हुए थे। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया।

मामले की सुनवाई के बाद मंडी की सत्र अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने हत्या के अपराध के साथ-साथ सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और ड्यूटी में बाधा डालने के मामलों में भी सजा सुनाई। इस फैसले के साथ करीब नौ वर्ष पुराने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुई।

 

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