remedies for stomach gas: मिनटों में दूर होगा पेट का भारीपन, रसोई की इन 5 चीजों से बनाएं गैस नाशक जादुई ड्रिंक्स
मिनटों में दूर होगा पेट का भारीपन
remedies for stomach gas: आधुनिक जीवनशैली ने हमें सहूलियतें तो बहुत दी हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ ऐसी बीमारियां भी उपहार में दी हैं जो अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं। इन्हीं में से एक है—पेट में गैस बनना, खट्टी डकारें आना और खाना खाते ही पेट का गुब्बारे की तरह फूल जाना। दफ्तर की आपाधापी, असमय बाहर का तला-भुना खाना, चबाने के बजाय भोजन को जल्दी-जल्दी निगलने की आदत और देर रात तक जागने की रूटीन ने हमारे पाचन तंत्र का कबाड़ा कर दिया है।
अक्सर लोग इस बेचैनी से निजात पाने के लिए तुरंत एंटासिड या कोई न कोई अंग्रेजी दवा गटक लेते हैं। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि हर छोटी समस्या के लिए रसायनों पर निर्भरता लंबे समय में आंतों को और कमजोर कर देती है।
राहत की बात यह है कि इस समस्या का अचूक और पूरी तरह सुरक्षित इलाज हमारी अपनी रसोई के मसालदान में ही छिपा है। कुछ पारंपरिक और प्राकृतिक पेय ऐसे हैं जो न केवल पाचन अग्नि को तेज करते हैं, बल्कि पेट की जकड़ी हुई मांसपेशियों को आराम देकर संचित गैस को भी आसानी से शरीर से बाहर का रास्ता दिखाते हैं।
इन 5 देसी ड्रिंक्स में छिपा है सेहत का राज
1. एंजाइम बढ़ाने वाला ‘जीरा पानी’: जीरा सिर्फ दाल में तड़का लगाने के काम नहीं आता, बल्कि यह पाचक रसों को सक्रिय करने का बेहतरीन जरिया है। भारी या मसालेदार भोजन के बाद यदि पेट तनने लगे, तो हल्का गुनगुना जीरा पानी पीने से आंतों को तुरंत राहत मिलती है। बहुत से लोग सुबह खाली पेट इसका सेवन कर अपनी मेटाबॉलिक रेट को दुरुस्त रखते हैं।
2. मांसपेशियों को सुस्ताने वाली ‘सौन्फ की चाय’: भारतीय संस्कृति में भोजन के बाद सौंफ मिश्री खाने का रिवाज वैज्ञानिक कारणों से है। सौंफ में ऐसे तैलीय तत्व होते हैं जो गैस्ट्रिक समस्याओं को शांत करते हैं। सौंफ को पानी में उबालकर बनाई गई हर्बल चाय पीने से पेट का भारीपन मिनटों में हवा हो जाता है।
3. सूजन नाशक ‘अदरक का काढ़ा’: अदरक को आयुर्वेद में महाऔषधि माना गया है। इसमें मौजूद ‘जिंजरॉल’ नामक तत्व पेट की अंदरूनी सूजन को कम करता है। यदि गरिष्ठ भोजन के बाद सीने में जलन या मतली महसूस हो, तो अदरक के टुकड़ों को पानी में अच्छी तरह उबालकर गुनगुना पीना एक बेहतरीन थेरेपी है।
4. थाइमोल से भरपूर ‘अजवाइन का पानी’: जब बात पेट दर्द या मरोड़ की हो, तो अजवाइन से बेहतर कुछ नहीं। अजवाइन में मौजूद ‘थाइमोल’ तत्व पेट की ऐंठन को रोकता है और जठराग्नि को प्रदीप्त करता है। ओवर-ईटिंग (ज्यादा खा लेने) के बाद आधा चम्मच अजवाइन का उबला पानी अमृत समान असर दिखाता है।
5. प्रोबायोटिक का खजाना ‘जीरा-छाछ’: दोपहर के भोजन के बाद एक गिलास छाछ (मट्ठा) में काला नमक और भुना हुआ जीरा मिलाकर पीना पेट को शीतलता देता है। छाछ में मौजूद लैक्टिक एसिड और प्रोबायोटिक्स आंतों के मित्र बैक्टीरिया को पोषण देते हैं, जिससे गैस बनने की प्रक्रिया स्थायी रूप से धीमी हो जाती है।
आदतें बदलें, बदहजमी से बचें
केवल नुस्खों के भरोसे रहने के बजाय अगर दैनिक आदतों में थोड़ा सुधार कर लिया जाए, तो गैस बनने की नौबत ही नहीं आएगी। डॉक्टरों की सलाह है कि भोजन को हमेशा शांति से चबा-चबाकर खाएं ताकि लार (सलाइवा) उसमें अच्छी तरह मिल सके। इसके अलावा, खाते समय बात करने की आदत से बचें क्योंकि इससे पेट में अतिरिक्त हवा चली जाती है। खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेटने की जगह 15 मिनट की वज्रासन मुद्रा या धीमी वॉक (टहलना) पाचन को सुगम बनाती है।
चेतावनी: यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि यदि पेट फूलने की यह समस्या पुरानी हो चुकी है और इसके साथ ही तेजी से वजन घट रहा हो, लगातार उल्टी आ रही हो या शौच के दौरान खून की शिकायत हो, तो इसे कतई घरेलू नुस्खों से दबाने की कोशिश न करें। यह किसी गंभीर गैस्ट्रिक अल्सर या आंतों के संक्रमण का संकेत हो सकता है, जिसके लिए तुरंत किसी योग्य गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच कराना ही एकमात्र समझदारी भरा विकल्प है।
यह भी पढ़ें–इंसान की एक गलती और मौत!
