Pakistan Unique Wedding: पाकिस्तान में बाप-बेटों ने एक साथ रचाई शादी, सोशल मीडिया पर वायरल हुईं तस्वीरें
दो बेटों की शादी के खर्च में ही पिता ने निपटाया अपना तीसरा निकाह, देखें तस्वीरें
Pakistan Unique Wedding: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के क्वेटा शहर से एक ऐसा दिलचस्प मामला सामने आया है, जिसने रीति-रिवाजों और सामाजिक परंपराओं की स्थापित धारणाओं को हिलाकर रख दिया है।
अमूमन शादियों में पिता मेहमानों की खातिरदारी और बेटों के सेहरे की फिक्र में डूबे नजर आते हैं, लेकिन यहां एक मध्यमवर्गीय परिवार के मुखिया ने कुछ अलग ही कहानी लिख दी। पिता ने अपने दो जवान बेटों की शादी वाले दिन ही खुद भी तीसरी बार निकाह करने का फैसला कर लिया। इस संयुक्त निकाह का वीडियो और तस्वीरें जैसे ही इंटरनेट पर आईं, मानों सोशल मीडिया यूजर्स के बीच कमेंट्स की बाढ़ आ गई।
एक ही पंडाल में निपटा पूरा काम, हैरान रह गए मेहमान
पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस अनोखे आयोजन के पीछे की मुख्य वजह शादी के खर्चों में कटौती करना और इस पल को हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बनाना था।
पिता ने तय किया कि जब दोनों बेटों की शादी एक ही वेन्यू से हो रही है, तो क्यों न वे खुद भी अपनी नई जिंदगी की शुरुआत इसी मुहूर्त में कर लें। शादी के पंडाल में जब एक साथ तीन दूल्हे पारंपरिक लिबास और सेहरा बांधकर बैठे, तो वहां आए मेहमान भी अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाए। समारोह में दावत, नाच-गाने और रस्मों का दौर बड़े पैमाने पर चला, जिसमें सैकड़ों लोग शरीक हुए।
इंटरनेट पर छिड़ी जंग, कोई बोला ‘सच्चा प्यार’ तो किसी ने उठाए सवाल
इस शादी की तस्वीरें वायरल होते ही नेटिजंस दो धड़ों में बंट गए हैं। पाकिस्तान में खर्च बचाने के लिए भाई-बहनों या रिश्तेदारों की एक साथ शादियां होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन बाप-बेटों का एक साथ मंडप साझा करना और वह भी पिता की तीसरी शादी के लिए, लोगों को हजम नहीं हो रहा है।
सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे पारिवारिक एकजुटता और आपसी समझदारी की मिसाल बता रहे हैं। वहीं, आलोचकों का कहना है कि बच्चों की शादी के दिन पिता का ऐसा कदम सामाजिक मर्यादाओं के लिहाज से ठीक नहीं है। कई लोग इस बात को लेकर भी फिक्रमंद दिखे कि परिवार में आने वाली नई दुल्हन को क्या वाकई वाजिब सम्मान मिल पाएगा?
कानूनन जायज, पर सामाजिक तौर पर अब भी अचरज भरा
धार्मिक और कानूनी नजरिए से देखें तो इस्लामी कायदे-कानूनों के तहत पुरुषों को चार शादियों की इजाजत है, इसलिए तकनीकी रूप से इस निकाह पर कोई सवाल नहीं है। मगर, व्यावहारिक तौर पर समाज में आज भी तीसरी शादी को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता। फिलहाल, पिता की इस नई बेगम की उम्र या उनकी पृष्ठभूमि के बारे में परिवार ने गोपनीयता बनाए रखी है।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे फैसले भले ही आर्थिक रूप से बजट को राहत देते हों और बड़े परिवारों को एक सूत्र में पिरोते हों, लेकिन इसमें हर सदस्य की व्यक्तिगत रजामंदी और मानसिक स्थिति का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी हो जाता है।
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