July 13, 2026

Methanol Fuel: ₹20/लीटर वाले मेथेनॉल फ्यूल से चलेगी आपकी गाड़ी! नितिन गडकरी ने बताया डीजल को रिप्लेस करने का पूरा प्लान

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Methanol Fuel: ₹20/लीटर वाले मेथेनॉल फ्यूल से चलेगी आपकी गाड़ी! नितिन गडकरी ने बताया डीजल को रिप्लेस करने का पूरा प्लान

अशोक लेलैंड ने तैयार किया 100% मेथेनॉल से चलने वाला इंजन, ट्रांसपोर्ट सेक्टर में आने वाली है बड़ी क्रांति

Methanol Fuel: भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 85 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव रहता है। इस निर्भरता को खत्म करने और आम आदमी व ट्रांसपोर्टर्स को बड़ी राहत देने के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना का खाका पेश किया है।

हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि मेथेनॉल और इथेनॉल जैसे ग्रीन फ्यूल ही भारत का भविष्य हैं। जहां कई राज्यों में डीजल का भाव 100 रुपये प्रति लीटर के पार है, वहीं देश में ही तैयार होने वाले मेथेनॉल की अनुमानित लागत सिर्फ 20 से 22 रुपये प्रति लीटर बैठती है।

गडकरी के मुताबिक, असम पेट्रो-केमिकल्स ने इस दिशा में बड़ी बढ़त लेते हुए रोजाना करीब 700 टन मेथेनॉल का उत्पादन शुरू कर दिया है। यदि वाणिज्यिक (कमर्शियल) स्तर पर इस ईंधन को पूरे देश में उतार दिया जाता है, तो मालभाड़े में भारी गिरावट आएगी, जिसका सीधा असर महंगाई कम होने के रूप में दिखेगा।

फाइलों में नहीं, सड़कों पर पास हो चुका है मेथेनॉल; नामी कंपनियों ने कसी कमर

अक्सर ऐसी नई तकनीकों को लेकर यह संशय रहता है कि क्या ये व्यावहारिक रूप से सफल होंगी? लेकिन मेथेनॉल का गणित इससे बिल्कुल जुदा है। कर्नाटक में इसका बकायदा ऑन-रोड ट्रायल किया जा चुका है, जहां 15 फीसदी मेथेनॉल को डीजल में मिलाकर स्टेट ट्रांसपोर्ट की बसों को करीब तीन महीने तक रूट पर चलाया गया। इस कड़े परीक्षण के दौरान न तो गाड़ियों के इंजन में कोई तकनीकी खराबी आई और न ही उनकी परफॉर्मेंस (माइलेज और पिकअप) में कोई कमी देखी गई।

इस सफलता से उत्साहित होकर देश की प्रमुख कमर्शियल वाहन निर्माता कंपनी अशोक लेलैंड (Ashok Leyland) ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए शत-प्रतिशत (100%) मेथेनॉल पर चलने वाले विशेष डेडिकेटेड इंजन भी विकसित कर लिए हैं।

जनरेटर से लेकर जहाजों तक; सिर्फ गाड़ियां नहीं, सब कुछ बदलेगा

मेथेनॉल का दायरा सिर्फ ट्रकों या बसों तक सीमित नहीं रहने वाला है। सरकार का खाका बेहद दूरगामी है, जिसके तहत जल परिवहन (शिपिंग), भारी कंस्ट्रक्शन मशीनरी और कृषि क्षेत्र का भी कायाकल्प किया जाएगा।

गडकरी ने जानकारी दी कि मेथेनॉल के अलावा इथेनॉल से ही तैयार होने वाला ‘आइसो-ब्यूटानॉल’ भी डीजल के एक तगड़े रिप्लेसमेंट के तौर पर उभरा है। मशहूर किर्लोस्कर ग्रुप ने 100% इथेनॉल और आइसो-ब्यूटानॉल से चलने वाले भारी जनरेटर सेट बाजार में उतारने की तैयारी कर ली है। आने वाले समय में खेतों में चलने वाले ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और खदानों में काम करने वाली मशीनें इसी स्वदेशी और सस्ते ईंधन की बदौलत चलेंगी।

दाता नहीं, अब ‘ऊर्जादाता’ बनेंगे देश के किसान; सुधरेगी आबोहवा

इस पूरी मुहिम का सबसे खूबसूरत पहलू इसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण से जुड़ा होना है। मेथेनॉल का उत्पादन कोयले, प्राकृतिक गैस और जैविक कचरे से किया जा सकता है। सरकार की योजना पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) के राज्यों में प्रचुर मात्रा में होने वाले बांस (Bamboo) का इस्तेमाल कर बड़ी रिफाइनरियां स्थापित करने की है। इससे कृषि अवशेषों, पराली और बांस की खेती करने वाले किसानों को सीधे तौर पर एक नया बाजार मिलेगा और उनकी आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी।

इसके साथ ही, पर्यावरण के मोर्चे पर भी यह कदम गेमचेंजर साबित होगा। डीजल की तुलना में मेथेनॉल और आइसो-ब्यूटानॉल जैसे ईंधन बेहद कम कार्बन और सूक्ष्म कण (Particulate Matter) उत्सर्जित करते हैं। सड़कों से लेकर नदियों और समुद्रों में चलने वाले जहाजों में जब इस क्लीन एनर्जी का इस्तेमाल शुरू होगा, तो देश के महानगरों को जानलेवा प्रदूषण और धुंध से हमेशा के लिए आजादी मिल सकेगी। साफ है कि सरकार की यह ‘मेथेनॉल इकॉनमी’ भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम है।

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