Baroda constituency voter list: बरोदा के 38 गांवों की 2002 वाली वोटर लिस्ट पोर्टल से गायब, विधायक इंदुराज नरवाल ने खोला मोर्चा
बरोदा के 38 गांवों की 2002 वाली वोटर लिस्ट पोर्टल से गायब
Baroda constituency voter list: हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच निर्वाचन आयोग की एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है। बरोदा विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले मुंडलाना और कथूरा ब्लॉक के 38 गांवों की वर्ष 2002 की मतदाता सूची मुख्य निर्वाचन अधिकारी के ऑनलाइन पोर्टल से पूरी तरह गायब है। चुनाव आयोग के डिजिटल रिकॉर्ड में आए इस गंभीर तकनीकी फाल्ट के कारण इन गांवों में नए और पुराने मतदाताओं के वेरिफिकेशन का काम पूरी तरह ठप हो गया है। इस गड़बड़ी पर कड़ा संज्ञान लेते हुए बरोदा से कांग्रेस विधायक इंदुराज सिंह नरवाल ने हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को एक आधिकारिक पत्र लिखकर गहरी नाराजगी जताई है और मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है।
2002 की जगह दिख रहा 1999 का डेटा, वेरिफिकेशन अटका
दरअसल, निर्वाचन आयोग की ओर से सूबे में 15 जून से 14 जुलाई तक ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (एसआईआर) अभियान चलाया जा रहा है। इस देशव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य फर्जी मतदाताओं को हटाना और पात्र लोगों के नाम जोड़ना है, जिसके लिए नियम के मुताबिक साल 2002 और साल 2024 की मतदाता सूचियों का आपस में मिलान (क्रॉस-वेरिफिकेशन) किया जाना अनिवार्य है। विधायक इंदुराज नरवाल ने बताया कि जब इन 38 गांवों के बीएलओ और स्थानीय लोग ऑनलाइन पोर्टल पर रिकॉर्ड चेक करने पहुंचे, तो वहां वर्ष 2002 की सूची की जगह वर्ष 1999 का पुराना डेटा प्रदर्शित हो रहा था। इस तकनीकी मिसमैच की वजह से पात्र मतदाताओं के दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन और अन्य जरूरी चुनावी प्रक्रियाएं पूरी तरह से प्रभावित हो रही हैं।
‘समय सीमा बढ़ाए आयोग, ताकि वंचित न रह जाए कोई मतदाता’
विधायक नरवाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि ग्रामीण इलाकों में इस तकनीकी खामी की वजह से आम जनता और चुनाव कार्य में लगे कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित 38 गांवों की वर्ष 2002 की मूल मतदाता सूची को युद्ध स्तर पर काम करके पोर्टल पर तत्काल लाइव किया जाए। इसके साथ ही विधायक ने दलील दी है कि सरकारी गलती के कारण इन गांवों का काफी समय बर्बाद हो चुका है, इसलिए 14 जुलाई को समाप्त हो रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की अवधि को इन प्रभावित इलाकों के लिए आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने चेताया कि अगर समय सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो सैकड़ों वास्तविक और पात्र मतदाता अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित रह सकते हैं।
