Jasmine Sandlas Engagement: जैस्मिन सैंडलास ने लाइव कॉन्सर्ट में मंगेतर शेखर चौधरी से कराया परिचय, दिखाई सगाई की अंगूठी
20 रुपये की सीडी बेचने से ग्लोबल स्टार बनने तक, सिंगर जैस्मिन सैंडलास ने यशोभूमि में शेयर की अपनी लव स्टोरी
Jasmine Sandlas Engagement: दिल्ली-एनसीआर के द्वारका एक्सप्रेसवे पर स्थित देश के सबसे बड़े कन्वेंशन सेंटर ‘यशोभूमि’ में शनिवार की रात संगीत और रोमांस का एक अनोखा संगम देखने को मिला।
‘द ड्रीम गर्ल इंडिया टूर 2026’ के तहत आयोजित इस लाइव कॉन्सर्ट में जैसे ही पंजाबी सिंगर जैस्मिन सैंडलास ने अपने सिग्नेचर स्टाइल में हाथ उठाकर स्टेज पर एंट्री ली, पूरा हॉल हूटिंग और तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। शो की शुरुआत उन्होंने अपने ब्लॉकबस्टर गाने ‘यार ना मिले’ से की। लेकिन असली सरप्राइज तो अभी बाकी था, जिसने वहां मौजूद हजारों फैंस के होश उड़ा दिए।
मंगेतर का हाथ पकड़कर स्टेज पर आईं ‘गुलाबी क्वीन’, फ्लॉन्ट की सगाई की अंगूठी
कॉन्सर्ट जब अपने पूरे शबाब पर था और भीड़ ‘इल्लीगल वेपन’ तथा ‘सिप सिप’ जैसे गानों पर थिरक रही थी, तभी जैस्मिन ने अचानक म्यूजिक रुकवा दिया।
उन्होंने माइक पर कहा कि उनके जीवन का यह नया और सबसे खूबसूरत अध्याय उनके फैंस के बिना बिल्कुल अधूरा है। इसके तुरंत बाद जैस्मिन मंच के पीछे गईं और अपने मंगेतर शेखर चौधरी का हाथ थामकर उन्हें दर्शकों के सामने ले आईं। शेखर को देखते ही जैस्मिन ने उन्हें दौड़कर गले लगा लिया और उंगली में चमचमाती सगाई की अंगूठी दिखाते हुए आधिकारिक तौर पर अपने रिश्ते का एलान कर दिया।
शेखर चौधरी पेशे से एक जाने-माने बिजनेसमैन हैं। जैस्मिन के इस एलान के बाद दोनों ने मंच पर अपने मशहूर गाने ‘सोनिये तू लेंदा मेरा नाम’ पर बेहद रोमांटिक कपल डांस किया।
जवाब में शेखर ने भी हाथ जोड़कर दर्शकों का अभिवादन स्वीकार किया, जबकि पूरे हॉल में मौजूद फैंस ने अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाकर इस खूबसूरत जोड़ी का स्वागत किया। जैस्मिन ने भावुक होते हुए कहा, “यह मेरा ड्रीम टूर है और इसे अपने जीवनसाथी और आप सभी के साथ बांटने से बेहतर अहसास दुनिया में कोई दूसरा नहीं हो सकता।”
जालंधर की गलियों से कैलिफोर्निया के हिप-हॉप तक का कड़ा संघर्ष
आज भले ही जैस्मिन सैंडलास एक ग्लोबल पंजाबी आइकॉन बन चुकी हैं, लेकिन उनकी सफलता की यह कहानी रातों-रात नहीं लिखी गई। साल 1985 में पंजाब के जालंधर में जन्मी जैस्मिन को बचपन से ही गणित और विज्ञान की क्लास बोरिंग लगती थी, उनका दिल सिर्फ म्यूजिक रूम में रमता था।
महज 6 साल की उम्र से गाना शुरू करने वाली जैस्मिन के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब 13 साल की उम्र में उनका परिवार कैलिफोर्निया के स्टॉकटन शहर में शिफ्ट हो गया। अजनबी देश, नया माहौल और बिना किसी दोस्त के इस दौर में संगीत ही उनका इकलौता सहारा बना। यहीं उन्होंने पंजाबी लोक संगीत को अमेरिकी वेस्ट कोस्ट हिप-हॉप के साथ मिलाकर अपना एक अलग और अनूठा म्यूजिक स्टाइल ईजाद किया।
जब 20 रुपये की सीडी बेचने के लिए क्लबों के बाहर खड़ी रहती थीं जैस्मिन
बिना किसी गॉडफादर के म्यूजिक इंडस्ट्री में पैर जमाने के लिए जैस्मिन ने जो संघर्ष किया, वो आज के नए कलाकारों के लिए एक बड़ी मिसाल है। शुरुआती दिनों में वे अपनी खुद की गाई हुई गानों की सीडी तैयार करती थीं और उसे महज 20 रुपये में बेचने के लिए अमेरिका के बड़े-बड़े क्लबों के बाहर घंटों खड़ी रहती थीं।
वे हर आने-जाने वाले को इस उम्मीद में अपनी सीडी थमाती थीं कि कोई एक बार उनकी आवाज सुन ले। उनका यही जुनून और मां का लगातार मिला प्रोत्साहन आज रंग ला रहा है। हाल ही में फिल्म ‘मुंज्या’ के गाने ‘तरस’ और फिल्म ‘धुरंधर’ की ब्लॉकबस्टर सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि संगीत की दुनिया में इस ‘गुलाबी क्वीन’ का जादू आज भी सिर चढ़कर बोल रहा है।
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