Uttar Pradesh News: यूपी में मानसून का रौद्र रूप, 75 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, नदियां खतरे के निशान के पार
मेरठ के मवाना में टूटा बारिश का रिकॉर्ड; मूसलाधार बारिश से उत्तर प्रदेश में 3 दिन में 15 मौतें
Uttar Pradesh News: प्रकृति का मिजाज कब राहत से आफत में बदल जाए, कहना मुश्किल है। भीषण गर्मी और उमस से तड़प रहे उत्तर प्रदेश को मानसून ने राहत तो दी, लेकिन अब यही बारिश सूबे के लिए बड़ी मुसीबत बन चुकी है। शुक्रवार की देर रात से शुरू हुआ मूसलाधार बारिश का सिलसिला शनिवार को भी थमने का नाम नहीं ले रहा है।
राजधानी लखनऊ, रामनगरी अयोध्या और सुल्तानपुर समेत दर्जनों जिलों में आसमानी आफत इस कदर बरसी है कि सड़कें तालाब और गलियां नदियां नजर आने लगी हैं। सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इस मौसमी हाहाकार के बीच पिछले 72 घंटों में अलग-अलग हादसों में 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
पश्चिमी यूपी में हाहाकार; पुलों के ऊपर बहा पानी, कब्रिस्तान से बाहर आए शव
इस मानसूनी दौर का सबसे क्रूर चेहरा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में देखने को मिल रहा है। बिजनौर में गंगा और मालन नदियों के उफनते पानी ने तटीय इलाकों में दहशत पैदा कर दी है। पानी का बहाव इतना तेज है कि कई मुख्य पुलों के ऊपर से लहरें गुजर रही हैं, जिसके चलते प्रशासन ने एहतियातन मेरठ-बिजनौर हाईवे और हरिद्वार रोड पर गाड़ियों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।
हादसों की बात करें तो बिजनौर में नदी के तेज बहाव में चार किशोर बह गए, जिनमें से महज एक को ही सुरक्षित निकाला जा सका; दो सगे दोस्तों शाबान और आलिम की तलाश में गोताखोर जुटे हुए हैं। वहीं, सहारनपुर से एक बेहद विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई, जहां पहाड़ी नदियों के पानी के तेज बहाव के कारण एक स्थानीय कब्रिस्तान की मिट्टी पूरी तरह बह गई और कुछ शव कब्रों से बाहर आ गए। हापुड़ के एक जलमग्न अंडरपास में तो एक थार गाड़ी खिलौने की तरह तैरती नजर आई, जिसे घंटों की मशक्कत के बाद जेसीबी से बाहर खींचा गया।
मवाना में ‘बादल फटने’ जैसी बारिश, पर आंकड़ों का गणित कुछ और
मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले 24 घंटों में मेरठ का मवाना कस्बा पानी-पानी हो गया, जहां रिकॉर्ड 315 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके ठीक बाद मुजफ्फरनगर के जानसठ में 270.1 मिमी वर्षा रिकॉर्ड हुई, जिसने ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोलकर रख दी।
विरोधाभास: इस भारी तबाही के बीच मौसम विज्ञानियों का एक आंकड़ा चौंकाने वाला है। इस भारी बारिश के बावजूद, पूरे मानसून सीजन में उत्तर प्रदेश में अब तक सामान्य से करीब 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। यानी बारिश का वितरण इतना असमान है कि कहीं सूखा है तो कहीं बाढ़ जैसे हालात।
अभी राहत नहीं; मध्य प्रदेश के ऊपर बने चक्रवात का दिख रहा असर
मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक, यूपी वालों को अभी इस आफत से निजात मिलने वाली नहीं है। दरअसल, बंगाल की खाड़ी से उठा एक बेहद सक्रिय वेदर सिस्टम (मौसम तंत्र) इस वक्त मध्य प्रदेश के ऊपर केंद्रित है। इसी सिस्टम के असर से उत्तर प्रदेश में अगले 3 से 4 दिनों तक रुक-रुक कर भारी से बेहद भारी बारिश होने की पूरी आशंका है। मौसम विभाग ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से अपील की है कि वे उफनते नदी-नालों, बिजली के खंभों और जर्जर इमारतों से दूर रहें।
जमीनी हालात: कहीं धंसी सड़क, तो कहीं उमस से मिली राहत
जहां एक तरफ इस बारिश ने तबाही मचाई है, वहीं कुछ इलाकों में मौसम सुहावना भी हुआ है। जौनपुर, संभल, बलिया और लखनऊ में तापमान में दो से तीन डिग्री की गिरावट आने से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, बुनियादी ढांचे की कमजोरी हर जगह उजागर हो रही है; मिर्जापुर में अचानक एक मुख्य सड़क के धंस जाने से एक मोपेड सवार और दो मासूम बच्चे गहरे गड्ढे में समा गए, जिन्हें स्थानीय दुकानदारों ने देवदूत बनकर सुरक्षित बाहर निकाला।
क्या इस साल कम बरसेगा मानसून? आईएमडी का अनुमान
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्रा के अनुसार, उत्तर प्रदेश में जून से सितंबर के बीच अमूमन 820 से 840 मिमी तक बारिश होती है। लेकिन इस साल प्रशांत महासागर में अल नीनो के उभरते प्रभाव और बदलती वैश्विक मौसमी परिस्थितियों के कारण, यूपी में सामान्य से 8 प्रतिशत कम यानी करीब 754 से 773 मिमी बारिश होने का ही अनुमान है। साफ है कि मानसून की अवधि भले ही कम हो, लेकिन जब भी बादल बरसेंगे, इसी तरह की तीव्र और आक्रामक बारिश देखने को मिल सकती है।
