पूर्व TMC नेताओं सुष्मिता देव, सुखेंदु राय और प्रकाश बराइक ने भाजपा से भरा राज्यसभा नामांकन
पश्चिम बंगाल: पूर्व TMC नेताओं को भाजपा ने बनाया राज्यसभा उम्मीदवार, नामांकन दाखिल
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा चुनाव के लिए पूर्व तृणमूल कांग्रेस नेताओं सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने भाजपा उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया। विधानसभा में भाजपा के संख्याबल को देखते हुए तीनों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय तथा प्रकाश चिक बराइक ने भाजपा उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया। मौजूदा विधानसभा गणित के आधार पर तीनों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
नामांकन के दौरान पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य मौजूद रहे। भाजपा ने इन तीनों नेताओं को हाल ही में पार्टी में शामिल कराया था।
विधानसभा का गणित भाजपा के पक्ष में क्यों है?
राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार की जीत के लिए 147 वोटों की जरूरत है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के पास अकेले 207 विधायक हैं, जिससे पार्टी अपने उम्मीदवारों को जीत दिलाने की स्थिति में है।
दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के पास 80 विधायक हैं। कांग्रेस के 2 विधायक, आईएसएफ और माकपा गठबंधन के 2 विधायक तथा आमजनता उन्नयन पार्टी का एक विधायक विपक्षी खेमे में हैं। ऐसे में विपक्ष एकजुट होने पर भी आवश्यक संख्या तक नहीं पहुंच पा रहा है।
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अब आगे क्या होगी प्रक्रिया?
मंगलवार को सभी उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद 17 जुलाई को दोपहर तीन बजे तक नाम वापस लेने का समय रहेगा।
यदि कोई अप्रत्याशित बदलाव नहीं होता है तो नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विजयी उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा। विधानसभा के सचिव सौमेंद्रनाथ दास इस चुनाव में पदेन रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में पूरी प्रक्रिया संपन्न कराएंगे।
भाजपा में शामिल होने के बाद मिला राज्यसभा का मौका
सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद तीनों नेताओं ने पार्टी छोड़ दी और भाजपा का दामन थाम लिया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने पहले कहा था कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के लिए पार्टी में जगह नहीं होगी। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल में रहते हुए जिन नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप नहीं हैं, उनके लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं। इसी नीति के तहत तीनों नेताओं को पार्टी में शामिल कराया गया।
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राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक संदेश क्या माना जा रहा है?
इन तीनों नेताओं को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को पश्चिम बंगाल की राजनीति में भाजपा की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। तृणमूल छोड़कर आए नेताओं को राज्यसभा भेजने का फैसला आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
