Dhand news: ढांड में सजेगी किसानों की चौपाल, सांसद जिन्दल की टीम ने लांच किया पोस्टर
ढांड में जुटने जा रहे हैं देश के बड़े कृषि और वेयरहाउसिंग एक्सपर्ट्स
Dhand news ढांड (नरेश ढांडा)। कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र के किसानों को पारंपरिक खेती के ढर्रे से निकालकर आधुनिक और मुनाफे वाली कृषि से जोड़ने के लिए एक जमीनी कवायद शुरू की जा रही है। सांसद नवीन जिन्दल की सोच को धरातल पर उतारने के लिए ‘नवीन कृषि संकल्प अभियान’ की रूपरेखा तैयार कर ली गई है। इसी सिलसिले में ढांड के एक निजी प्रतिष्ठान में नवीन जिन्दल फाउंडेशन की ओर से एक प्रेस वार्ता बुलाई गई, जहां अभियान के पोस्टर का विमोचन किया गया। फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने साफ किया कि 8 जुलाई 2026 को सुबह 9:30 बजे ढांड की राधा कृष्ण धर्मशाला में होने वाला यह आयोजन कुरुक्षेत्र के किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में नई तकनीक और संभावनाओं के द्वार खोलने का काम करेगा।
केंद्रीय विशेषज्ञ सिखाएंगे अन्न सहेजने और कमाई बढ़ाने के गुर
“हमारी सबसे बड़ी विडंबना यह है कि किसान खून-पसीना बहाकर फसल तो पैदा कर लेता है, लेकिन पुख्ता भंडारण व्यवस्था न होने से उसका एक बड़ा हिस्सा चूहे, नमी और कीड़े खा जाते हैं। इस अभियान के जरिए हम अन्न के एक-एक दाने को सुरक्षित रखने का संकल्प ले रहे हैं।” – ईशान पांडे, कोर्डिनेटर, नवीन कृषि संकल्प अभियान
अभियान के कोर्डिनेटर ईशान पांडे ने बताया कि इस कार्यक्रम में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के उपक्रम ‘सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन’ (केंद्रीय भंडारण निगम) की एक विशेष तीन सदस्यीय टीम शिरकत करेगी। इस टीम में शामिल तकनीकी और गैर-तकनीकी विशेषज्ञ किसानों को अनाज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के वैज्ञानिक तौर-तरीके बताएंगे। इसके साथ ही, किसानों को यह भी समझाया जाएगा कि इस आधुनिक भंडारण प्रणाली के जरिए वे कैसे विभिन्न सरकारी योजनाओं और बैंकों से वित्तीय लाभ (लोन व सब्सिडी) प्राप्त कर सकते हैं।
आत्मनिर्भर किसान से ही साकार होगा ‘विकसित भारत’
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कैथल कार्यालय प्रभारी रविन्द्र धीमान और फाउंडेशन के सदस्य आवेश सिंह ने सांसद नवीन जिन्दल के दृष्टिकोण को साझा किया। उन्होंने कहा कि देश को अगर सच्चे मायनों में ‘विकसित भारत’ बनाना है, तो उसकी शुरुआत गांव की चौपाल और खेत की मेड़ से करनी होगी। जब तक देश का अन्नदाता आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक कोई भी विकास अधूरा है।
इस अभियान के तहत पूरे कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र में ब्लॉक स्तर पर ऐसे 23 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में किसानों को केवल किताबी ज्ञान नहीं दिया जाएगा, बल्कि कृषि वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान सीधे संवाद करेंगे। इसमें:
प्राकृतिक खेती और पर्यावरण संरक्षण: रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल को कम करने और मिट्टी की सेहत सुधारने पर चर्चा होगी।
फसल विविधीकरण (Crop Diversification): धान-गेहूं के चक्रव्यूह से निकलकर नकदी और वैकल्पिक फसलों की खेती के व्यावहारिक नुस्खे साझा किए जाएंगे।
सरकारी योजनाओं का लाभ: केंद्र और राज्य सरकार की तमाम किसान-हितैषी योजनाओं की जटिल प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाकर उन तक सीधा लाभ पहुंचाया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ. राज कुमार, विकास राणा, आकाश राणा और पुंडरी हल्का प्रभारी अरविंद गोलन सहित कई स्थानीय नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने इस अभियान को कुरुक्षेत्र के कृषि इतिहास में एक मील का पत्थर बताया।
यह भी पढ़ें–पूर्व चेयरमैन विजय पंचगावा की अगुवाई में बिजली दफ्तर पहुंचे भिवानी के लोग, जर्जर तारों को बदलने की मांग
