Global Forgiveness Day: दिल में गुस्सा रखने वाले हो जाएं सावधान, शरीर को अंदर से खोखला कर रही है नफरत
आज 'फॉरगिवनेस डे' पर जानें खुद को आजाद करने का तरीका
Global Forgiveness Day: लड़ाई-झगड़े, धोखे या किसी के कड़वे व्यवहार से आहत होना इंसानी जीवन का एक आम हिस्सा है. अमूमन लोग ऐसी घटनाओं के बाद सालों-साल सामने वाले के प्रति गुस्सा और नाराजगी अपने भीतर पाले रखते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब आप किसी के लिए अपने दिल में नफरत या बदले की भावना को जिंदा रखते हैं, तो उसका नुकसान सामने वाले से कहीं ज्यादा आपके खुद के शरीर को होता है? आज 7 जुलाई को दुनिया भर में ‘ग्लोबल फॉरगिवनेस डे’ मनाया जा रहा है. यह दिन हमें याद दिलाता है कि किसी को माफ कर देना केवल एक नैतिक गुण नहीं है, बल्कि यह हमारी अपनी शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती के लिए बेहद जरूरी फैसला है.
जब भीतर सुलगता है गुस्सा: जानिए कैसे आपकी इम्युनिटी को खोखला करता है तनाव
चिकित्सा विज्ञान और मनोवैज्ञानिक शोधों में यह बात साफ हो चुकी है कि जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक किसी बात को लेकर भीतर ही भीतर घुटता या गुस्सा करता है, तो उसका शरीर लगातार ‘फाइट या फ्लाइट’ (तनाव की स्थिति) मोड में रहता है. इस वजह से शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन्स का स्तर लगातार बढ़ा रहता है. अगर यह स्थिति हफ्तों या महीनों तक बनी रहे, तो व्यक्ति का ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो जाता है, इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) कमजोर होने लगती है और लगातार सिरदर्द या क्रॉनिक थकान की समस्या घेर लेती है. मानसिक तौर पर यह गुस्सा धीरे-धीरे गहरी एंग्जायटी, बेचैनी और अवसाद (डिप्रेशन) में बदल जाता है.
वैज्ञानिक भी मानते हैं लोहा: माफ करने से सुधरती है दिल की सेहत और आती है सुकूं की नींद
किसी को माफ कर देने का सीधा सा अर्थ है कि आपने अतीत की उस बुरी घटना के भारी बोझ को अपने कंधों से उतार फेंका है. कई न्यूरोलॉजिकल और कार्डियोलॉजिकल स्टडीज बताती हैं कि जो लोग दूसरों की गलतियों को भूलकर आगे बढ़ जाते हैं, उनका दिल (Heart) उन लोगों के मुकाबले ज्यादा सेहतमंद रहता है जो रंजिश पालकर बैठते हैं.
मनोवैज्ञानिकों का मत: जब मन से नकारात्मक भावनाएं और कड़वाहट पूरी तरह साफ हो जाती है, तो दिमाग की नसें रिलैक्स होती हैं. इसका सीधा सकारात्मक असर रात की नींद पर पड़ता है. गहरी और सुकून भरी नींद आने से शरीर खुद को प्राकृतिक रूप से हील करने लगता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास में भारी इजाफा होता है.
जिंदगी में आगे बढ़ने का इकलौता मंत्र: भावनाओं को दबाएं नहीं, खुद को आजाद करें
ग्लोबल फॉरगिवनेस डे का मूल संदेश यही है कि जिंदगी बहुत छोटी है और इसे नफरत की आग में जलाकर खाक नहीं किया जा सकता. किसी को क्षमा करने का मतलब अपनी आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाना या अपनी भावनाओं को जबरन दबाना बिल्कुल नहीं है. यह तो खुद को नकारात्मकता के उस अंतहीन चक्रव्यूह से बाहर निकालने का एक साहसी कदम है. सबसे बड़ा उपहार जो हम इस जीवन में खुद को दे सकते हैं, वह है हमारे मन की शांति. इसलिए आज के दिन अपने भीतर झांकिए, पुरानी कड़वी यादों की गांठों को खोलिए, दूसरों को और खुद को भी उनकी गलतियों के लिए माफ कीजिए और एक सेहतमंद जीवन की तरफ कदम बढ़ाइए.
